पैंगोंग त्सो में चीन के दूसरे पुल के निर्माण पर सामने आई MEA की प्रतिक्रिया, अरिंदम बागची बोले- चल रही है बातचीत

Arindam Bagchi
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि पुल के बारे में रिपोर्ट देखी हैं, ये सैन्य मुद्दा है, इसपर मैं कुछ कह नहीं पाऊंगा, इसे हम अधिकृत क्षेत्र मानते हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के बारे में हमारी लगातार वार्ता होती रहती है।

नयी दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को होने वाली साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क्वाड सम्मेलन में शामिल होने से लेकर पैंगोंग झील पर चीनी निर्माण से जुड़े मुद्दे पर अपना बयान जारी किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमने इस पुल या दूसरे पुल पर रिपोर्ट देखी है... हम स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। दरअसल, पूर्वी लद्दाख की विवादित पैंगोंग झील पर चीन की पीएलए दूसरे पुल का निर्माण कर रही है। इससे जुड़ी हुई रिपोर्ट्स सामने आई हैं। 

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समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि पुल के बारे में रिपोर्ट देखी हैं, ये सैन्य मुद्दा है, इसपर मैं कुछ कह नहीं पाऊंगा, इसे हम अधिकृत क्षेत्र मानते हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के बारे में हमारी लगातार वार्ता होती रहती है। चीन के विदेश मंत्री भी आए थे, हमारी अपेक्षाएं भी उनके आगे रखी गई। कोशिश रहेगी कि इसे आगे बढ़ाते रहें, बातचीत से समाधान निकालना पड़ेगा।

क्वाड सम्मेलन में शामिल होंगे PM मोदी

अरिंदम बागची ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 मई को टोक्यो में होने वाले क्वाड सम्मेलन में सम्मिलित होंगे। यह क्वाड लीडर्स के बीच चौथा पारस्परिक संवाद होगा...ये हिन्द प्रशांत क्षेत्र और परस्पर हित के दूसरे विश्व मुद्दों पर विचार साझा करने का अच्छा अवसर होगा। उन्होंने कहा कि हम क्वाड को बहुत महत्व देते हैं। हम यह दिखाने के लिए उत्सुक हैं कि क्वाड एक साथ क्या कर सकता है और इसका क्या अर्थ है। 

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उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी जापानी बिजनेस लीडर्स के साथ एक बिजनेस इवेंट में हिस्सा लेंगे। वह जापान में भारतीय समुदाय के लोगों को भी संबोधित करेंगे और उनके साथ बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी की ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक की भी संभावना है। 

अफगानिस्तान भेजी जा रही हैं मानवीय सहायता

उन्होंने कहा कि पिछले साल काबुल में सुरक्षा स्थिति के चलते सभी भारतीय कर्मियों को अफगानिस्तान से बाहर निकालना पड़ा। अफगानिस्तान के साथ हमारे एतिहासिक संबंध हैं। जिसे देखते हुए हमने मानवीय सहायता जारी रखी। गेहूं भेजा जा रहा है। दवाइयां भेजी हैं, वैक्सीन भी भेजी थी।

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