महाराणा प्रताप की जयंती पर अकबर के चरित्र पर उठे सवाल में कितनी सच्चाई

By अभिनय आकाश | Publish Date: Jun 7 2019 6:23PM
महाराणा प्रताप की जयंती पर अकबर के चरित्र पर उठे सवाल में कितनी सच्चाई
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इतिहास को खंगालने पर इस बात के कई तथ्य मिलते हैं कि मुगलकाल में मीना बाजार लगता था। मुगल बादशाह हुमायूं ने इसकी शुरूआत की थी और इसे नए साल के जश्न के रूप में खुशी के दिन के नाम से जाना जाता था। मीना बाजार का आयोजन खासतौर से महिलाओं के लिए किया जाता था।

हल्दीघाटी का युद्ध मुगल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप के बीच 18 जून, 1576 ई को लड़ा गया था। कहा जाता है कि महाराणा प्रताप लगभग अकेले राजपूत शासक थे जिन्होंने अकबर के सामने समर्पण नहीं किया। वैसे तो यह युद्ध महाभारत युद्ध की तरह विनाशकारी सिद्ध हुआ था। ऐसा माना जाता है कि इस युद्ध में न तो अकबर की जीत हुई थी न महाराणा प्रताप की हार। लेकिन मेवाड़ के शेर महाराणा प्रताप की जयंती पर भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान प्रदेश के अध्यक्ष ने अकबर पर विवादित बयान देकर एक बार फिर से इस युद्ध की यादों को ताजा कर दिया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी ने कहा है कि अबकर मीना बाजार की आड़ में महिलाओं के साथ कुकर्म करते थे। जो व्यक्ति भारतीय संस्कृति के अनुरूप व्यवहार नहीं करता हो, वो व्यक्ति आज हो या कल हो या आने वाले कल में हो, उसे महान नहीं कहा जा सकता।

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सैनी ने कहा कि  अध्यक्ष ने कहा, “ये विवाद खड़ा नहीं होना चाहिए था। महाराणा प्रताप ने आक्रांताओं से संघर्ष करते हुए देश के स्वाभिमान और स्वत्रंता की रक्षा करने के लिए अपना पूरा समय लगाया। वो 25 वर्ष तक संघर्ष करते रहे। एक व्यक्ति जो आक्रांता है और दूसरा जो वहां का निवासी है व आजादी के लिए संघर्ष कर रहा है. दोनों महान नहीं हो सकते। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने अकबर के चरित्र पर भी निशाना साधते हुए कहा कि नौरोज के मेले के कारण उनका चरित्र संदेहास्पद लगता है। मेले में महिलाएं जाती थीं, ग्राहक और विक्रेता वहीं होती थीं। कहते हैं कि अकबर महिला के वेश में वहां जाता था और छेड़छाड़ करता था। ऐसा वर्णन कई जगह आता है।

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गौरतलब है कि इतिहास को खंगालने पर इस बात के कई तथ्य मिलते हैं कि मुगलकाल में मीना बाजार लगता था। मुगल बादशाह हुमायूं ने इसकी शुरूआत की थी और इसे नए साल के जश्न के रूप में खुशी के दिन के नाम से जाना जाता था। मीना बाजार का आयोजन खासतौर से महिलाओं के लिए किया जाता था। कई किताबों में उल्लेख है कि हुमायूं ने दिल्ली में मीना बाजार की शुरूआत की थी जिसमें कर्मचारियों की पत्नियां बाजार लगाती थीं और शाही परिवार के लोग खरीदारी करते थे। पांच से आठ दिन के लिए मुगल शाही परिवार के लोग ही यहां होते थे व यहां पर बाहर के लोगों का आना-जाना मना था। यहां केवल राजा, राजकुमार या राजमहल के कुछ खास लोगों को ही आने की इजाजत थी। लेकिन अकबर के शासनकाल में मीना बाजार को काफी प्रसिद्धि मिली। बताया जाता है कि अकबर के शासनकाल में मीना बाजार में काफी दूर-दूर से राजपरिवार के लोग आया करते थे। साथ ही वो जमकर खरीददारी करते थे। इससे होने वाली कमाई को गरीबों की सेवा में लगाया जाता था।

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लेकिन मीना बाजार को लेकर सोशल मीडिया पर तमाम तरह के दावे किए जाते रहे हैं लेकिन वास्तिकता में मदनलाल सैनी के बयान की प्रमाणिक पुष्टि से संबंधित कोई तथ्य नहीं मिलते हैं। वैसे अकबर पर बयान देने वाले भाजपा नेता पर नजर डालें तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक से जुड़े मदन लाल सैनी उदयपुरवाटी से विधायक रहे हैं। अनुशासन समिति के सदस्य व पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान के प्रदेश प्रभारी रहने वाले सैनी वर्तमान में राजस्थान भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष के पद पर हैं।

 

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