मेघालय में न्यायिक परीक्षाओं में खासी और गारो भाषाओं को अनिवार्य किया गया

Meghalaya
ANI
मेघालय के मंत्रिमंडल ने राज्य में न्यायिक सेवाओं की परीक्षा में खासी और गारो भाषाओं को अनिवार्य बनाने से संबंधित संशोधन को मंजूरी दे दी है। राज्य के कानून मंत्री जेम्स पी. के. संगमा ने बुधवार को यह जानकारी दी।

शिलांग। मेघालय के मंत्रिमंडल ने राज्य में न्यायिक सेवाओं की परीक्षा में खासी और गारो भाषाओं को अनिवार्य बनाने से संबंधित संशोधन को मंजूरी दे दी है। राज्य के कानून मंत्री जेम्स पी. के. संगमा ने बुधवार को यह जानकारी दी। संगमा ने कहा कि राज्य न्यायिक सेवा नियमों में संशोधन के तहत परीक्षार्थियों के लिए मेघालय की दो प्रमुख भाषाओं खासी या गारो में उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया गया है।

इसे भी पढ़ें: दिल्ली की अदालत ने सामूहिक बलात्कार मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज की

नौ मई को मेघालय उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ के समक्ष हुई सुनवाई के बाद न्यायिक सेवा नियम, 2006 और मेघालय उच्च न्यायिक सेवा नियम, 2015 में संशोधन के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसके बाद मंत्रिमंडल ने यह फैसला लिया है।

इसे भी पढ़ें: रक्षाबंधन से ठीक पहले तेजस्वी यादव के उपमुख्यमंत्री बनने से आठ बहनों का दिल हुआ खुश

कैबिनेट की बैठक के बाद संगमा ने कहा कि मंत्रिमंडल ने मंगलवार को मेघालय न्यायिक सेवा नियम, 2006 में संशोधन को मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा कि विषय को अनिवार्य कर दिया जाएगा और जब तक कोई परीक्षार्थी न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर लेता, तब तक अन्य पेपरों का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा।

Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


अन्य न्यूज़