1971 युद्ध के वीरता की गाथा: जानें नंगे हाथों से पाकिस्तानी बमों को डिफ्यूज करने वाले सूबेदार सेवा सिंह की कहानी

1971 युद्ध के वीरता की गाथा: जानें नंगे हाथों से पाकिस्तानी बमों को डिफ्यूज करने वाले सूबेदार सेवा सिंह की कहानी

आज आपको 1971 के युद्ध के दौरान देश के लिए जान की बाजी लगाने वाले ऐसे ही बहादुर योद्धा सूबेदार सेवा सिंह की कहानी से रूबरू करवाएंगे जिसने पाकिस्तान के 5 बमों को नंगे हाथों से ही डिफ्यूज कर दिया था। उनकी इस बहादुरी के लिए 1971 में तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया था।

1971 की वो जंग को भला कौन भूल सकता है खासकर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान। जब हिन्दुस्तान ने पूरी दुनिया का नक्शा ही बदल दिया था। हिन्दुस्तान ने महज 13 दिनों के भीतर अपने झूठे दंभ में जी रहे पाकिस्तानी सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था और 93 हजार सैनिक लाचार युद्ध बंदी बन गए। 1971 का युद्ध किस्सा है दुनिया के नक्शे बदलने का, जंग का और बहादुरी का भी। आज आपको 1971 के युद्ध के दौरान देश के लिए जान की बाजी लगाने वाले ऐसे ही बहादुर योद्धा सूबेदार सेवा सिंह की कहानी से रूबरू करवाएंगे जिसने पाकिस्तान के 5 बमों को नंगे हाथों से ही डिफ्यूज कर दिया था। उनकी इस बहादुरी के लिए 24 दिसंबर 1971 को तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। 

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दिसंबर 1971 में भारत पाक युद्ध के वक्त पंजाब के जीरा गांव (वर्तमान के फिरोजपुर जिले में) पर एक के बाद एक कई बम गिराए गए। लेकिन उनमें से पांच बम विस्फोट नहीं हुए। बम खराब थे या उसमें टाइमर लगा था इन बातों से सेवा सिंह बेखबर थे। लेकिन अपने जान की पररवाह किए बिना उन्होंने एक-एक कर अपने नंगे हाथों से बमों को डिफ्यूज कर दिया। मीडिया को दिए अपने साक्षात्कार में सेवा सिंह ने कहा कि 3 से 17 दिसंबर के बीच पाकिस्तानी सैनिकों ने पंजाब और जम्मू कश्मीर के कई इलाकों में बड़ी संख्या में बम गिराए थे। ऐसे में उन्हें इसे डिफ्यूज करने की जिम्मेदारी मिली थी। इन बमों को नंगे हाथों से डिफ्यूज किया जाना जानलेवा था। लेकिन अपनी जान की परवाह किए बिना सेवा सिंह ने इस काम को बखूबी अंजाम दिया। 

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खतरे के बारे में पूछे जाने पर सूबेदार ने कहा: “मुझे जीरा में बमों को निष्क्रिय करने और फिरोजपुर के पास एफसीआई गोदाम को बचाने का काम सौंपा गया था। ईश्वर की कृपा से मैं बिना किसी भय के अपना कार्य कर सका। मैंने अपने जीवन के बारे में बहुतों के जीवन के विरुद्ध कुछ भी नहीं सोचा। हमारे पास एक धन्य, कुशल और सफल टीम थी, और मैंने अकेले फिरोजपुर के उन पांच बमों को बिना किसी सुरक्षात्मक सूट के निष्क्रिय कर दिया। यह पूछे जाने पर कि इतने सारे पाकिस्तानी बम क्यों विफल हो गए, सूबेदार ने कहा: “हो सकता है कि पाकिस्तानियों ने पैनिक बॉम्बिंग का सहारा लिया हो। उन्हें छोड़ते समय उन्होंने टाइम फ़ैक्टर को नज़रअंदाज़ कर दिया। इसके अलावा, उन बमों में से कई द्वितीय विश्व युद्ध के पुराने पुराने फ़्यूज़ और विस्फोट उपकरणों के साथ थे।





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