बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों से कराया गया मुक्त, अमित शाह बोले- आंतरिक सुरक्षा में एक ऐतिहासिक पड़ाव पार हुआ है

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ANI
अंकित सिंह । Sep 21, 2022 7:10PM
कुलदीप सिंह ने आगे बताया कि हम कह सकते हैं कि अब बिहार नक्सल मुक्त है। रंगदारी गिरोह के रूप में इनकी मौजूदगी हो सकती है, लेकिन बिहार में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां नक्सलियों का दबदबा हो। बिहार और झारखंड में ऐसी कोई जगह नहीं जहां सेना नहीं पहुंच सकती।

झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमाओं पर लातेहार एवं गढ़वा जिले में स्थित बूढ़ा पहाड़ को लगभग 32 वर्षों बाद एक बार फिर सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के कब्जे से मुक्त करा लिया है। इसके अलावा  चक्रबंधा व भीमबांध के दुर्गम क्षेत्रों से माओवादियों को सफलतापूर्वक निकाला गया है। सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप सिंह ने बताया कि झारखंड में बूढ़ा पहाड़ जो नक्सल बहुल इलाका था उसे मुक्त करा दिया गया है। हेलीकॉप्टर की मदद से वहां फोर्स भेजी गई। सुरक्षाबलों के लिए वहां स्थाई कैंप लगाया गया है। यह तीन अलग-अलग ऑपरेशनों के तहत किया गया है। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2022 से अब तक छत्तीसगढ़ में 7 नक्सली, झारखंड में 4 और मध्य प्रदेश में 3 नक्सली ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म के तहत मारे गए हैं। कुल 578 माओवादियों ने आत्मसमर्पण/गिरफ्तारी की है।

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कुलदीप सिंह ने आगे बताया कि हम कह सकते हैं कि अब बिहार नक्सल मुक्त है। रंगदारी गिरोह के रूप में इनकी मौजूदगी हो सकती है, लेकिन बिहार में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां नक्सलियों का दबदबा हो। बिहार और झारखंड में ऐसी कोई जगह नहीं जहां सेना नहीं पहुंच सकती। सुरक्षाबलों की कामयाबी पर अमित शाह ने उन्हें बधाई दी है। अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा में एक ऐतिहासिक पड़ाव पार हुआ है। पीएम नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देशभर में वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध चल रही निर्णायक लड़ाई में सुरक्षाबलों ने अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है। इसके लिए सीआरपीएफ,सुरक्षा एजेंसियों व राज्य पुलिसबलों को बधाई देता हूँ।

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गृह मंत्री ने आगे कहा कि पहली बार बूढा पहाड़, चक्रबंधा व भीमबांध के दुर्गम क्षेत्रों से माओवादियों को सफलतापूर्वक निकालकर सुरक्षाबलों के स्थायी कैंप स्थापित किये गए हैं। नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आतंकवाद व LWE के विरुद्ध गृह मंत्रालय की जीरो टॉलेरेंस की नीति जारी रहेगी और ये लड़ाई आगे और तेज होगी। एक अन्य ट्वीट उन्होंने कहा कि शीर्ष माओवादियों के गढ़ में महीनों तक चले इन अभियानों में सुरक्षा बलों को अप्रत्याशित सफलता प्राप्त हुई, जिसमें 14माओवादियों को मार गिराया गया व 590 से अधिक की गिरफ्तारी/आत्मसमर्पण हुआ। जिसमें लाखों-करोड़ों के ईनामी माओवादी जैसे मिथिलेश महतो जिसपर ₹1करोड़ का इनाम था पकड़े गए हैं।

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