मोदी द्वारा नेहरू-गांधी परिवार की आलोचना से उनकी विरासत और मजबूत हुई

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: May 10 2019 4:35PM
मोदी द्वारा नेहरू-गांधी परिवार की आलोचना से उनकी विरासत और मजबूत हुई
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामजी पांडे ने कहा कि इलाहाबाद नेहरूजी की जन्मस्थली है, उनकी ‘जन्मभूमि’ और ‘कर्मभूमि’ और भाजपा द्वारा उनके खिलाफ किये जा रहे सभी नकारात्मक प्रचारों के बावजूद यहां के अधिकतर लोगों के लिये वह अब भी श्रद्धेय हैं।

इलाहाबाद। ऐसे वक्त में जब नेहरू-गांधी परिवार को भाजपा की तरफ से लगातार आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, इलाहाबाद में कुछ कांग्रेसी नेताओं का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सहयोगियों द्वारा “राजनीतिक फायदे” के लिये परिवार के सदस्यों पर हमला करने से उनकी विरासत “पुनर्जीवित और सुदृढ़” ही हुयी है। जिले के दो संसदीय क्षेत्रों इलाहाबाद और फूलपुर में 12 मई को चुनाव है और संगम नगरी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक वर्ग का यह भी कहना है कि पिछले कुछ सालों में “नेहरू को लेकर कहे गए अपशब्दों” ने उनमें इन चुनावों को “ज्यादा प्रतिबद्धता” से लड़ने का जोश भर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामजी पांडे ने कहा कि इलाहाबाद नेहरूजी की जन्मस्थली है, उनकी ‘जन्मभूमि’ और ‘कर्मभूमि’ और भाजपा द्वारा उनके खिलाफ किये जा रहे सभी नकारात्मक प्रचारों के बावजूद यहां के अधिकतर लोगों के लिये वह अब भी श्रद्धेय हैं।

भाजपा को जिताए

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उन्होंने इस बात पर अफसोस व्यक्त किया कि इलाहाबाद शहर का “बहुलतावादी चरित्र” अब “खत्म” हो रहा है, और आरोप लगाया कि ऐसा इसलिये है क्योंकि “सांप्रदायिक ताकतें” एक बार फिर देश में सिर उठा रही हैं। पांडे ने बताया कि वो (भाजपा) सोचती हैं कि नेहरू जी, इंदिरा जी और राजीव जी की गलत तरीके से आलोचना और हमला करने से वे हमारे मनोबल पर चोट कर पाएंगे। लेकिन हम उनकी आलोचना के लिये प्रधानमंत्री मोदीजी और अन्य भाजपा नेताओं का शुक्रिया अदा करते हैं। क्योंकि वह जितनी ज्यादा आलोचना करेंगे इलाहाबाद और अन्य जगहों पर उतनी ही नेहरू गांधी परिवार की विरासत सुदृढ़ होगी। इलाहाबाद में कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता शशि कांत त्रिपाठी ने कहा कि पार्टी से जुड़े पुराने लोग और युवा सदस्य शहर के प्रसिद्ध कॉफी हाउस में सियासत पर चर्चा करते हैं और अब नेहरू की इतनी आलोचना सुनने के बाद पार्टी के युवा सदस्य उनकी विरासत पर भी चर्चा कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि हम नेहरू की विरासत और भारत के लिये उनके नजरिये को जानते हैं जो एक ऐसे धर्मनिरपेक्ष, समृद्ध राष्ट्र की थी जो चौमुखी विकास की ओर अग्रसर हो। लेकिन पार्टी के कई युवा सदस्य और पार्टी से जुड़ने वाले मौजूदा पीढ़ी के लोग प्रथम प्रधानमंत्री के बारे में, इलाहाबाद में उनकी निजी जिंदगी के बारे में ज्यादा नहीं जानते लेकिन अब वे किताबों में और ऑनलाइन पढ़ रहे हैं, इसके लिये मोदीजी का शुक्रिया। इलाहाबाद को “राजनीति का मक्का” माना जाता है। कॉफी हाउस से लेकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय तक और बैंक प्रबंधकों से लेकर रिक्शावालों तक लगभग हर इलाहाबादी की सियासत को लेकर अपनी राय है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अभय अवस्थी भी सत्ताधारी पार्टी की तरफ से उनकी पार्टी और नेहरू गांधी परिवार की आलोचना से प्रभावित नहीं दिखते। खास तौर पर इन चुनावों में मोदी के राजीव गांधी पर निशाना साधने के बाद भी। 



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अवस्थी ने कहा कि इलाहाबाद दो प्रधानमंत्रियों- नेहरू और इंदिरा- की जन्मस्थली रही है। इसने चुनावों के जरिये दो और प्रधानमंत्री- लाल बहादुर शास्त्री और वी पी सिंह- दिये हैं और इसके अलावा यह कई राजनीतिक दिग्गजों की जमीन रही है। यहां के लोग सियासत की बारीकियों को समझते हैं और इसलिये उन्हें आसानी से मूर्ख नहीं बनाया जा सकता, यद्यपि बाद के दिनों में जातिगत समीकरण एक अहम कारक बन गए। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने फूलपुर लोकसभा सीट से पहले तीन लोकसभा चुनाव (1952,1957,1962) जीते थे।

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