मीडिया को सकारात्मक बातों को समाज के सामने लाना चाहिए: आंबेकर

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उन्होंने कहा, ‘‘एक पत्रकार भी एक सामाजिक कार्यकर्ता होता है, ऐसे में उसके पेशे में देशहित व समाज हित भी होना चाहिए।’’ आंबेकर विश्व संवाद केन्द्र की ओर से आयोजित नारद जयंती कार्यक्रम व प्रदेश स्तरीय पत्रकार सम्मान समारोह को संबोंधित कर रहे थे।

जयपु| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने सोमवार को कहा कि मीडिया को ‘‘सनसनी के लिए झूठ फैलाने’’ की बजाय सकारात्मक बातों को समाज के सामने लाना चाहिए। आंबेकर ने कहा कि आज देश में बहुत अच्छे और सकारात्मक काम भी हो रहे हैं, उन्हें बढ़ावा मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘एक पत्रकार भी एक सामाजिक कार्यकर्ता होता है, ऐसे में उसके पेशे में देशहित व समाज हित भी होना चाहिए।’’ आंबेकर विश्व संवाद केन्द्र की ओर से आयोजित नारद जयंती कार्यक्रम व प्रदेश स्तरीय पत्रकार सम्मान समारोह को संबोंधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि समाज में विवाद पैदा करने वाले विषयों के बचना चाहिए, लेकिन तुष्टिकरण के मुद्दे जो पर्दे के पीछे दबाए जाते हैं उनके बारे में भी समाज को सच्चाई पता चलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज को दिशा देने में मीडिया की सकारात्मक भूमिका होनी चाहिए।

आंबेकर ने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन के दौर में पत्रकारिता बहुत प्रतिष्ठित थी क्योंकि उस दौर के सभी क्रांतिकारी कहीं न कहीं लेखन करते थे और संसाधनों की कमी के बावजूद व्यापक प्रचार- प्रसार भी करते थे। उन्होंने कि हालांकि उस वक्त मीडिया को कुचला गया, ऐसे में उस समय की पत्रकारों को आज याद करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि नारदजी के आदर्श को भी सामने रखना जरूरी है, क्योंकि उनका मंतव्य था कि समाचारों में जानकारी सही होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ‘‘आज लोगों तक सत्य पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो गया है जबकि पूर्ण सत्य को जाने बिना समाचार आगे नहीं बढ़ना चाहिए।’’ वरिष्ठतम पत्रकार प्रवीणचंद्र छाबड़ा ने कहा देश में 1945 से 51 तक संक्रमण काल रहा, उसे भुलाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन में वीर सावरकर, जवाहर लाल नेहरू, महात्मा गांधी व सुभाषचंद्र बोस का अविस्मरणीय योगदान था, लेकिन आज प्रगतिशील लोग उनके लिए कुछ भी लिख व बोल देते हैं, जबकि हमें उनके योगदान को पढ़ना चाहिए।

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