बच्चों को कमान सौंप कर गए थे लालू, पर इन लोगों ने ही डुबा दी पार्टी की लुटिया

By अंकित सिंह | Publish Date: Jun 14 2019 4:30PM
बच्चों को कमान सौंप कर गए थे लालू, पर इन लोगों ने ही डुबा दी पार्टी की लुटिया
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लोकसभा चुनाव को देखते हुए उन्होंने पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवो के विकास के लिए अपना फंड दिया क्योंकि उन्हें वहां से चुनाव लड़ना था।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती आजकल सुर्खियों में हैं। फिर आपके मन में यह सवाल भी उठ रहा होगा के चुनाव परिणाम के आए हुए 20 दिन से ज्यादा हो गए फिर वह सुर्खियों में अब क्यों हैं। तो चलिए आपको अब हम इसकी वजह भी बताते हैं। हुआ यह है कि पाटलिपुत्र से चुनाव हारने के बाद मीसा भारती ने अपनी सांसद निधि से 15 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की मंजूरी वापस ले ली है। यह पैसे उन्हें राज्यसभा सदस्य होने के नाते मिलते हैं। साल 2016 में मीसा भारती बिहार से राज्य सभा की सांसद बनी थी और मीडिया रिपोर्ट की माने तो तब से उन्होंने अपना सांसद निधि खर्च नहीं की थी। 



लोकसभा चुनाव को देखते हुए उन्होंने पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवो के विकास के लिए अपना फंड दिया क्योंकि उन्हें वहां से चुनाव लड़ना था। मीसा भारती को इस बात की उम्मीद थी कि जनता उनके इस काम का ईनाम लोकसभा चुनाव में जिता कर देंगी। हुआ ठीक इसके उलट। उन्हें लोकसभा चुनाव में भाजपा नेता रामकृपाल यादव से करारी सिकश्त मिली। यह वही रामकृपाल यादव हैं जो कभी लालू के काफी करीबी रहे। खैर, मीसा भारती के इस फैसले के बाद अधिकारी भी पेशोपेश में हैं क्योंकि कई परियोजनाओं के लिए मंजूरी दी गई थी। ऐसे में उन्हें उन परियोजनाओं के लिए दूसरे फंड पर अलग से मेहनत करनी होगी या फिर परियोजनाओं को निरस्त करना पड़ेगा। मीसा के इस फैसले की काफी आलोचना हो रही है। राजद प्रवक्ता इस बारे में पूरी जानकारी नहीं होने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं तो जदयू और भाजपा मीसा पर हमलावर है। कांग्रेस इस बारे में कुछ भी कहने से बच रही है। 
उधर, लालू के छोटे बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी आजकल चुप्पी साथे हुए हैं। चुनावी हार के बाद वह पार्टी बैठकों में शामिल नहीं हो रहे हैं और राबड़ी देवी की सक्रियता बढ़ गई है। इतना ही नहीं, वह सार्वजनिक कार्यक्रमों से भी दूरी बना बैठे हैं। पिछले दिनों ऐसे दो मौके आए जब तेजस्वी को सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने था पर वह नहीं हुए। पहला यह है कि तेजस्‍वी दिल्‍ली में होने के बावजूद पार्टी के विधायक और लालू के नजदीकी भोला यादव की बेटी की शादी में शामिल नहीं हुए। हां, मीसा भारती इस शादी में जरूर मौजूद रहीं। दूसरा यह है कि पार्टी कार्यालय में लालू यादव के 72वें जन्‍मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में तेजस्‍वी नहीं पहुंचे। इसके पीछे का जो सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है वह यह है कि शायद पार्टी तेजस्वी को लेकर दो गुट में बंट गई है। कुछ नेता लोकसभा चुनाव में मिली हार के लिए तेजस्वी को जिम्मेदार मान रहे है। 


तेजस्वी यादव के साथी जो महागठबंन में शामिल हैं वह भी अब उनको नेता मानने ने इनकार कर रहे हैं। कुछ नेता तो उन्हें नौसिखिया तक बता चुके हैं। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि तेजस्वी पार्टी के कुछ नेताओं से खफा भी हैं और वह उनके खिलाफ एक्शन की बात कर रहे हैं। दूसरी तरफ देखें तो कुछ दिन पहले तक पार्टी में हाशिए पर चल रहे लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव आजकल ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। वह लालू के जन्‍मदिन पर कई कार्यक्रमों में शामिल हुए तो दूसरी ओर वह पार्टी कार्यालय भी लगातार पहुंच रहे हैं और जनता दरबार लगा रहे हैं। महागठबंन के नेता दोनों भाई के बीच आई कड़वाहट को भी हार की वजह मान रहे हैं। खैर, जो भी हो, पर यह बात सच है कि राजद को फिलहाल लालू यादव की कमी खल रही होगी। राजद के सामने परिवार की विरासत को संभालने के साथ-साथ जनता को भी अपने पाले में लाने की बड़ी चुनौती है जिससे लालू यादव ही निपट सकते हैं।  


 

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