सिर्फ फादर ऑफ नेशन पर विवाद क्यों? ''राष्ट्रपिता'' उपाधि भी संविधान सम्मत नहीं है

सिर्फ फादर ऑफ नेशन पर विवाद क्यों? ''राष्ट्रपिता'' उपाधि भी संविधान सम्मत नहीं है

इस विवाद में नया मोड़ तब आया जब PMO में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह कह दिया कि खुद को भारतीय नहीं मानने वाला ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘भारत का पिता’ कहे जाने पर गर्व महसूस नहीं करेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘भारत का पिता’ कहे जाने पर देश की राजनीति गर्म है। विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने तो यहां तक कह दिया कि कोई विदेशी नेता नहीं बता सकता कि भारतीय नागरिक किसे राष्ट्रपिता मानें क्योंकि सब जानते हैं कि यहां के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हैं। दरअसल, ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि मुझे याद है कि भारत पहले काफी अस्थिर था। वहां काफी मतभेद और अंदरुनी झगड़े थे। लेकिन मोदी ने सबको एकजुट किया, जैसे कोई पिता करता है। शायद वह फादर ऑफ इंडिया हैं। ट्रंप ने पीएम नरेंद्र मोदी के साथ अपनी केमिस्ट्री को लेकर कहा कि मैं उन्हें बहुत पसंद करता हूं। उन्होंने कहा कि मोदी रॉकस्टार एलविस प्रेस्ली की तरह हैं। 

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इस विवाद में नया मोड़ तब आया जब PMO में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह कह दिया कि खुद को भारतीय नहीं मानने वाला ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘भारत का पिता’ कहे जाने पर गर्व महसूस नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जो लोग विदेश में रहते हैं, उन्हें आज भारतीय होने पर गर्व हो रहा है। इसके बाद से विपक्ष सरकार पर और हमलावर हो गया और यह कहने लगा कि इस देश में एक ही राष्ट्रपिता हैं और वह ही रहेंगे और वह महात्मा गांधी हैं। विपक्ष का आरोप है कि किसी और को राष्ट्रपिता कहना गांधी जी का अपमान है। अब देश में गांधी को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। हमने भी यही जानने की कोशिश की कि इस मामले में हमारे देश का संविधान क्या कहता है?

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काफी माथा-पच्ची करने में बाद हम कुछ तथ्यों को पता लगाने में कामयाब हो पाए। 'फादर ऑफ इंडिया' को लेकर गृह मंत्रालय ने एक बयान में यह बताया है कि संविधान में ऐसा कोई भी प्रावधान शामिल नहीं है। दरअसल गृह मंत्रालय का यह बयान एक RTI के जवाब में आया है। बात साल 2012 की है, जब गृह मंत्रालय ने कहा कि संविधान सरकार को किसी को राष्ट्रपिता का दर्जा देने की सिफारिश करने की इजाजत नहीं देता। गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि संविधान सिर्फ शिक्षा और सैन्य बल से जुड़े व्यक्ति को ही उपाधि देने की अनुमति देता है। मंत्रालय ने इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 18 (1) का हवाला दिया था। यह बात उस समय की है जब केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी और सुशील कुमार शिंदे गृह मंत्री थे। ऐसे में संवैधानिक हिसाब से देखे तो यह सवाल जस का तस बना रह सकता है कि आखिर राष्ट्रपिता किसे कहा जाए।  

...तो महात्मा गांधी को किसने राष्ट्रपिता यानि कि 'फादर ऑफ इंडिया' कहा था

इतिहास को देखें तो महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता की उपाधि सबसे पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दी थी। बोस ने 6 जुलाई, 1944 को अंग्रेजों पर हमला करने से पहले सिंगापुर रेडियो पर अपने संबोधन में महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था। इसके बाद 28 अप्रैल, 1947 को एक सम्मेलन में गांधी को सरोजिनी नायडू ने इसी उपाधि से संबोधित किया। 30 जनवरी, 1948 को गांधी की हत्या होने के बाद देश को संबोधित करते हुए पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्र को कहा कि "राष्ट्रपिता अब नहीं रहे।" वहीं गुजरात उच्च न्यायालय के अनुसार रवींद्रनाथ टैगोर ने सबसे पहले मोहनदास करमचंद गांधी को 'महात्मा' की उपाधि दी थी। रवींद्रनाथ टैगोर ने भी अपनी आत्मकथा में इस बात का जिक्र करते हुए कहा है कि मार्च 1915 में उन्होंने गांधी जी को महात्मा की उपाधि दी थी। गांधी जी ने भी टैगोर को 'गुरुदेव' की उपाधि दी थी। 





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