इमरान की संगति के प्रभाव से इंटरनेशनल बेइज्जती में ट्रंप भी शामिल

By अभिनय आकाश | Publish Date: Jul 23 2019 12:43PM
इमरान की संगति के प्रभाव से इंटरनेशनल बेइज्जती में ट्रंप भी शामिल
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किसी भी देश का प्रधान उस देश की पहचान होता है। उसके शासन और वचन से यह तय होता है कि दुनिया में उस देश का कद और पहचान क्या है। लेकिन ट्रंप के इस दावे को पहले तो भारत के विदेश मंत्रालय ने खारिज किया। बाद में कई अमेरिकी सांसदों की तरफ से भी ट्रंप की आलोचना की गई।

भारत और पाकिस्तान का इतिहास एक है। ठीक 72 साल पहले दोनों मुल्क एक साथ आजाद हुए। दोनों देशों की परंपराएं एक जैसी हैं, लोग एक जैसे हैं लेकिन दोनों देशों में आज कितना बड़ा अंतर है। चांद की ओर कदम बढ़ाते भारत और रसातल की ओर जाते पाकिस्तान के झंडे में ही बस चांद का दीदार होता है। 22 जुलाई की आधी रात को दुनिया सो रही थी तो आतंक और कर्ज में डूबे पाकिस्तान के कप्तान इमरान खान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कश्मीर के मसले पर हस्तक्षेप की गुहार लगा रहे थे। इमरान ने अमेरिका से गिड़गिड़ाते हुए कश्मीर मसले पर मदद की मांग की। जिस पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने झूठ के पिटारे में से एक शिगूफा निकालते हुए कहा कि 'मैं प्रधानमंत्री मोदी से दो हफ्ते पहले मिला था और हमने इस मुद्दे पर बात की थी। उन्होंने कहा कि आप मध्यस्थता करेंगे, मैंने कहा किस पर तो उन्होंने कहा कि कश्मीर उन्होंने कहा बहुत सालों से ये विवाद चल रहा है। वो मुद्दों का हल चाहते हैं और आप भी इसका हल चाहते हैं। मैंने कहा कि मुझे इस मुद्दे में मध्यस्थता करके खुशी होगी। 

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किसी भी देश का प्रधान उस देश की पहचान होता है। उसके शासन और वचन से यह तय होता है कि दुनिया में उस देश का कद और पहचान क्या है। लेकिन ट्रंप के इस दावे को पहले तो भारत के विदेश मंत्रालय ने खारिज किया। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने दो टूक कहा कि हमने अमेरिका के राष्ट्रपति की टिप्पणी देखी कि यदि भारत और पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे पर अनुरोध करते हैं तो वह मध्यस्थता के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया है और कश्मीर पर तीसरी पार्टी को हस्तक्षेप नहीं करने दिया जाएगा। फिर क्या था ट्रंप के बयान से अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने भी पल्ला झाड़ लिया। विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय मुद्दा है। अमेरिका चाहता है कि दोनों देश एक मेज पर आकर इस मसले पर बात करें। बाद में कई अमेरिकी सांसदों की तरफ से भी ट्रंप की आलोचना की गई। 
लेकिन जब ट्रंप के बयान की अमेरिका में ही आलोचना हो रही थी उस वक्त देश की सबसे पुरानी पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बिना पड़ताल किए और अमेरिकी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के आने का इंतजार किए बिना ही मोदी सरकार पर हमला शुरू कर दिया। सुरजेवाला ने ट्वीट कर मोदी सरकार पर प्रहार करते हुए लिखा कि अब व्हाइट हाउस ने लिखित रूप से यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रम्प से कश्मीर पर मध्यस्थता के लिए कहा था।' उन्होंने सवाल किया, 'हमारे प्रधानमंत्री कब जागेंगे और अगर ट्रम्प झूठ बोल रहे हैं तो उसे बकवास बताएंगे? हालांकि ट्रंप के सफेद झूठ पर व्हाइट हाउस की सफाई के बाद भी लोकसभा में कांग्रेस सांसद के सुरेश ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। वहीं राज्यसभा में आनंद शर्मा ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जवाब की मांग की जिस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ कहा कि पाकिस्तान के साथ सभी लंबित मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय तरीके से ही किया जाएगा। 
अमेरिका के राष्ट्रपति के बयान ने जहां देश-दुनिया में भूचाल ला दिया वहीं उसके मायने को भी समझा जाना जरूरी है। अमेरिका से दूर होता पाकिस्तान चीन की गोद में जा बैठा है। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी लेते ही चीन का रौब कम करना उनकी प्राथमिकताओं की सूची में था। इसके लिए एशियाई विराट देशों में हिंदुस्तान ही उनका सहयोगी हो सकता था। लेकिन भारत की लोकतांत्रिक संस्कार कभी भी किसी अन्य राष्ट्र का पिट्ठू नहीं बनेगा। भारत एक सीमा तक ही अमेरिका के करीब जा सकता था। ऐसे में ट्रंप को पाकिस्तान ध्यान में आया। ट्रंप कश्मीर पर बयान देकर पाकिस्तान को फिर से अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं दुनिया का चौकीदार बनने की चाह में ट्रंप यह दिखाना चाह रहे हैं कि वो भारत के मामले में भी टांग अड़ा सकते हैं। इसके अलावा और गहनता से देखें तो अमेरिका के मिशन अफगानिस्तान में पाकिस्तान सहायता कर सकता है। 
बता दें कि अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध को ख़त्म करने में पाकिस्तान की मदद चाहता है, और देश में अपनी सैन्य मौजूदगी को वापस लेने की मांग कर रहा है। लेकिन ट्रंप और इमरान के बीच झूठ की आंच पर पक रही खिचड़ी पर पानी फिर गया। जिसके बाद अमेरिकी मीडिया द्वारा ट्रंप के झूठ के पिटारों की फेहरिस्त गिना दी ग। अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने इस पर विस्तृत रिपोर्ट जारी करते हुए ट्रंप के झूठ को आंकड़ों में उतार दिया। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद से अब तक 10 हजार 796 बार झूठ बोल चुके हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप ने औसतन रोजाना 12 बार झूठ बोला। 
वॉशिंगटन पोस्ट के फैक्ट चेकर्स डेटाबेस का कहना है कि अगर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप का कोई बयान संदिग्ध लगा, तो उसकी पड़ताल की गई। इसमें ट्रंप के ज्यादातर बयान झूठे पाए गए। ऐसे में रोजाना 12 झूठ बोलने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा इमरान की दोस्ती की चाह में प्रधानमंत्री मोदी को लेकर बोला गया झूठ भारत और अमेरिका संबंधों पर भी असर डाल सकता है। नरेंद्र मोदी यानि भारत की कूटनीति का वो सिक्का जिसका संसार की चौपालों पर डंका बज रहा है। कूटनीति से लेकर कानून तक में भारत के हाथों पटखनी मिलने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति से हमदर्दी की उम्मीद पर भी देश-दुनिया में किरकिरी ही हुई और इस बार इसमें पाकिस्तान ने अपने साथ-साथ अमेरिका के राष्ट्रपति को भी शामिल करा लिया। ऐसे में संगति का प्रभाव किस प्रकार से किसी इंसान पर कैसा प्रभाव डालता है इमरान खान और डोनाल्ड ट्रंप इसकी मिसाल बन गए हैं। 
 

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