जहरीली हुई हवा में अब तक नहीं आया सुधार, ऐसे ही प्रदूषित रही हवा तो क्या होगा सेहत का

जहरीली हुई हवा में अब तक नहीं आया सुधार, ऐसे ही प्रदूषित रही हवा तो क्या होगा सेहत का

मेरठ की हवा में विषाक्त कणों पीएम 2.5 एवं पीएम 10 के साथ ही खतरनाक गैसों का गुबार बन रहा है, जो न सिर्फ फेफड़ों बल्कि हार्ट को भी डैमेज कर रहा। चिकित्सकों ने बताया कि एंडोथीलियम डिस्फंक्शन से हार्ट अटैक एवं हार्ट फेल्योर का खतरा बढ़ा है। बता दें कि एनसीआर-मेरठ में सप्ताहभर से पीएम 2.5 का स्तर मानक से पांच से छह गुना बना हुआ है। बढ़ता प्रदूषण सेहत के लिए घातक ही साबित हो रहा है।

मेरठ,रविवार को एक बार फिर शहर की हवा में सुबह से शाम तक काफी उतार-चढ़ाव हुआ। शाम छह बजे के बाद प्रदूषण का लेवल बिगड़ गया। रात 10 बजे एक्यूआई 361 रिकॉर्ड हुआ, शहर में जयभीमनगर, मेडिकल क्षेत्र का एक्यूआई 400 के करीब पहुंच गया। मेरठ की हवा में विषाक्त कणों पीएम 2.5 एवं पीएम 10 के साथ ही खतरनाक गैसों का गुबार बन रहा है, बढ़ता प्रदूषण सेहत के लिए घातक ही साबित हो रहा है, जो न सिर्फ फेफड़ों बल्कि हार्ट को भी डैमेज कर रहा। चिकित्सकों ने बताया कि एंडोथीलियम डिस्फंक्शन से हार्ट अटैक एवं हार्ट फेल्योर का खतरा बढ़ा है। 

वही सेहत के दुश्मन हवा में जहर घोलने से बाज नहीं आ रहे हैं। शहर में एक ओर फैक्टरियों का जहरीला धुआं भी सेहत पर वार कर रहा है, वहीं रोक के बावजूद कूड़ा जलाकर ग्रैप की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। दिल्ली में हेल्थ इमरजेंसी के हालात हैं। एनसीआर की हवा प्रदूषित हो गई है। मेरठ में भी पिछले 10 दिनों से हवा का हाल बुरा है, जहा अधिकारी मौन है वही नगर निगम की ओर से भी सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। शहर का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 400 से गिरकर 361 पर जरूर पहुंच गया है, लेकिन खतरा अभी कम नहीं हुआ।

लगता है की सीपीसीबी के आदेश से 22 अक्तूबर से लागू ग्रेप का आदेश मेरठ में हवा-हवाई है। यहाँ खुले में कूड़ा भी जल रहा है। धड़ल्ले से निर्माण कार्य भी हो रहे हैं। खतरनाक श्रेणी में पहुंची मेरठ की हवा से राहत के आसार नहीं है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर-पश्चिमी हवा चल जाएं और प्रदूषक उसके साथ बहते चले जाएं। यदि बारिश हो जाए और सारा प्रदूषण बैठ जाएं और तापमान में अधिक बढ़ोतरी हो ताकि हवा गर्म होकर ऊपर उठे और प्रदूषण भी पृथ्वी की सतह से ऊपर चले जाएं। हालांकि फिलहाल इन तीनों उपायों की संभावना नहीं है। वैसे भी नवंबर सर्दी का महीना है। बस एक ही उपाय है कि शासन, प्रशासन ग्रेप के आदेश को सख्ती से लागू करे।

मेडिकल कालेज के फिजिशियन डा. टीवीएस आर्य ने बताया कि प्रदूषित वायु में पार्टीकुलेट मैटर के साथ सल्फर, मोनोआक्साइड व नाइट्रोजन जैसी खतरनाक गैसें मिली होती हैं। सांस के साथ लंग्स में पहुंचने पर पीएम 2.5 झिल्लियों को पार कर रक्त में मिल जाता है, जो हार्ट एवं रक्त वाहिनियों की सुरक्षा कवच का काम करने वाली एंडोथीलियल सेल को नुकसान पहुंचाता है। रक्तवाहिनियों में सिकुडऩ आने के साथ ही कम पंपिंग क्षमता वाले मरीजों में हार्ट फेल होने का भी खतरा है। प्रदूषण की वजह से सांस में एलर्जी, अस्थमा, सीओपीडी होने एवं रक्तचाप बढऩे से भी हार्ट पर लोड बढ़ता है। सर्दियों में अटैक के मामले बढ़ जाएंगे।

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजुम का कहना है कि बच्चों की प्रतिरोधी क्षमता कमजोर होती है, इस कारण उनके लिए सर्दी-जुकाम, बुखार के अलावा निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। घर की खिडकी-दरवाजे बंद रखें। घर से बाहर निकलते समय मुंह, नाक और कान पर कपड़ा बांधें या मास्क लगाएं,मरीज, बच्चे और बुजुर्ग घर में ही रहें। पुराने दमा के रोगियों की परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। सफाई का ध्यान रखें, ठंड के कारण सफाई में लापरवाही न बरतें। बच्चे मॉस्क लगाकर ही स्कूल जाएं।  





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