मधुबनी सीट: विकास पर भारी पड़ रहे नेताओं के सांप्रदायिक बयान

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Apr 30 2019 2:33PM
मधुबनी सीट: विकास पर भारी पड़ रहे नेताओं के सांप्रदायिक बयान
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शकील अहमद इस सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन महागठबंधन में यह सीट वीआईपी पार्टी के खाते में चली गई। महागठबंधन के उम्मीदवार का हवाला देते हुए शकील अहमद ने कहा कि प्रत्याशी कमजोर है और वह राजग के अशोक कुमार यादव को रोक नहीं पाएगा। इसलिए मधुबनी के लोगों ने उनसे यहां से चुनाव लड़ने का आग्रह किया।

मधुबनी। ‘‘हिन्दू..मुस्लिम करने से विकास कार्य दब जाते हैं और जब काम किया है तो डरना क्या?’’ यह टिप्पणी भवानीनगर के 80 वर्षीय बुजुर्ग सलामत हुसैन और अहमदा गांव के युवा अमित कुमार राम की ही नहीं बल्कि केवटी, विस्फी से लेकर मधुबनी के एक बड़े वर्ग की है। इनका कहना है कि सड़क, बिजली और शिक्षा सुधार के क्षेत्र में बहुत काम हुआ है और ऐसे में नेताओं को हिन्दू मुस्लिम संबंधी बयानों से बचना चाहिए। मधुबनी का भवानीपुर क्षेत्र कवि कोकिल विद्यापति की कर्मस्थली और उगना महादेव मंदिर के लिये विख्यात है। भवानीपुर के 80 वर्षीय बुजुर्ग सलामत हुसैन और मोहम्मद चांद कहते हैं, ‘‘काम तो हुआ है। स्कूल में अच्छी पढ़ाई हो रही है, उगना रेलवे हाल्ट बन गया है, सड़क भी अच्छी है। अब तो पीने के पानी का टैंक भी बन गया है। लेकिन नेता लोग ‘हिन्दू मुस्लिम’ करके सब खराब कर रहे हैं। जब काम किया है तो किस बात का डर। काम के आधार पर वोट मांगिये, हिन्दू मुस्लिम नहीं करिये। ’’

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अहमदा गांव के अमित कुमार राम कहते हैं ‘‘हमारे क्षेत्र में बहुत काम हुआ है। लेकिन हिन्दू मुस्लिम करने से काम दब जाता है।’’ मधुबनी में ग्रामीण इलाकों में मुसलमानों का एक बड़ा तबका चाहता है कि राम मंदिर मुद्दे का जल्द समाधान निकाला जाना चाहिए। अहमदा गांव के अली हसन कहते हैं ‘‘अगर समाधान अदालत से ही हो तो भी इसका रास्ता निकलना चाहिए।’’ चुनाव में मधुबनी लोकसभा सीट पर राजग की ओर से वर्तमान सांसद हुकुमदेव नारायण यादव के पुत्र अशोक यादव भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। महागठबंधन ने यह सीट वीआईपी पार्टी को आवंटित की है। यहां के वीआईपीउम्मीदवार बद्री पूर्वे हैं। इस सीट पर कांग्रेस के टिकट पर दो बार सांसद रहे शकील अहमद मुकाबले को दिलचस्प बना रहे हैं जो इस बार निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

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शकील अहमद इस सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन महागठबंधन में यह सीट वीआईपी पार्टी के खाते में चली गई। महागठबंधन के उम्मीदवार का हवाला देते हुए शकील अहमद ने कहा कि प्रत्याशी कमजोर है और वह राजग के अशोक कुमार यादव को रोक नहीं पाएगा। इसलिए मधुबनी के लोगों ने उनसे यहां से चुनाव लड़ने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि सुपौल में जो राजद ने किया, उसी तरह कांग्रेस को भी यहां से अपने प्रत्याशी को समर्थन देना चाहिए। राजद नेता अली अशरफ़ फ़ातमी ने भी इस सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जतायी, पर पार्टी ने संज्ञान नहीं लिया। इस सीट पर फातमी बागी तेवर अपनाये हुए हैं। चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि महागठबंधन की दो प्रमुख पार्टियों कांग्रेस और राजद के इन दो कद्दावर नेताओं के बागी तेवर से भाजपा उम्मीदवार को फायदा होने की उम्मीद है। 

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मधुबनी सीट पर सवर्ण मतदाताओं के लिये ‘मोदी फैक्टर’ अहम है। विस्फी के ललित कुमार झा कहते हैं ‘‘प्रत्याशी हमारे लिये कोई मायने नहीं रखता, हम तो मोदी के नाम पर वोट देंगे।’’जितवारपुर के श्रवण कुमार भी प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर ही वोट देने की बात करते हैं। इस सीट पर यादव और मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है और चुनाव परिणाम पर ब्राह्मण एवं अति पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं का गहरा असर रहता है। मधुबनी बिहार के दरभंगा प्रमंडल का एक प्रमुख शहर एवं जिला है। दरभंगा और मधुबनी को मिथिला संस्कृति का केंद्र माना जाता है। मैथिली तथा हिंदी यहां की प्रमुख भाषाएं हैं। विश्व प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग एवं मखाना की पैदावार की वजह से मधुबनी की एक अलग पहचान है।

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