भारतीय सेना की वर्दी में होगा बदलाव ! चल रहा सैंपल रिव्यू, पहले भी तीन बार हो चुका है परिवर्तन

भारतीय सेना की वर्दी में होगा बदलाव !  चल रहा सैंपल रिव्यू, पहले भी तीन बार हो चुका है परिवर्तन

मिली जानकारी के मुताबिक, वर्दी में बदलाव का मकसद यह है कि उसे ज्यादा आरामदायक और स्मार्ट बनाने के साथ ही अफसरों की वर्दी में एकरूपता लाई जा सके।

नयी दिल्ली। भारतीय सेना की वर्दी में बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके लिए सैंपल का रिव्यू किया जा रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक वर्दी को ज्यादा आरामदायक और स्मार्ट बनाने के लिए इंडस्ट्री से कुछ सैंपल मंगाए गए थे जिनकी इन दिनों जांच हो रही है। बता दें कि पिछले साल वर्दी में बदलाव की प्रक्रिया उस वक्त शुरू हुई थी जब भारतीय सेना प्रमुख बिपिन रावत थे। 

इसे भी पढ़ें: पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच फिर हुई झड़प, भारतीय सेना ने घुसपैठ की कोशिश को किया नाकाम 

वर्दी में बदलाव का मकसद यह है कि उसे ज्यादा आरामदायक और स्मार्ट बनाने के साथ ही अफसरों की वर्दी में एकरूपता लाई जा सके। ताकी ऊंची पोस्ट वाले अफसरों की वर्दी को देखकर यह न पता चले कि वह किस रेजिमेंट के या फिर किस आर्म्स डिविजन के हैं। इसके अलावा पूरी सेना एक जैसी दिखाई दे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्दी में बदलाव के लिए इंडस्ट्री से सैंपल मांगे गए थे जो मिल चुके हैं और उनका रिव्यू किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक सेना की गर्मी-सर्दी की रेग्युलर वर्दी, समारोहों और मेस की वर्दी समेत जंगी भूमिका में इस्तेमाल की जाने वाली वर्दी को भी बदला जा सकता है। दरअसल, रिव्यू में वर्दी के कपड़े और डिजाइन के साथ-साथ उसका कंफर्ट लेवल भी चेक किया जा रहा है। 

इसे भी पढ़ें: आतंकी हमले में शहीद हुए सेना के जवान मनीष कारपेंटर, शिवराज बोले- MP को अपने वीर सपूत पर गर्व है 

जब पिछले साल नई वर्दी लाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी तो उस खबरें निकलकर आ रही थी कि वर्दी का कपड़ा अभी निर्धारित नहीं किया गया है क्योंकि कॉटन की देखभाल करना कठिन है और टेरीकॉट सैनिकों के लिए आरामदायक नहीं होगा क्योंकि गर्मियों में टेरीकॉट काफी ज्यादा गर्म हो जाता है। इसके अतिरिक्त गुणवत्ता और बनावट में सुधार किए जाने की भी बाते निकलकर आई थी।

तीन बार हो चुका है वर्दी में बदलाव

भारतीय सेना की वर्दी में पहले तीन बार बदलाव हो चुके हैं। पहली बार वर्दी में इसलिए बदलाव हुआ था ताकि भारत और पाकिस्तान की सेना में अंतर दिखाई दे। दूसरी बार वर्दी को साल 1980 में परिवर्तित किया गया उस वक्त इसे युद्धक पोशाक कहा गया। हालांकि, इसे फिर से बदल दिया गया क्योंकि पॉलिस्टर से बनी वर्दी गर्मी के मौसम में काफी असहज थी और तीसरी बार वर्दी को 2005 में बदला गया। ताकि सीमा सुरक्षा बल (BSF) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) से अलग दिखाई दे और अब चौथी बार वर्दी में परिवर्तन किए जाने की जानकारियां निकलकर सामने आ रही हैं।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।