जो सांसद अपने क्षेत्र में कम दिखते हैं, उन्हें मुश्किल समय का सामना करना पड़ता है: थरूर

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Jul 12 2019 6:43PM
जो सांसद अपने क्षेत्र में कम दिखते हैं, उन्हें मुश्किल समय का सामना करना पड़ता है: थरूर
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थरूर ने कहा, ‘‘लोगों ने मुझे देखा, अपने सुख-दुख में शामिल होते देखा और यही कारण है कि उन लोगों ने भरोसा जताया तथा मुझे वोट दिया।’’थरूर ने यहां बृहस्पतिवार को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा आयोजित दक्षिण एशिया परिचर्चा के तीसरे सत्र में यह कहा। इसमें शोधार्थियों, नीति निर्माता, नौकरशाह और पत्रकारों ने आधुनिक दक्षिण एशिया को परिभाषित करने वाले समकालिक विचारों को परिभाषित किया।

नयी दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा है कि अपने निर्वाचन क्षेत्र से अलग तरह का संबंध रखने वाले और वहां बहुत कम दिखने वाले सांसदों को मुश्किल समय का सामना करना पड़ता है। केरल के तिरूवनंतपुरम से 2009 से लगातार तीन बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थरूर ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि उन्हें लगता है कि उन्होंने अपना काम बखूबी किया और यही कारण है कि लोगों ने उन पर एक बार फिर से भरोसा जताया। उल्लेखनीय है कि हालिया लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के गढ़ अमेठी में राहुल गांधी की हार का कारण इस क्षेत्र के मतदाताओं से उनका कटे रहना या संपर्क में नहीं रहना बताया था।  हालांकि, थरूर ने इस बात का जिक्र किया कि सिर्फ भाजपा के सांसद और उत्तर भारत के सांसद उनकी इस दलील के समर्थन में हैं।

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कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘खास तौर पर उत्तर (भारत) के सांसद, जिनके अपने निर्वाचन क्षेत्रों से कुछ अलग तरह के संबंध हैं और जो वहां कम दिखते हैं, उन्हें मुश्किल समय का सामना करना पड़ता है।’’उन्होंने कहा, ‘‘वे लोग उनमें शामिल हैं जो शायद नरेंद्र मोदी के नाम पर जीत सकते है और इस बार भी ऐसा ही हुआ। लेकिन हममें से बहुतों को जो चीज उनसे अलग करती है वह निर्वाचन क्षेत्र में हमारे द्वारा किया गया काम है।’’उन्होंने कहा कि लोगों ने उन्हें दोबारा चुना क्योंकि लोगों ने यह माना कि उन्होंने अपना काम बखूबी किया है।  थरूर ने कहा, ‘‘लोगों ने मुझे देखा, अपने सुख-दुख में शामिल होते देखा और यही कारण है कि उन लोगों ने भरोसा जताया तथा मुझे वोट दिया।’’थरूर ने यहां बृहस्पतिवार को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा आयोजित दक्षिण एशिया परिचर्चा के तीसरे सत्र में यह कहा। इसमें शोधार्थियों, नीति निर्माता, नौकरशाह और पत्रकारों ने आधुनिक दक्षिण एशिया को परिभाषित करने वाले समकालिक विचारों को परिभाषित किया।  



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