झारखंड में टीकों की कमी, हेमंत सोरेन बोले- केवल तीन दिन का भंडार बचा

झारखंड में टीकों की कमी, हेमंत सोरेन बोले- केवल तीन दिन का भंडार बचा

उन्होंने कहा कि भारत सरकार इससे संबंधित निर्देश देने में बहुत देरी की और इसका प्रभाव हम सबके सामने है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें लॉकडाउन नहीं लगाने का सुझाव दिया गया था। लेकिन संक्रमण दर बढ़ने के बाद राज्यों ने अपने हिसाब से निर्णय लेने शुरू किए। आज कई प्रदेशों में लॉकडाउन है अथवा आंशिक लॉकडाउन है जिससे कि मामलों में कमी देखी जा रही है।

रांची। भले ही कोरोना वायरस के मामलों में स्थिरता देखी जा रही है। लेकिन वैक्सीनेशन को लेकर अब भी मारामारी है। कई राज्यों का आरोप है कि उन्हें उचित मात्रा में कोरोना वैक्सीन मुहैया नहीं कराया जा रहा है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी केंद्र सरकार पर इसको लेकर निशाना साधा है। हेमंत सोरेन ने साफ तौर पर कहा कि राज्य में कोरोना वैक्सीन की भारी किल्लत है और केवल 3 दिन का ही भंडार बचा हुआ है। इतना ही नहीं, केंद्र पर एक के बाद एक कई आरोप लगाते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि दूसरी लहर की जानकारी होने के बावजूद केंद्र राज्यों को सावधान करने और कदम उठाने में नाकाम रहा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार इससे संबंधित निर्देश देने में बहुत देरी की और इसका प्रभाव हम सबके सामने है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें लॉकडाउन नहीं लगाने का सुझाव दिया गया था। लेकिन संक्रमण दर बढ़ने के बाद राज्यों ने अपने हिसाब से निर्णय लेने शुरू किए। आज कई प्रदेशों में लॉकडाउन है अथवा आंशिक लॉकडाउन है जिससे कि मामलों में कमी देखी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में चार करोड़ खुराकों की जरूरत थी और उसे केवल 40 लाख खुराकें मिलीं, जिसकी वजह से इसकी किल्लत हो गई। हालांकि उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आयात के जरिये भी टीकों की खरीद की गंभीर कोशिशें कीं। सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार जल्द ही लॉकडाउन बढ़ाने के बारे में निर्णय लेगी क्योंकि राज्य के 24 में से 23 जिले ओडिशा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, या छत्तीसगढ़ के साथ सीमा साझा करते हैं, जो महामारी से बुरी तरह प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन रेलवे के जरिये लगभग 20 हजार लोग राज्य में आ रहे हैं और वायरस के प्रकोप को रोकने के लिये झारखंड सरकार ने ग्रामीण इलाकों में युद्धस्तर पर जांच करने का निर्णय लिया है। 

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सोरेन ने कहा, जहां तक मृत्युदर की बात है तो हमारे यहां देशभर में सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में मृत्यु के कम मामले सामने आ रहे हैं लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है, आप इसका आकलन कर सकते हैं। कई राज्य आंकड़ों से छेड़छाड़ कर रहे हैं लेकिन हमारी सरकार की प्राथमिकता पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना और वायरस की रोकथाम के लिये हर संभव कदम उठाना है। जब तक राज्य में मौत का एक भी मामला सामने आता रहेगा, हम इसे महामारी का चरम मानते रहेंगे।





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