बिहार विधान परिषद के नवनिर्वाचित सदस्यों का शपथ ग्रहण, CM नीतीश भी रहे मौजूद

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 22, 2020   16:07
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बिहार विधान परिषद के नवनिर्वाचित सदस्यों का शपथ ग्रहण, CM नीतीश भी रहे मौजूद
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बिहार विधान परिषद के शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की इन चार—चार सीटों के लिए पिछले 22 अक्टूबर को हुए मतदान के मतगणना का काम जो 12 नवंबर को शुरू हुआ और 13 नवंबर की देर रात समाप्त हुआ था।

पटना। बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह ने आठ नवनिर्वाचित विधान पार्षदों को रविवार को सदन के सदस्य के तौर पर शपथ दिलायी। बिहार विधान परिषद के उपभवन सभागार में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अवधेश ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में नवनिर्वाचित विधान पार्षदों नीरज कुमार, मदन मोहन झा, देवेश चंद्र ठाकुर, नवल किशोर यादव, केदार नाथ पांडेय, एन0 के0 यादव, सर्वेश कुमार एवं संजय कुमार सिंह को सदन के सदस्य के तौर पर शपथ दिलायी। इस अवसर पर बिहार विधान सभा के प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी एवं उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। बिहार विधान परिषद के शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की इन चार—चार सीटों के लिए पिछले 22 अक्टूबर को हुए मतदान के मतगणना का काम जो 12 नवंबर को शुरू हुआ और 13 नवंबर की देर रात समाप्त हुआ था।

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जदयू के नीरज कुमार एवं देवेश चंद्र ठाकुर, भाजपा के एन के यादव एवं नवल किशोर यादव, भाकपा के केदरनाथ पांडेय एवं संजय कुमार सिंह तथा कांग्रेस के मदन मोहन झा ने अपना कब्जा बरकार रखा जबकि दरभंगा स्नातक क्षेत्र से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक चौधरी के करीबी दिलीप चौधरी अपनी सीट नहीं बचा पाए और निर्दलीय प्रत्याशी सर्वेश कुमार के हाथों 15595 की तुलना में 22549 मतों से पराजित हो गए। सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री रहे नीरज के साथ देवेश एवं एन के यादव क्रमश: पटना, कोशी एवं त्रिहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों तथा नवल, मदन, संजय एवं केदरानाथ क्रमश: पटना, दरभंगा, त्रिहुत एवं सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनावी मैदान में थे। कोविड 19 महामारी के कारण इस सीटों के लिए चुनाव कुछ महीनों के लिए स्थगित रहने के बाद पिछले 22 अक्टूबर को मतदान हुआ था।





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CM अमरिंदर ने किसानों के संघर्ष को बताया न्यायपूर्ण, कहा- सरकार किसानों की आवाज क्यों नहीं सुन रही

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 1, 2020   08:15
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CM अमरिंदर ने किसानों के संघर्ष को बताया न्यायपूर्ण, कहा- सरकार किसानों की आवाज क्यों नहीं सुन रही
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पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि उनकी सरकार इन ‘काले कानूनों’ के खिलाफ किसानों के साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि राज्यपाल इस विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजने की जगह उस पर ‘बैठ’ गए हैं।

सुलतानपुर लोधी। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सोमवार को कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के संघर्ष को ‘न्यायपूर्ण’ बताते हुये केंद्र सरकार से सवाल किया कि वह किसानों की आवाज क्यों नहीं सुन रही है और इस मुद्दे पर उसका हठी रवैया क्यों है। सिंह ने दोहराया कि उनकी सरकार इन ‘काले कानूनों’ के खिलाफ किसानों के साथ खड़ी रहेगी।

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मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक कस्बों सुल्तानपुर लोधी और डेरा बाबा नानक की यात्रा के दौरान अनौपचारिक तौर पर मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान कहा, ‘‘ जनता की बात सुनना सरकार का काम है । अगर कई राज्यों के किसान इस प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं तो इसका मतलब है कि वे वास्तव में दुखी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इन कानूनों को किसानों के लिए फायदेमंद बताने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मोदी शुरू से यही कह रहे हैं और यही वजह है कि पंजाब इसके लिए अपने विधेयक लेकर आया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल इस विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजने की जगह उस पर ‘बैठ’ गए हैं।





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किसानों और सरकार के बीच आज होगी बात, दोपहर 3 बजे दिल्ली के विज्ञान भवन में चर्चा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 1, 2020   08:03
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किसानों और सरकार के बीच आज होगी बात, दोपहर 3 बजे दिल्ली के विज्ञान भवन में चर्चा
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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, 'कोरोना वायरस महामारी एवं सर्दी को ध्यान में रखते हुये हमने किसान यूनियनों के नेताओं को तीन दिसंबर की बैठक से पहले ही चर्चा के ​लिये आने का न्यौता दिया है। यह बैठक एक दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में दोपहर बाद तीन बजे बुलायी गयी है।

नयी दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के नेताओं को कोविड-19 महामारी एवं सर्दी का हवाला देते हुये तीन दिसंबर की जगह मंगलवार को बातचीत के लिये आमंत्रित किया है। गौरतलब है कि हजारों किसान दिल्ली की सीमा पर पिछले पांच दिनों से धरने पर हैं । केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ उनका यह धरना सोमवार को पांचवें दिन में प्रवेश कर गया। इन कानूनों के बारे में किसानों को आशंका है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त हो जाएगा।

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तोमर ने कहा, 'कोरोना वायरस महामारी एवं सर्दी को ध्यान में रखते हुये हमने किसान यूनियनों के नेताओं को तीन दिसंबर की बैठक से पहले ही चर्चा के ​लिये आने का न्यौता दिया है। उन्होंने बताया कि अब यह बैठक एक दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में दोपहर बाद तीन बजे बुलायी गयी है। उन्होंने बताया कि 13 नवंबर को हुई बैठक में शामिल सभी किसान नेताओं को इस बार भी आमंत्रित किया गया है।

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इस बीच कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने 32 किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों को पत्र लिख कर एक दिसंबर को चर्चा के लिये आमंत्रित किया है। अग्रवाल ने जिन संगठनों को पत्र लिखा है उनमें क्रांतिकारी किसान यूनियन, जम्मुहारी किसान सभा, भारतीाय किसान सभा (दकुदा), कुल हिंद किसान सभा और पंजाब किसान यूनियन शामिल हैं। इससे पहले 13 नवंबर को हुयी बैठक बेनतीजा रही थी और केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने किसानों को तीन दिसंबर को दूसरे दौर की बातचीत के लिये आमंत्रित किया था ताकि तीन नये कृषि कानूनों से उपजी उनकी चिंताओं का निराकरण किया जा सके।





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भोपाल के ईदगाह हिल्स का नाम गुरु नानक टेकरी रखने की माँग

  •  दिनेश शुक्ल
  •  नवंबर 30, 2020   23:30
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भोपाल के ईदगाह हिल्स का नाम गुरु नानक टेकरी रखने की माँग
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भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से विधायक और मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने कहा है कि ईदगाह हिल्स का नाम बदलकर गुरु नानक टेकरी किया जाए। उन्होंने कहा कि 500 साल पहले जब गुरु नानक देव जी भारत भ्रमण पर निकले थे, तब वे भोपाल भी आए थे।

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने  प्रदेश की राजधानी  भोपाल स्थित ईदगाह हिल्स का नाम बदलकर गुरु नानक टेकरी किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि भोपाल की यह टेकरी ऐतिहासिक रूप से गुरु नानक देव जी की स्मृतियों से जुड़ी हुई है। वही रामेश्वर शर्मा ने होशंगाबाद शहर का नाम बदलकर नर्मदापुरम रखने की वकालत की है। 

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भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से विधायक और मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने कहा है कि ईदगाह हिल्स का नाम बदलकर गुरु नानक टेकरी किया जाए। उन्होंने कहा कि 500 साल पहले जब गुरु नानक देव जी भारत भ्रमण पर निकले थे, तब वे भोपाल भी आए थे। यहां गुरु नानक देव जी उसी टेकरी पर आए थे, जिसे ईदगाह हिल्स कहा जाता है। उन्होंने कहा कि पहले इस टेकरी को गुरुनानक टेकरी कहा जाता था, लेकिन बाद में यहां ईदगाह बन गई और उसका नाम ईदगाह हिल्स पड़ गया। अब इसे बदलकर गुरु नानक टेकरी किया जाना चाहिए। वही रामेश्वर शर्मा ने कहा कि होशंगाबाद का नाम भी बदलकर नर्मदापुरम किया जाना चाहिए। 





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