शानदार पहल! अब हिंदी समेत आठ भाषाओं में कर सकेंगे इंजीनियरिंग

शानदार पहल! अब हिंदी समेत आठ भाषाओं में कर सकेंगे इंजीनियरिंग

टीओआई में छपी एक खबर के मुताबिक, इंजीनियरिंग की पढ़ाई न केवल हिंदी में होगी बल्कि मराठी, गुजराती, बंगाली समेत आठ भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में होगी। अब आप अपने पंसदीदा भाषा में इंजीनियरिंग कर पाएंगें।

देशभर से युवा इंजीनियर बनने का ख्वाब देखते है लेकिन अग्रेजी में पकड़ मजबूत न होने के कारण कई ऐसे छात्र है जो इंजीनियर के पाठ्यक्रम को समझ ही नहीं पाते है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि देश में अब भी ऐसे कई युवा है जिनको इंगलिश में लिखना और समझना कठिन होता है, भले ही वह काफी पढ़ाई में कौशल हो लेकिन केवल इंगलिश भाषा में पकड़ मजबूत न होने के कारण इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने का सपना पूरा नहीं कर पाते हैं। इसी को देखते हुए अब हिंदी भाषी युवाओं के लिए इंजीनियरिंग आ गई है और अब ऐसे छात्र अपने सपने को पूरा करते हुए इंजीनियरिंग कर पाएंगे। टीओआई में छपी एक खबर के मुताबिक, इंजीनियरिंग की पढ़ाई न केवल हिंदी में होगी बल्कि मराठी, गुजराती, बंगाली समेत आठ भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में होगी। अब आप अपने पंसदीदा भाषा में इंजीनियरिंग कर पाएंगें।

कैसे हुआ यह संभव?

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने कई कॉलेजों को अकेडमिक ईयर (2020-21) से हिंदी समेत आठ क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं में इंजीनियर की पढ़ाई करने की अनुमति दे दी है। यह भाषाएं होगी, मराठी, बंगाली, तेलुगु, तमिल, गुजराती, कन्नड़ और मलयालम। बता दें कि इस कदम से अब आदीवासी के बच्चे, ग्रामीण सभी आसानी से अपने सपनों को पूरा कर पाएंगे।कई ऐसे मेधावी छात्र है जो केवल अंग्रेजी भाण होने के कारण इंजीनियर जैसी पढ़ाई से दूर रहते थे। जानकारी के मुताबिक, जर्मनी, फ्रांस, रूस, जापान और चीन जैसे कई देश है जो अपनी भाषाओं में बड़ी डिग्री छात्रों को प्रदान करते हैं।

बता दें कि भारत की नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय भाषाओं में पढ़ाई को अब प्राथमिकता दी गई है। एआईसीटीई द्वारा 8 भाषाओं को अनुमति देने के बाद अब तक पूरे देश से लगभग 500 आवेदन प्राप्त हो गए है।एआईसीटीई के अध्यक्ष अनिल सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि, भविष्य में 11 और भाषाओं को इंजीनियर की पढ़ाई के लिए लाया जाएगा। 





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