जन्माष्टमी के अवसर पर मुस्लिम समाज ने की कान्हा के जन्म की खास तैयारियां

जन्माष्टमी के अवसर पर मुस्लिम समाज ने की कान्हा के जन्म की खास तैयारियां
प्रतिरूप फोटो

मुस्लिम कारीगर आरिफ जमाल नर ने बताया कि इस काम में अब ज्यादा मुनाफा नहीं मिलता है लेकिन अपनी कला के साथ गंगा, जमुनी तहजीब को कायम रखने के लिए वह इस काम को बड़े ही श्रद्धा के साथ करते हैं और भगवान की इस काम के लिए हम लोग साफ सफाई और स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखते हैं।

बनारस में हर पर्व हर त्योहारों की छटा खूब बिखरी रहती है किसी भी पर्व के आने से पहले ही यहां के बाजार सज  जाते हैं। आज कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कान्हा के जन्म पर काशी में गंगा, जमुनी तहजीब की एक अद्भुत मिसाल देखने लायक होती है यहां के मुस्लिम समाज के लोग भी कान्हा के जन्म के लिए खास तैयारियां करते हैं जो बहुत ही प्रशंसनीय है।

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वाराणसी में कई पीढ़ियों से मुस्लिम बंधु कान्हा के जन्मदिन के लिए खास तैयारी करते हैं और श्री कृष्ण के लिए मुकुट, बांसुरी और अन्य प्रकार की सात सज्जा का सामान तैयार करते हैं। इसके साथ ही मुस्लिम बंधु साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखते हैं। 

वाराणसी के कोयला बाजार क्षेत्र में ऐसे ही कई परिवार है जो बहुत ही पीढ़ियों से यह काम करते आ रहे हैं इन्हीं लोगों में से एक है अक्षय खान। 

जो इस काम में 40 साल से जुड़े हैं और उनका पूरा परिवार न जाने कितने पीढ़ियों से इस काम को कर रहा है यह उन्हें भी याद नहीं है। बातचीत में अक्षय खान ने बताया कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर वह कान्हा जी के लिए जरदोजी के विशेष वस्त्र, मुकुट के अलावा बख़ूबी, हार, बांसुरी और अन्य सात सज्जा का सामान तैयार करते हैं। उन्होंने आगे बताया कि बनारस में तैयार हुए विशेष मुकुट की डिमांड मथुरा, वृंदावन, दिल्ली के अलावा राजस्थान तक है।

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मुस्लिम कारीगर आरिफ जमाल नर ने बताया कि इस काम में अब ज्यादा मुनाफा नहीं मिलता है लेकिन अपनी कला के साथ गंगा, जमुनी तहजीब को कायम रखने के लिए वह इस काम को बड़े ही श्रद्धा के साथ करते हैं और भगवान की इस काम के लिए हम लोग साफ सफाई और स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखते हैं।





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