कांग्रेस की केंद्र सरकार से मांग, कहा- जरा बताएं किसानों की आदमनी में कितनी बढ़ोतरी हुई

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 29, 2020   16:08
कांग्रेस की केंद्र सरकार से मांग, कहा- जरा बताएं किसानों की आदमनी में कितनी बढ़ोतरी हुई

कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने की घोषणा करने वाली नरेंद्र मोदी सरकार इस बार के बजट में यह बताए कि पिछले कुछ वर्षों में देश के अन्नदाताओं की आमदनी कितनी बढ़ी है।

नयी दिल्ली। कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने की घोषणा करने वाली नरेंद्र मोदी सरकार इस बार के बजट में यह बताए कि पिछले कुछ वर्षों में देश के अन्नदाताओं की आमदनी कितनी बढ़ी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने यह दावा भी किया कि किसानों की आय को दोगुना करने की सरकार की घोषणा एक ‘चुनावी जुमला’ है और 2022 तक इसके पूरा होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

इसे भी पढ़ें: अमित शाह ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा- भ्रम फैला रहे हैं और लोगों को डरा रहे हैं

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह सरकार हमेशा गोलपोस्ट बदल रही है। कभी 2022 की बात करती है तो कभी 2024 की बात करती है। वादे पूरे नहीं करने के कारण वह लोगों को भ्रमित करती है। प्रधानमंत्री और उनके साथी ऐसा करते रहते हैं।’’ चव्हाण ने कहा, ‘‘सरकार की ओर से 2022 में किसान की आमदनी दोगुना करने की बात की गई थी। इस घोषणा को चार साल हो चुके हैं। अब जनता जानना चाहती है कि किसान की आमदनी कितनी बढ़ी है। अब सरकार बताए कि क्या वह अब भी यह कहती है कि 2022 तक किसानों की आय दोगुना हो जाएगी।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘हकीकत यह है कि यह घोषणा चुनावी जुमला थी और दूर दूर तक ऐसे आसार नहीं हैं कि 2022 तक यह पूरा हो।’’ महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सरकार की ओर से कृषि में बड़े निवेश की बात की गई थी। 2019 के बजट भाषण में वित्त मंत्री ने 10 हजार कृषि उत्पादक संगठन बनाने की बात कही थी। हम आशा करते हैं कि इस बार वह बताएंगी कि कितने संगठन बने हैं।’’

इसे भी पढ़ें: राजनाथ सिंह ने कहा- सीएए, एनआरसी पर विपक्ष लोगों को गुमराह कर रहा

उन्होंने कहा, ‘‘लागत पर 50 फीसदी न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का वादा किया गया था। कई तिलहन उपजों पर अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य ही नहीं मिला है।’’ चव्हाण ने कहा, ‘‘ हमारी मांग है कि कृषि को लेकर जीएसटी की दर कम की जाए। कृषि उपकरणों पर जीएसटी दर को पांच फीसदी तक किया जाए। कृषि उत्पादों पर भी जीएसटी कम किया जाए।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की आत्महत्या के आंकड़ों को छिपाया जा रहा है और अगर आंकड़े बताए जाते हैं तो वह तोड़-मरोड़कर बताए जाते हैं।

इसे भी देखें: बदलते दौर में बदली चाणक्य की परिभाषा





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।