नासिक करेंसी प्रिंटिंग प्रेस में नहीं हुई थी 5 लाख रुपए की चोरी, पुलिस ने कहा- वर्कलोड के चलते हुई गलती

नासिक करेंसी प्रिंटिंग प्रेस में नहीं हुई थी 5 लाख रुपए की चोरी, पुलिस ने कहा- वर्कलोड के चलते हुई गलती

नासिक करेंसी प्रिंटिंग प्रेस से गायब हुए पैसों के मामले में पुलिस ने पाया कि कोई चोरी नहीं हुई थी, बल्कि नोटों की गिनती में मानवीय त्रुटि और लापरवाही हुई थी। जिसके लिए दो पर्यवेक्षक जिम्मेदार थे।

नासिक। महाराष्ट्र के नासिक में स्थित सरकारी करेंसी प्रिंटिंग प्रेस में चोरी की खबरों के बीच पुलिस ने मामले को सुलझा लिया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक पुलिस का कहना है कि नासिक करेंसी प्रिंटिंग प्रेस में कोई चोरी नहीं हुई है। जबकि कुछ वक्त पहले खबर सामने आई थी कि नासिक करेंसी प्रिंटिंग प्रेस से 5 लाख रुपए के नोट गायब है। जिसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी। लेकिन अब इस मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है।  

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अंग्रेजी समाचार पत्र 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक नासिक करेंसी प्रिंटिंग प्रेस से गायब हुए पैसों के मामले में पुलिस ने पाया कि कोई चोरी नहीं हुई थी, बल्कि नोटों की गिनती में मानवीय त्रुटि और लापरवाही हुई थी। जिसके लिए दो पर्यवेक्षक जिम्मेदार थे।

पुलिस ने बताया कि ज्यादा वर्कलोड होने की वजह से यह गलती हुई और दोनों ने कार्रवाई के डर से इस बारे में सूचित नहीं किया। फिलहाल पर्यवेक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी थी। पुलिस जांच में जुटी हुई है।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि छह महीने बीत जाने के बाद भी टकसाल ने कोई जांच शुरू नहीं की थी। ऐसे में जब पुलिस ने अपनी जांच शुरू की तो पता चला कि बंडलों की 12 फरवरी को आखिरी बार परीक्षकों द्वारा जांच की गई थी। इसी के माध्यम से पुलिस अधिकारी दो पर्यवेक्षकों के पास पहुंचे जिसने पैसों के मामले में त्रुटी हुई थी और उन्होंने अपनी गलती नहीं सुधारी थी। 

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पुलिस अधिकारी के मुताबिक गलती करने वाले पर्यवेक्षकों ने बताया कि पैसे चोरी नहीं हुए थे, बल्कि वर्क लोड ज्यादा होने की वजह से यह गलती हुई थी। इतना ही नहीं इन लोगों ने कार्रवाई के डर से यह बात किसी को नहीं बताई थी। ऐसे में काउंटिंग के दौरान हिसाब से अतिरिक्त 5 लाख रुपए निकले तो यह मान लिया गया कि पैसा चोरी हो गया है। दोनों पर्यवेक्षकों ने टकसाल प्रमुख को लिखे एक पत्र में यह बात स्वीकार की है। जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया।





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