अपना दल में फिर से बगावत, केशव मौर्य को हराने वाली पल्लवी पटेल के पति ने पार्टी से दिया इस्तीफा

अपना दल में फिर से बगावत, केशव मौर्य को हराने वाली पल्लवी पटेल के पति ने पार्टी से दिया इस्तीफा
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पंकज पटेल अपना दल कमेरावादी के राष्ट्रीय महासचिव थे। इस्तीफे के पीछे की वजह साफ नहीं हो सकी है। लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल से मतभेदों की वजह से ही पंकज पटेल ने अपना इस्तीफा दिया है। मतभेद की वजह क्या है, अब भी यह खुलासा नहीं हो सका है।

अपना दल कमेरावादी के लिए एक बार फिर से मुश्किलें सामने आई है। दरअसल, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को सिराथू से हराने वाली पल्लवी पटेल के पति पंकज पटेल ने अपना दल से इस्तीफा दे दिया है। उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझने वाले लोगों के लिए यह बड़ी खबर है। पंकज पटेल अपना दल कमेरावादी के राष्ट्रीय महासचिव थे। इस्तीफे के पीछे की वजह साफ नहीं हो सकी है। लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल से मतभेदों की वजह से ही पंकज पटेल ने अपना इस्तीफा दिया है। मतभेद की वजह क्या है, अब भी यह खुलासा नहीं हो सका है।

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पल्लवी पटेल की जीत में पंकज पटेल की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। अपना दल कमेरावादी के लिए वह लगातार जमीन पर संघर्ष करते रहे हैं। पार्टी के कई बड़े निर्णयों में उनकी भूमिका रहती थी। समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में भी पंकज ने एक अहम भूमिका निभाई थी। सिराथू सीट पर पंकज ने जबरदस्त तरीके से प्रचार किया था। यही कारण है कि पल्लवी पटेल केशव मौर्य जैसे कद्दावर नेता को वहां हराने में कामयाब रही। पंकज पटेल निरंजन की शादी सोनेलाल पटेल की बेटी पल्लवी पटेल से हुई थी। पंकज पटेल संघ के बेहद करीबी रहे हैं। वे संघ के पूर्णकालिक सक्रिय सदस्य भी रह चुके हैं।

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हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब अपना दल परिवार में मतभेद की खबर आई है। इससे पहले भी सोने लाल पटेल की दो बेटियां अनुप्रिया पटेल और पल्लवी पटेल के बीच सियासत में वर्चस्व को लेकर तल्ख़ियां देखी गई थी। घर में मतभेद की वजह से ही अनुप्रिया पटेल अलग होकर अपना अलग पार्टी बना चुकी हैं। फिलहाल अनुप्रिया पटेल केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री हैं और उनकी पार्टी भाजपा की सहयोगी है। आपको बता दें कि सोनेलाल पटेल यूपी के बड़े नेताओं में से एक थे जिन्हें मायावती का बेहद करीबी माना जाता था। 2009 में सोने लाल के निधन के बाद कृष्णा पटेल ने पार्टी को संभाला। हालांकि 2016 में पार्टी दो भागों में बंट गई। 





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