Netaji को अपने स्वतंत्रता संग्राम के लिए मजबूरन फासीवादी देशों से समर्थन मांगना पड़ा : बेटी

Anita Bose
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अनिता ने रेखांकित किया कि नेताजी ने जिन देशों से संपर्क किया वे केवल साझा दुश्मन के खिलाफ मदद को इच्छुक थे। उन्होंने कहा, ‘‘ भारत की आजादी की अपनी लड़ाई में नेताजी खुद को फासीवादी देशों से मदद मांगने को मजबूर पाते थे जबकि वह उनकी विचारधारा और राजनीतिक एजेंडे को साझा नहीं करते थे।

कोलकाता। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 126वीं जयंती से एक दिन पहले उनकी बेटी अनिता बोस फाफ ने रविवार के कहा कि क्रांतिकारी नेता ने भारत की आजादी की अपनी लड़ाई में मजबूरन उन फासीवादी देशों का सहयोग मांगा जिनकी विचारधारा से वह सहमत नहीं थे। बयान में अनिता ने रेखांकित किया कि नेताजी ने जिन देशों से संपर्क किया वे केवल साझा दुश्मन के खिलाफ मदद को इच्छुक थे। उन्होंने कहा, ‘‘ भारत की आजादी की अपनी लड़ाई में नेताजी खुद को फासीवादी देशों से मदद मांगने को मजबूर पाते थे जबकि वह उनकी विचारधारा और राजनीतिक एजेंडे को साझा नहीं करते थे। उस समय वे केवल वे देश थे जो समान दुश्मन के खिलाफ आजादी की लड़ाई में सहयोग करने को इच्छुक थे। ’’

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जर्मनी में निवास कर रही अनिता ने अपनी मांग दोहराई कि जापान के रेनकोजी मंदिर में सुरक्षित रखी गई अस्थियों को वापस स्वदेश लाया जाए जिसके बारे में माना जाता है कि वह नेताजी की हैं। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘विदेशी जमीन पर मौत के 77 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद उनकी अस्थियां विदेशी जमीन पर रखी हैं, उनके देश के कई पुरुष और महिलाएं उन्हें नहीं भूले हैं.पूरे राजनीतिक जगत में पार्टियां जो उनके विचारों और विचारधारा को साझा करती हैं और जो नहीं भी करती, उनके भारत के लिए दिए गए बलिदान को श्रद्धांजलि देती हैं।’’ अनिता ने जोर देकर कहा, ‘‘नेताजी की अस्थियों को स्वदेश लाया जाए।

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