अरुणाचल में भारत ने खोला नया पुल, चीन को हो सकती है परेशानी

अरुणाचल में भारत ने खोला नया पुल, चीन को हो सकती है परेशानी

आपको पता ही है कि दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर विवाद बहुत पुराना है। अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों पर चीन लगातार अपना दावा करता रहा है ऐसे में इस ब्रिज का खुलना उसे परेशान कर सकता है।

पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है। भारत भी इस संकट से लड़ने में अपनी तत्परता दिखा रहा है। फिलहाल शहर हो या गांव, हर तरफ महामारी के बावजूद भारत सरकार लोगों तक राहत पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। इस बीच, भारत में रणनीतिक के लिहाज से बड़ा फैसला लिया है। दरअसल भारत में चीन सीमा के करीब अरुणाचल प्रदेश के दापारिजो में एक नया ब्रिज खोलने का फैसला लिया है। इसका इस्तेमाल सेना भी कर सकती है। बताया जा रहा है कि इस ब्रिज की भाड़ क्षमता 40 टन के आसपास है। यह क्षेत्र चीन सीमा से सटा हुआ है। ऐसे में इस ब्रिज का खोलकर भारत ने चीन के खिलाफ रणनीतिक तौर पर एक बड़ी सफलता हासिल की है।

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इस पुल की खासियत यह है कि इसे मात्र 27 दिनों में पुनर्निर्माण किया गया है। पुनर्निर्माण के बाद इस पुल का उद्घाटन अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया। पुल बहुत पुराना है और कमजोर होने की वजह से गिर गया था जिसके चलते इस पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी। यह पुल दापारिजो और सुबानसिरी नदी के दूसरी ओर स्थित अन्य गांव के लिए संपर्क का एकमात्र जरिया है। यह सियांग बेल्ट को सुबानसिरी से जोड़ता है। आपको बता दें कि यह पुल भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी कि एलएसी को रणनीतिक तौर पर लिंक करता है। पहले यहां से राशन, निर्माण सामग्री और दवाओं की आपूर्ति की जाती थी। इस पुल में दरार हो जाने के कारण वर्ष 1992 में एक बड़ा हादसा हुआ, यात्रियों से भरी हुई बस गिर गई जिसमें कई लोग मारे गए। वर्तमान में बीआरओ ने कोरोनावायरस के बीच इस पुल के पुनर्निर्माण का कठिन और खतरनाक काम को करने का जिम्मा उठाया जिसे सफलतापूर्वक पूरा भी कर लिया गया।

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इस पुल को खोलने का भारत का यह कदम चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को नाराज कर सकता है। फिलहाल चीन इस मामले में चुप है। खबर लिखे जाने तक चीन ने इसे लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। आपको बता दें कि भारत और चीन के बीच लंबी सीमा है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच सीमा का निर्धारण नहीं है। ऐसे में कभी-कभी विवाद की स्थिति बन जाती है। दोनों देश अपने अपने दावे करते हैं लिहाजा कई बार स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है। हालांकि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से इस क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर का काम तेजी से किया गया। सरकार साफ तौर पर यह कहती है कि इस फैसले से यहां के लोगों के जीवन को आसान बनाना ही एकमात्र लक्ष्य है।

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भारत सरकार का यह मानना है कि इस ब्रिज के खोलने से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है लेकिन लोगों की सहूलियत की रक्षा करना सबसे बड़ा कर्तव्य होना चाहिए। क्षेत्र में कनेक्टिविटी बहुत जरूरी थी। यह ब्रिज सेना को मदद पहुंचाने के लिए बहुत ही कारगर साबित होगी। इसके अलावा इस पार से उस पार सामान की आवाजाही भी सुचारू रूप से हो सकेगी। तनाव की स्थिति में भारत इस ब्रिज का इस्तेमाल सैन्य उपकरणों के आवाजाही के लिए भी कर सकता है। हालांकि चीन भारत के ऐसे फैसले का लगातार विरोध करता रहा है लेकिन फिलहाल वह चुप है।





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