जब अपने भी शवों को छोड़ जाते है तब वर्षा वर्मा करती हैं दाह संस्कार!

जब अपने भी शवों को छोड़ जाते है तब वर्षा वर्मा करती हैं दाह संस्कार!

'एक कोशिश ऐसी भी' के नाम से NGO चला रही वर्षा वर्मा उत्तर प्रदेश के लखनऊ की रहने वाली है। वह न केवल शवों का दाह संस्कार करती है बल्कि उन्होंने शव को ले जाने के लिए निशुल्क वाहन भी चलाने का जिम्मा अपने कंधों पर उठा रखा है।

एक बार फिर देश में कोरोना महामारी ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। देश में चारों तरफ अव्यवस्था से दिक्कतें बढ़ती जा रही है। एक जगह जहां हमारे कोरोना योद्धा असली हीरो बनकर लोगों की जान बचा रहे है वहीं कुछ ऐसे भी है जिन्होंने इंसानियत शब्द की परिभाषा को समझा हुआ है और खुलकर मदद को आगे भी आ रहे है। इस समय वर्षा वर्मा सोशल मीडिया से लेकर हर खबरों में बनी हुई है। जी हां, वर्षा वर्मा इस वक्त काफी लोगों के लिए खास बनी हुई है। कारण जब आप सुनेंगें तो वाह-वाही करते थकेंगे नहीं। आपको बता दें कि जब लोग कोरोना के डर से अपनों की लाशों को अस्पताल में ही छोड़ जाते है तब वर्षा ही एक ऐसी शख्स है जो मदद को आगे आती है और लावारिस लाशों का दाह संस्कार करती हैं। 'एक कोशिश ऐसी भी' के नाम से NGO चला रही वर्षा वर्मा  उत्तर प्रदेश के लखनऊ की रहने वाली है। वह न केवल शवों का दाह संस्कार करती है बल्कि उन्होंने शव को ले जाने के लिए निशुल्क वाहन भी चलाने का जिम्मा अपने कंधों पर उठा रखा है।

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एक खबर के मुताबिक, वर्षा ने एक किराये का वैन लिया हुआ है जिसको वो शवों को उठाकर शमशान तक ले जाती है। लोगों को इसकी जानकारी मिले इसके लिए उन्होंने वाहन में बड़ा-बड़ा निशुल्क शव वाहन लिखवाया है और साथ ही संपर्क नंबर भी लिखा है। वर्षा का काम तब शुरू हुआ जब वह लखनऊ के आरएमएल अस्पताल परिसर पर अपने वाहन के साथ खड़ी हो गई और तुरंत ही उनके पास कई लोगों की कॉल आने लग गई जिसके बाद शवों को शमशान पर ले जाने का जिम्मा शुरू हो गया। कई बार ऐसा भी होता है जब वर्षा के पास पीपीई किट नहीं होती है उसके बावजूद वर्षा शवों का दाह संस्कार करती है। रोज वाहन में ईंधन डालना वर्षा के लिए मंहगा हो जाता है जिसके कारण वह पीपीई किट नहीं खरीद पाती है। 

जब रिश्तेदारों ने बनाई दूरी तब वर्षा आई मदद को

वर्षा ने बताया कि एक कोरोना मरीज की मौत हो जाती है तो शव के पास केवल उनका अपना होता है बाकि सभी रिश्तेदार दूर खड़े होकर तामशा देखते रहते है। उन्होंने अपने अनुभव से बताया कि कैसे एक 90 किलो के वजन के शव को अकेले पैक करके शमशान लेकर आई जब्कि वहां उस मरीज के कई रिश्तेदार खड़े थे। बिना किसी सरकारी सहयोग के वर्षा वर्मा सब अकेले ही संभाल रही है, अगर आप भी उनकी इस मदद में साथ देना चाहते है तो उनसे जुड़िये। वर्षा के पास ईंधन, पीपीई किट जैसी व्यवस्था की काफी कमी है उन्हें उनकी जरूरत है, आगे आए और उनकी मदद करे। आप उनके नंबर +918318193805 पर संपर्क कर सकते हैं। 





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