कुलभूषण पर इमरान के तेवर हुए ढीले, काउंसलर एक्सेस देने को तैयार हुआ पाकिस्तान

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Jul 19 2019 10:24AM
कुलभूषण पर इमरान के तेवर हुए ढीले, काउंसलर एक्सेस देने को तैयार हुआ पाकिस्तान
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भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव (49) को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में सुनवाई के बाद जासूसी और आतंकवाद के आरोपों पर फांसी की सजा सुनाई थी। इस पर भारत में काफी कड़ी प्रतिक्रिया हुई। अदालत के अध्यक्ष अब्दुलकावी अहमद यूसुफ की अगुवाई वाली 16 सदस्यीय पीठ ने एक के मुकाबले 15 मतों से कुलभूषण सुधीर जाधव को दोषी ठहराये जाने और उन्हें सुनाई गयी सजा की ‘‘प्रभावी समीक्षा करने और उस पर पुनर्विचार करने’’ का आदेश दिया है।

इस्लामाबाद। अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) में मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान और उसके कप्तान इमरान खान के तेवर ढीले हो गए हैं। अभी तक कुलभूषण जाधव मामले में आंखे दिकाने वाला पकिस्तान आईसीजे के आदेश के बाद  भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को अपने देश के कानूनों के अनुसार काउंसलर एकसेस देने को राजी हो गया है। विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी।  मंत्रालय ने साथ ही कहा कि जाधव को राजनयिक संबंधों पर विएना संधि के तहत उनके अधिकारों से अवगत करा दिया गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘आईसीजे के फैसले के आधार पर कमांडर कुलभूषण जाधव को राजनयिक संबंधों पर विएना संधि के अनुच्छेद 36 के पैराग्राफ 1(बी) के तहत उनके अधिकारों के बारे में सूचित कर दिया गया है।’’

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उसने कहा, ‘‘एक जिम्मेदार देश होने के नाते पाकिस्तान कमांडर कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान कानूनों के अनुसार राजनयिक पहुंच मुहैया कराएगा, जिसके लिए कार्य प्रणालियों पर काम किया जा रहा है।’’ उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) ने पाकिस्तान को जाधव को सुनाई गयी फांसी की सजा पर प्रभावी तरीके से फिर से विचार करने और राजनयिक पहुंच प्रदान करने का बुधवार को आदेश दिया था। इसे भारत के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है।

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भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव (49) को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में सुनवाई के बाद जासूसी और आतंकवाद के आरोपों पर फांसी की सजा सुनाई थी। इस पर भारत में काफी कड़ी प्रतिक्रिया हुई। अदालत के अध्यक्ष अब्दुलकावी अहमद यूसुफ की अगुवाई वाली 16 सदस्यीय पीठ ने एक के मुकाबले 15 मतों से कुलभूषण सुधीर जाधव को दोषी ठहराये जाने और उन्हें सुनाई गयी सजा की ‘‘प्रभावी समीक्षा करने और उस पर पुनर्विचार करने’’ का आदेश दिया है।

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