लोकसभा एक दो दिन में सुचारू रूप से चलने लगेगी: सुमित्रा

नोटबंदी के मुद्दे पर संसद में जारी गतिरोध के बीच लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आज उम्मीद व्यक्त की कि सदन एक-दो दिन में सुचारू रूप से काम करने लगेगा।

नोटबंदी के मुद्दे पर संसद में जारी गतिरोध के बीच लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आज उम्मीद व्यक्त की कि सदन एक-दो दिन में सुचारू रूप से काम करने लगेगा क्योंकि सरकार के साथ विपक्षी दल भी चाहते हैं कि चर्चा हो। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मैं प्रयास कर रही हूं। मैं बार बार आग्रह कर रही हूं। मुझे उम्मीद है कि संसद में कामकाज होगा। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों चर्चा करने को तैयार हैं, दोनों चाहते हैं कि चर्चा हो। अब किस नियम के तहत चर्चा हो, इस बारे में बात होनी है। मैं समझती हूं कि अगले एक या दो दिन में कामकाज शुरू हो जायेगा।’’

नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्ष के शोर-शराबे के कारण आज लोकसभा की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गयी। राज्यसभा की बैठक तीन बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी। सुमित्रा महाजन ने कहा, ‘‘इसलिए मैं प्रयास कर रही हूं। जो भी सांसद बोलना चाहते हैं, उनके अधिकारों को नहीं छीना जाना चाहिए। इसलिए आपने देखा होगा कि मैंने प्रश्नकाल चलाने का प्रयास किया। मैं नहीं चाहती कि सदन में इतना शोर-शराबा हो और मैं इस दिशा में प्रयास कर रही हूं।’’ लोकसभा अध्यक्ष ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘आज भी मैंने प्रयास किया क्योंकि कुछ लोगों ने आग्रह किया था कि वे शून्यकाल में कुछ महत्वपूर्ण विषयों को उठाना चाहते हैं।’’

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मैंने पिछले दिनों में भी प्रयास किया। जो भी सांसद सदन में आते हैं, उनके अधिकारों को नहीं छीना जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि सरकार और विपक्ष तक पहुंचना सतत प्रक्रिया है। दोनों चर्चा करना चाहते हैं। सभी लोगों को साथ लाने की पहल करने के सवाल पर सुमित्रा महाजन ने कहा, ‘‘मैं निश्चित तौर पर ऐसा करूंगी। इस दिशा में प्रयास जारी हैं। यह सतत प्रक्रिया है। मुझे विश्वास है कि एक समय सभी लोग कुछ बातों को मान लेंगे।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या जिन कार्यस्थगन प्रस्तावों को उन्होंने नामंजूर किया है, उन पर फिर से विचार करेंगी, लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘देखते हैं। हम चाहते हैं कि सदन चले। इस दिशा में देखते हैं कि क्या होता है। मुझे दोनों (सरकार और विपक्ष) से बात करनी है। दोनों चर्चा करने के लिए तैयार हैं। अब किस नियम के तहत चर्चा होगी, यह तय करना है। कोई एक व्यक्ति निर्णय नहीं कर सकता।’’

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