सत्ता सुख से वंचित लोग अब मोदी को रोकने के लिए गठबंधन कर रहे हैं: महेन्द्र नाथ

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 30, 2018   19:18
सत्ता सुख से वंचित लोग अब मोदी को रोकने के लिए गठबंधन कर रहे हैं: महेन्द्र नाथ

उन्होंने कहा कि भाजपा का जनता से गठबंधन है, इसलिए कोई कितने भी गठबंधन क्यों न कर ले, लेकिन मोदी को कोई भी ताकत फिर से प्रधानमंत्री बनने से नहीं रोक सकती।

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने शुक्रवार को कहा कि अपनी भोग विलासिता के लिए सत्ता सुख से वंचित लोग अब प्रधानंमत्री नरेन्द्र मोदी को रोकने के लिए गठबंधन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का जनता से गठबंधन है, इसलिए कोई कितने भी गठबंधन क्यों न कर ले, लेकिन मोदी को कोई भी ताकत फिर से प्रधानमंत्री बनने से नहीं रोक सकती।

पाण्डेय ने कहा कि देश की सत्ता की बागडोर संभालते ही प्रधानमंत्री ने गरीबों, वंचितों, शोषितों, अनुसूचितों सहित गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले सभी वर्गों के लोगों की जीवनशैली में बदलाव लाने के संकल्प के साथ कार्य करना शुरू किया और कई कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से आमजन तक सरकारी सुविधाओं का लाभ पहुंचाकर लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने का काम किया है। वह शुक्रवार को पार्टी के अनुसूचित मोर्चे द्वारा स्थानीय विश्वेश्वरैया सभागार में आयोजित सामाजिक प्रतिनिधि बैठक को संबोधित कर रहे थे।

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प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने सपा-बसपा और कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस ने महात्मा गांधी के नाम का तो उपयोग किया लेकिन उनके विचारों को नहीं अपनाया। कांग्रेस ने महात्मा गांधी के विचारों को कब का छोड़ दिया, इसके विपरीत मोदी ने गांधी के दिखाये रास्ते पर चलते हुए स्वच्छता को पूरे देश में एक आंदोलन का स्वरूप दे दिया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद सपा-बसपा और कांग्रेस जैसे दलों ने गरीबों के नाम पर गरीबी हटाने का नारा देकर सरकारें तो बनाईं, लेकिन इन गरीबों के जीवन स्तर में सुधार आये, इसके लिए कोई कार्य नहीं किया।

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सपा-बसपा जैसे दल कांग्रेस के पदचिह्नों पर चलते हुए परिवारवाद और भ्रष्टाचार के दल-दल में फंस गए हैं। पाण्डेय ने सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर आरोप लगाते हुए कहा कि क्या लोहिया ने यही सिद्धांत और आदर्श दिया था कि मुलायम अपने ही परिवार के 67 से भी अधिक लोगों को विभिन्न पदों पर बिठाकर शासन सत्ता का सुख भोगते रहे। वहीं, बसपा ने भी आम्बेडकर के सिद्धान्तों को तिलाजंलि दे दी।





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