कर्नाटक सियासी संकट: नहीं हो सकी विश्‍वास मत पर वोटिंग, सोमवार तक के लिए सदन स्थगित

By अंकित सिंह | Publish Date: Jul 19 2019 8:46PM
कर्नाटक सियासी संकट: नहीं हो सकी विश्‍वास मत पर वोटिंग, सोमवार तक के लिए सदन स्थगित
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शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि विधान सभा की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले कांग्रेस-जद (एस) के 15 विधायकों को विधान सभा के चालू सत्र की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिये बाध्य नहीं किया जायेगा और उन्हें यह विकल्प दिया जाना चाहिए कि वे कार्यवाही में हिस्सा लेना चाहते हैं या बाहर रहना चाहते हैं।

बेंगलुरु/नयी दिल्ली। कर्नाटक में जारी सियासी नाटक अब संवैधानिक संकट में तब्दील हो गया है। विश्वासमत प्रस्ताव पर बिना मतविभाजन के कर्नाटक विधानसभा की बैठक सोमवार तक के लिए स्थगित हो गई है। शुक्रवार को कानूनी लड़ाई का रूप ले चुके इस ड्रामे ने प्रदेश के राजनीतिक संकट को और गहरा दिया है। विधानसभा में मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी को अपना बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल वजुभाई वाला द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। 

 


राज्यपाल ने कुमारस्वामी को अपना बहुमत साबित करने के लिए शुक्रवार को 1.30 बजे तक की समय सीमा निर्धारित की थी, लेकिन सदन में समयसीमा के भीतर विश्वासमत प्रस्ताव पर मत विभाजन नहीं हो सका, जिसके बाद राज्यपाल ने समयसीमा को फिर से निर्धारित कर इसे शाम के छह बजे कर दिया। विश्वासमत प्रस्ताव पर मत विभाजन पर शाम 6 बजे भी नहीं हो सका।


इस बीच भाजपा कर्नाटक के अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि सभापति महोदय हम आपका सम्मान करते हैं। गवर्नर के आखिरी पत्र में कहा गया था कि आज वोट खत्म होना चाहिए। हमारी तरफ के लोग देर रात तक शांति से बैठेंगे। हालाँकि इसे लगने में बहुत समय लगता है तो इसे होने दें और इसका मतलब यह भी होगा कि हम राज्यपाल के निर्देश का सम्मान कर सकते हैं। 
 
गौरतलब है कि करीब दो हफ्ते पहले सत्तारूढ़ गठबंधन के 15 बागी विधायकों के इस्तीफे से राज्य में राजनीतिक संकट पैदा हुआ था। विधायकों को लेकर उच्चतम न्यायालय ने 17 जुलाई को निर्देश दिया था कि इन विधायकों को विधान सभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिये बाध्य नहीं किया जाए। उच्चतम न्यायालय के उस फैसले पर स्पष्टीकरण की मांग करते हुये मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी और कांग्रेस की कर्नाटक इकाई ने सर्वोच्च अदालत का रुख किया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि न्यायालय का आदेश विधान सभा के चालू सत्र में अपने विधायकों को व्हिप जारी करने में बाधक बन रहा है।शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि विधान सभा की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले कांग्रेस-जद (एस) के 15 विधायकों को विधान सभा के चालू सत्र की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिये बाध्य नहीं किया जायेगा और उन्हें यह विकल्प दिया जाना चाहिए कि वे कार्यवाही में हिस्सा लेना चाहते हैं या बाहर रहना चाहते हैं। 
 

 
 

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