संसद: स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा- कोविड टीके पूरी तरह सुरक्षित, भ्रमित होने की जरूरत नहीं

Harsh Vardhan
अंकित सिंह । Mar 19, 2021 8:15PM
बिट्टू ने कोरोना टीकों से भविष्य में लोगों के डीएनए पर दुष्प्रभाव पड़ने संबंधी आशंकाओं पर पूरक प्रश्न पूछा था। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आज के समय में कई बीमारियों से होने वाली मौत को टीके लगाकर रोका जा सकता है।

नयी दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री हर्षवर्धन ने कोरोना वायरस के टीकों को लेकर अनेक लोगों के मन में पैदा हो रहीं आशंकाओं को खारिज करते हुए शुक्रवार को कहा कि दुनियाभर में वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद टीकों को मंजूरी दी गयी है और हमें इन पर विश्वास करना चाहिए। हर्षवर्धन ने लोकसभा में प्रश्नकाल में कहा कि देश-दुनिया में बहुत सारे लोगों के मन में आशंका है कि कोरोना वायरस का टीका आने वाले समय में नुकसान तो नहीं पहुंचाएगा? उन्होंने कहा, ‘‘ भारत में जिन दो टीकों कोविशील्ड और कोवैक्सिन को इस्तेमाल की मंजूरी दी गयी है, वे सुरक्षा, प्रभावशीलता और प्रतिरक्षा क्षमता पैदा करने के मानदंडों पर पूरी तरह खरे उतरते हैं।’’ निचले सदन में कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू के पूरक प्रश्नों के उत्तर में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने कहा कि देशवासियों को कोविड टीकों को लेकर कोई भ्रम नहीं रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे वैज्ञानिक परीक्षणों और अध्ययनों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने टीकों की जो सुविधा उपलब्ध कराई है, उसका सभी को लाभ उठाना चाहिए और अपने निवास स्थान के पास के निजी या सरकारी अस्पताल में जाकर टीका लगवाकर सभी को सुरक्षित करना चाहिए। बिट्टू ने कोरोना टीकों से भविष्य में लोगों के डीएनए पर दुष्प्रभाव पड़ने संबंधी आशंकाओं पर पूरक प्रश्न पूछा था। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आज के समय में कई बीमारियों से होने वाली मौत को टीके लगाकर रोका जा सकता है।

टीकों की मदद से ही देश में चेचक और पोलियो जैसी बीमारियों को समाप्त किया गया है और केवल दो देशों में पोलियो थोड़ा बचा है और वह भी जड़ से समाप्त होने की ओर है। उन्होंने कहा कि कई स्तर पर अनेक लोगों पर वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद टीकों को समाज में इस्तेमाल की मंजूरी दी जाती है। हर्षवर्धन ने कहा कि क्लिनिकल ट्रायल के परिणामों के आधार पर विशेषज्ञ समितियां टीकों के इस्तेमाल की मंजूरी देती हैं। उन्होंने बताया कि टीकों का पूरी दुनिया में सात स्थानों पर स्वतंत्र तरीके से आकलन होता है जिनमें फरीदाबाद स्थित जैवप्रौद्योगिकी संस्थान भी है। हर्षवर्धन ने कहा कि देश में अब तक लगभग साढ़े तीन- चार करोड़ लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा चुका है और इसका महज.000432 प्रतिशत प्रतिकूल प्रभाव होने की खबरें हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद टीकों को मंजूरी दी जाती है तो हमें विश्वास करना चाहिए। हम देश के लोगों को कहना चाहते हैं कि टीकों को लेकर कोई भ्रम नहीं रखें। आज जो सुविधा सरकार ने उपलब्ध कराई है, उसका लाभ उठाते हुए पास के निजी या सरकारी अस्पताल में जाकर टीका लगवाकर सभी को सुरक्षित करिए।’’ देश में सभी को टीके लगाने के संबंध में सरकार की योजना के राकांपा सांसद सुप्रिया सुले के पूरक प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने कहा कि हर टीके को वैज्ञानिक आधार पर सार्वभौम टीकाकरण में शामिल करने की जरूरत नहीं होती। इसके अलावा आवश्यकता के आधार पर टीके लगवाने वाली श्रेणियों की प्राथमिकता तय करनी होती है।

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भाजपा सांसद ने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग की

लोकसभा में भाजपा के एक सांसद ने बढ़ती आबादी को देश के समक्ष गंभीर संकट बताते हुए केंद्र सरकार से जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग की। शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए भाजपा सांसद संजय सेठ ने कहा कि देश में बढ़ती आबादी बड़ा संकट बनती जा रही है, ऐसे में सरकार को देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दो बच्चों के मानदंड को लागू करना चाहिए। इसका उल्लंघन करने वालों को सरकारी सुविधाएं नहीं मिलें और चुनाव नहीं लड़ सकें..ऐसा प्रावधान किया जाना चाहिए। शून्यकाल के दौरान बीजद सांसद अनुभव मोहंती ने देश में बढ़ते तलाक के मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि इसके कारण बच्चों की देखभाल के दायित्व से जुड़े मामले बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले अदालत के एक फैसले में तलाक के मामलों में बच्चों की देखभाल का साझा दायित्व (शेयर्ड पैरेंटिंग) की बात कही गई, लेकिन इस पर अमल नहीं किया जा रहा है।

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पर्यटन पर चार मिनट का ‘ट्रेलर’ भी पूरा नहीं सकीं जया बच्चन

मशहूर फिल्म अभिनेत्री व समाजवादी पार्टी की सदस्य जया बच्चन शुक्रवार को राज्यसभा में एक चर्चा में हिस्सा लेने के लिए जब खड़ी हुई तो उन्होंने कहा कि वह आज ‘‘फीचर फिल्म’’ नहीं बल्कि ‘‘ट्रेलर’’ पेश करेंगी लेकिन समय की बाध्यता के चलते वह उसे भी पूरा नहीं कर सकीं। अलबत्ता, अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने अपनी बात पूरी करने से इंकार कर दिया। उच्च सदन में पर्यटन मंत्रालय के कामकाज पर हो रही चर्चा में हिस्सा लेते हुए बच्चन ने अपने दल को कम समय आवंटित होने का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘समय कम है...इसलिए मैं फीचर फिल्म नहीं ट्रेलर पेश करूंगी।’’ इसके बाद मुद्दे पर आते हुए उन्होंने कहा, ‘‘जो भी धार्मिक और प्राचीन पर्यटल स्थल हैं वह तो हमारे पूर्वज बनाकर गए हैं। हम उसी का फायदा उठाते हैं। हमने कौन सी नयी चीज की है। हम ये जानना चाहते हैं।’’ इसी बीच सत्ताधारी दल के एक सदस्य ने उन्हें टोका। 

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लोकसभा ने संविधान अनुसूचित जातियां आदेश संशोधन विधेयक 2021 को मंजूरी दी

लोकसभा ने शुक्रवार को संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश संशोधन विधेयक 2021 को मंजूरी दे दी जिसमें तमिलनाडु की सात जातियों को एक जाति देवेन्द्रकुला वेलालर में समाहित करने का प्रस्ताव किया गया है। विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों के अनुसार, तमिलनाडु राज्य सरकार ने सात जातियों देवेन्द्रकुलथन, कडड्यन (कुछ जिलों के तटीय क्षेत्रों को छोड़कर), कल्लादि, कुडुम्बन, पल्लन, पन्नाडी, वातिरैयान को देवेन्द्रकुला वेलालर समूह के तहत लाने का प्रस्ताव किया है। ये जातियां राज्य में अनुसूचित जाति के तहत आती हैं।उक्त परिवर्तनों को प्रभावी बनाने के लिये तमिलनाडु राज्य के संबंध में संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश को संशोधित करना आवश्यक है। लोकसभा में विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि इनमें से कडड्यन जाति को तिरूनेलवेली, तूतुकुडी , रामनाथपुरम, पुदुकोट्टई और तंजावूर जिलों के तटीय क्षेत्रों में इसी नाम से जाना जायेगा। 

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रेलवे का निजीकरण नहीं होगा, परिसंपत्तियों का मौद्रीकरण किया जाएगा : गोयल

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि रेलवे के आधारभूत ढांचे का निजीकरण नहीं किया जाएगा और उसकी योजना विकास को गति प्रदान करने के लिए संसाधान जुटाने की खातिर परिसंपत्तियों का मौद्रीकरण (मोनेटाइजेशन) करने की है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) के जरिए शुरू किए यात्री ट्रेन परिचालन से करीब 30,000 करोड़ रुपये के कुल निवेश का लक्ष्य रखा गया है। गोयल ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रेलवे ने अपनी परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण की योजना बनायी है जिसमें चालू होने के बाद पूर्वी और पश्चिमी माल ढुलाई गलियारा, पीपीपी के तहत स्टेशनों का पुनर्विकास, रेलवे कॉलोनी, हिल रेलवे और स्टेडियम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण से आधारभूत ढांचा के निर्माण के लिए अधिक संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि संपत्तियों के मौद्रीकरण का अर्थ उनका निजीकरण नहीं है बल्कि दोनों में अंतर है। उन्होंने कहा कि निजीकरण की स्थिति में संबंधित संपत्ति का स्वामित्व सरकार के पास नहीं रहता लेकिन मौद्रीकरण के बाद भी संपत्ति का स्वामित्व रेलवे के पास ही रहेगा। रेल मंत्री ने गुलबर्गा में रेलवे जोन स्थापित किए जाने की मांग पर कहा कि अध्ययन में इसे व्यवहार्य नहीं पाया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में व्यवहार्यता के अलावा आने वाले खर्च को भी ध्यान में रखा जाता है। इस पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा कि गुलबर्गा डिविजन बनाए जाने की घोषणा अध्ययन के बाद की गयी थी और इसके लिए जमीन भी दे दी गयी थी। गोयल ने निजी निवेश होने पर रोजगार के अवसर घटने संबंधी आशंकाओं को खारित करते हुए कहा कि निजी ट्रेनों में भी कर्मचारियों और विभिन्न सेवाएं मुहैया कराने वाले कर्मियों की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि रेलवे अपने नेटवर्क का अधिकतम उपयोग चाहता है।

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विकास वित्त संस्था की सस्थापना संबंधी विधेयक लोकसभा में अगले सप्ताह लाएगी सरकार

सरकार ‘अवसंरचना एवं विकास के वित्त-पोषण के लिए राष्ट्रीय बैंक (एनएबीएफआईडी) विधेयक-2021’ अगले सप्ताह लोकसभा में पेश करेगी। इसमें देश में बुनियादी ढांचा विकास की परियोजनाओं के विकास के लिए दीर्घकालिक कर्ज देने वाले वित्तीय संस्थान की कमी दूर होगी। संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोक सभा में अगले सप्ताह के कामकाज की सूची की जानकारी देते हुए शु्क्रवार को कहा कि सदन के एजेंडा में ‘अवसंरचना एवं विकास के वित्त-पोषण के लिए राष्ट्रीय बैंक (एनएबीएफआईडी) विधेयक-2021’को प्रस्तुत करना भी शामिल है। इस प्रकार के वित्तीय संस्थान की स्थापना की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट भाषण में की थी। मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह इस विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी। इस संस्थान द्वारानिवेशकों से धन जुटाने के संबंध में कर छूट प्रदान करने का प्रावधान भी प्रस्तावित है। सरकार ने इस विकास वित्त संस्था के लिए शुरूआत में 20,000 करोड़ रुपये पूंजी डालने का निर्णय लिया है। 

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विपक्ष ने सरकार पर लगाया पर्यटन की अनदेखी का आरोप, सत्ता पक्ष ने किया पर्यटक संख्या बढ़ने का दावा

पर्यटन क्षेत्र पर कोविड-19 महामारी का गहरा प्रभाव पड़ने का दावा करते हुए राज्यसभा में शुक्रवार को विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर इसे उबारने के प्रयास करने के बजाय निजीकरण और विनिवेश पर ध्यान देने का आरोप लगाया। वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने तथा कोविड-19 से उबरने के भारत के प्रयासों से देश में आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। उच्च सदन में पर्यटन मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा की शुरुआत करते हुए टीआरएस सदस्य के आर सुरेश रेड्डी ने कहा कि कोविड-19 महामारी का असर पर्यटन के क्षेत्र पर भी पड़ा, लेकिन इस विभाग को केंद्र सरकार से बजट के माध्यम से जितना सहयोग मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। उन्होंने कहा ‘‘पर्यटन का देश की जीडीपी में पांच फीसदी का योगदान रहता है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार यह क्षेत्र 12.9 प्रतिशत रोजगार यानी 8.8 करोड़ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार देता है। ऐसे क्षेत्र को नजरअंदाज किया जाना ठीक नहीं है।’’ सुरेश रेड्डी ने कहा कि पर्यटन मंत्रालय के लिए 2027 करोड़ रुपये बजट में आवंटित किए गए और जरूरत को देखते हुए यह आवंटन बहुत ही कम है। उन्होंने कहा ‘‘यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि यह मंत्रालय कई तरीकों से अन्य मंत्रालयों के साथ जुड़ा हुआ है और इसलिए राजस्व जुटाने में इन मंत्रालयों को पर्यटन मंत्रालय का भी योगदान रहता है। ’’ उन्होंने सरकार पर निजीकरण एवं विनिवेश पर ध्यान केंद्रित करने का आरोप लगाते हुए कहा ‘‘उसे अपार संभावनाओं वाले इस मंत्रालय की जरूरतें नजर नहीं आईं। जीएसटी जैसे सरकार के उठाए गए कई कदमों से, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग और व्यवसाय परेशान हो चुके हैं।’’ 

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भारत ने भुखमरी संबंधित आंकड़ों को लेकर वेल्टहंगरलाइफ के समक्ष अपनी चिंता रखी : केंद्र

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि सरकार ने देश में भुखमरी के स्तर की गणना के लिए आंकड़ों की उपयुक्ता व सटीकता के संबंध में संगठन वेल्टहंगरलाइफ के साथ अपनी चिंताओं को साझा किया है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि वर्ल्डवाइड और वेल्टहंगरलाइफ द्वारा प्रकाशित वैश्विक भूख सूचकांक (जीएचआई) रिपोर्ट 2020 के अनुसार भारत 27.2 स्कोर के साथ और 107 में से 94 वें स्थान पर है। जीएचआई रिपोर्ट 2019 के अनुसार भारत 30.3 स्कोर के साथ 117 में से 102 वें स्थान पर था। उन्होंने कहा कि यह देश में भूख को कम करने की दिशा में सुधार दिखाता है क्योंकि 2019 से 2020 के दौरान जीएचआई स्कोर 30.3 से घटकर 27.2 हो गया है। 

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वायु प्रदूषण से निपटने के लिये राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम बनाया गया: जावड़ेकर

वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रदूषण को गंभीर समस्या बताते हुए शुक्रवार को कहा कि वायु प्रदूषण की समस्या से व्यापक ढंग से निपटने के लिये एक दीर्घावधिक, समयबद्ध, राष्ट्र स्तरीय कार्यनीति के रूप में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीपीसी) तैयार किया गया है। लोकसभा में राजीव प्रताप रूडी के पूरक प्रश्न के उत्तर में जावड़ेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में पांच सालों में 100 शहरों की वायु गुणवत्ता में सुधार करने का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इसी सोच के अनुरूप राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम तैयार किया गया है। हर शहर में प्रदूषण का अपना कारण होता है और इसके तहत हर शहर में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिये योजना बनाई गई है और पैसा दिया जा रहा है। जावड़ेकर ने इस संबंध में विद्युत चालित वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने का भी जिक्र किया। दिल्ली में प्रदूषण की समस्या का जिक्र करते हुए जावड़ेकर ने कहा कि इस दिशा में केंद्र सरकार ने काम किया है, बदरपुर संयंत्र बंद किया गया है, पेरिफेरल एक्सप्रेस वे बनाने से हजारों ट्रकों की शहर में आवाजाही बंद हुई है और अन्य अनेक उपाय किये गये हैं। मंत्री ने कहा कि इन प्रयासों से दिल्ली में पिछले सालों की तुलना में प्रदूषण में कमी आई है। 

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