वामदलों ने GST राजस्व की कमी पर ‘दैवीय घटना’ संबंधी बयान को लेकर सरकार पर साधा निशाना

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अगस्त 28, 2020   20:26
वामदलों ने GST राजस्व की कमी पर ‘दैवीय घटना’ संबंधी बयान को लेकर सरकार पर साधा निशाना

केंद्र के आकलन के अनुसार चालू वित्त वर्ष में क्षतिपूर्ति के रूप में राज्यों को तीन लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी। इसमें से 65,000 करोड़ रुपये की भरपाई जीएसटी के अंतर्गत लगाये गये उपकर से प्राप्त राशि से होगी।

नयी दिल्ली। वामदलों ने जीएसटी राजस्व की कमी के मामले को लेकर ‘दैवीय घटना’ वाले बयान पर शुक्रवार को सरकार पर निशाना साधा और राज्यों पर इसका बोझ डालने का आरोप लगाया। केंद्र के आकलन के अनुसार चालू वित्त वर्ष में क्षतिपूर्ति के रूप में राज्यों को तीन लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी। इसमें से 65,000 करोड़ रुपये की भरपाई जीएसटी के अंतर्गत लगाये गये उपकर से प्राप्त राशि से होगी। इसीलिए 2.35 लाख करोड़ रुपये का कुल घाटा रहने का अनुमान है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी परिषद की 41वीं बैठक के बाद पत्रकारों से कहा था कि अर्थव्यवस्था कोविड-19 महामारी से प्रभावित हुई है, जो कि एक दैवीय घटना है और इससे चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में संकुचन आएगा। सीतारमण के बयान पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, ‘‘यदि आवश्यक हो तो केन्द्र सरकार कर्ज लेकर राज्यों के बकाए का भुगतान करे। 

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राज्य सरकारें कर्ज क्यों लें? क्या इसे सहकारी संघवाद कहते हैं? भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने के बाद राज्यों को लूटा जा रहा है। दैवीय कारण बताकर?’’ उन्होंने कई ट्वीट में कहा, उद्योगपतियों से मिलीभगत, अक्षमता और असंवेदनशीलता की वजह से महामारी से काफी पहले ही लोगों की आजीविकाएं और जिंदगियां बर्बाद हो गई थीं। अब भगवान को कोसा जा रहा है।’’ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी राजा ने कहा कि जीएसटी क्षतिपूर्ति राज्य सरकारों का एक वैध अधिकार है जैसा कि केंद्र सरकार ने जीएसटी अधिनियम को लागू करते समय वादा किया था। उन्होंने कहा, ‘‘वित्त मंत्री का यह कहना कि महामारी ‘दैवीय घटना’ है और इसलिए, मुआवजे का भुगतान करने के लिए केंद्र सरकार उत्तरदायी नहीं है, यह गलत और अनैतिक है।’’ राजा ने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब राज्य सरकारों पर पहले से ही अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण बोझ हैं और महामारी से निपटने की जिम्मेदारियों के कारण अतिरिक्त खर्च के बीच राज्य सरकारों को बाजार से उधार लेने के लिए कहना राज्य के वित्त पर अतिरिक्त वित्तीय देनदारियों को बढ़ा रहा है।





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