रूस की धरती पर चीन-पाकिस्तान की सेना के साथ बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भाग नहीं लेगा भारत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अगस्त 29, 2020   21:16
रूस की धरती पर चीन-पाकिस्तान की सेना के साथ बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भाग नहीं लेगा भारत

भारत ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए रूस में होने वाले बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास में भाग लेने से इंकार कर दिया है। भारत ने पिछले हफ्ते रूस को सूचित किया था कि वह 15 से 26 सितंबर के बीच दक्षिण रूस के अस्त्राखान इलाके में होने वाले रणनीतिक कमान-पोस्ट अभ्यास में शामिल होगा।

नयी दिल्ली। भारत ने अगले महीने रूस में होने वाले बहुपक्षीय युद्धाभ्यास से हटने का फैसला किया है। सरकारी सूत्रों ने शनिवार को बताया कि भारत ने युद्धाभ्यास में शामिल होने की पुष्टि करने के एक हफ्ते बाद इससे हटने का फैसला किया। इस युद्धाभ्यास में चीनी और पाकिस्तानी सैनिकों के भी शामिल होने की उम्मीद है। भारत ने पिछले हफ्ते रूस को सूचित किया था कि वह 15 से 26 सितंबर के बीच दक्षिण रूस के अस्त्राखान इलाके में होने वाले रणनीतिक कमान-पोस्ट अभ्यास में शामिल होगा। हालांकि, आधिकारिक रूप से भारत द्वारा पुराने फैसले को बदलने की वजह नहीं बताई गई है, लेकिन मामले की जानकारी रखने वालों ने बताया कि चीन का इस युद्धाभ्यास में शामिल होना भारत के शामिल नहीं होने की बड़ी वजह है। सूत्रों ने कहा, ‘‘युद्धाभ्यास में शामिल नहीं होने का फैसला लिया गया है।’’ 

इसे भी पढ़ें: BSF को सांबा में मिली सुरंग, पाकिस्तान में बने बोरियों से छुपाया गया था

समझा जाता है कि यह फैसला सैन्य और विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के बीच हुए विचार विमर्श के बाद लिया गया। उल्लेखनीय है कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगते कई इलाकों में गत साढ़े तीन महीने से भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध बना हुआ है। दोनों देश विवाद को सुलझाने के लिए सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत कर रहे हैं। चीन और पाकिस्तान सहित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के अन्य सभी सदस्यों सहित करीब 20 देशों के ‘कावकज’ नामक इस युद्धाभ्यास में हिस्सा लेने की संभावना है। भारत द्वारा सैन्य युद्धाभ्यास में शामिल होने के फैसले पर पुनर्विचार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की एससीओ की अहम बैठक में शामिल होने के लिए अगले हफ्ते होने वाली रूस यात्रा से पहले किया गया है। एससीओ रक्षामंत्रियों की बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा हालात और भू-रणनीतिक गतिविधियों पर चर्चा होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि पहले इस युद्धाभ्यास में भारतीय थलसेना के 150 जवानों, भारतीय वायुसेना के 45 जवानों और नौसेना के कुछ अधिकारियों को भेजने की भारत की योजना थी।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।