Yes Milord! जातीय जनगणना के खिलाफ याचिकाएं खारिज, देश को मिलेगा पहला समलैंगिक हाई कोर्ट जज?

Yes Milord
prabhasakshi
अभिनय आकाश । Jan 20, 2023 6:02PM
इस सप्ताह यानी 16 जनवरी से 20 जनवरी 2023 तक क्या कुछ हुआ। कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट और टिप्पणियों का विकली राउंड अप आपके सामने लेकर आए हैं। कुल मिलाकर कहें तो आपको इस सप्ताह होने वाले भारत के विभिन्न न्यायालयों की मुख्य खबरों के बारे में बताएंगे।

सुप्रीम कोर्ट से लेकर लोअर कोर्ट तक के वीकली राउंड अप में इस सप्ताह कानूनी खबरों के लिहाज से काफी अहम रहा। जहां एक तरफ दिल्ली में अधिकार को लेकर केंद्र और केजरीवाल सरकार के बीच चल रहे विवाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया। वहींजातीय जनगणना के खिलाफ सभी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। ज्ञानवापी मामले में इलाहावाद हाई कोर्ट ने एएसआई को और वक़्त दिया। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की तरफ से एक बार फिर से गे वकील सौरभ कृपाल के नाम की फिर सिफारिश की गई। ऐसे में आज आपको सुप्रीम कोर्ट से लेकर लोअर कोर्ट तक इस सप्ताह यानी 16 जनवरी से 20 जनवरी 2023 तक क्या कुछ हुआ। कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट और टिप्पणियों का विकली राउंड अप आपके सामने लेकर आए हैं। कुल मिलाकर कहें तो आपको इस सप्ताह होने वाले भारत के विभिन्न न्यायालयों की मुख्य खबरों के बारे में बताएंगे।

इसे भी पढ़ें: SC On Marital Rape: मैरिटल रेप अपराध हो या नहीं, जानिए सुप्रीम कोर्ट में आज इस केस पर क्या हुआ

SC कॉलेजियम ने की गे वकील सौरभ कृपाल के नाम की फिर सिफारिश

केंद्र की स्थिति से असहमत सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में खुले तौर पर समलैंगिक वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ कृपाल को नियुक्त करने की अपनी 11 नवंबर, 2021 की सिफारिश को फिर से अपना समर्थन दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय कॉलेजियम, जिसमें न्यायमूर्ति एस के कौल और के एम जोसेफ भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि किरपाल की न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति पांच साल से लंबित थी और इसे "शीघ्र" संसाधित किया जाना था।

जेल अनंतकाल तक नहीं

लखीमपुर खीरी मामले में केंद्रीय मंत्री के बेटे और आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत अर्जी का यूपी सरकार ने विरोध किया है। यूपी सरकार ने सुप्रीम कोट में कहा, मामला बेहद गंभीर है और जमानत होने पर समाज में गलत संदेश जाएगा। कोट ने कहा, किसी आरोपी को अनंतकाल के लिए हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए, जब तक आरोप साबित न हो जाएं। सुप्रीम कोट ने बेल अर्जी पर फैसला सुरक्षित रख लिया। लखीमपुर खीरी में किसानों को कथित तौर पर गाड़ी से कुचलने के मामले में एक केस दर्ज हुआ था जिसमे आशीष आरोपी हैं। 

इसे भी पढ़ें: Shahnawaz Hussain को लगा झटका, चलेगा रेप का केस, SC ने कहा- आप सही होंगे तो बच जाएंगे

ज्ञानवापी मामले में एएसआई को और वक़्त

इलाहावाद हाई कोर्ट ने वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर से मिले कथित 'शिवलिंग' की कार्वन डेटिंग मामले में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) को जवावी हलफनामा दाखिल करने के लिए आठ हफ्ते का समय दिया है। सुनवाई अव 20 मार्च को होगी। याची ने भी सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के प्रभाव की जानकारी के लिए समय मांगा है। यह आदेश जस्टिस जे.जे. मुनीर ने लक्ष्मी देवी और अन्य की रिव्यू याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में ASI से कथित शिवलिंग में विना छेड़छाड़ के कार्बन डेटिंग जांच की जानकारी मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन केस के इस याचिका पर पड़ने वाले प्रभाव पर स्पष्टीकरण लेने का समय दिया था।

दिल्ली पर कंट्रोल का फैसला सुरक्षित

दिल्ली में सर्विसेज का नियंत्रण किसके हाथ में हो, इस मामले पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने मामले को बड़ी वेंच भेजने से जुड़ी लिखित दलील पेश करने की इजाजत मांगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी इजाजत दे दी। सॉलिसिटर जनरल ने कहा, वड़ी बेंच की जरूरत इसलिए है क्योंकि मामला संघीय ढांचे से जुड़ा है। दिल्ली में प्रशासनिक सेवाएं किसके नियंत्रण में होंगी, इस पर सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने 14 फरवरी 2019 को एक फैसला दिया था। 

जजों को चुने जाने में केंद्र का रोल

केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डी. वाई. नि चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर सुझाव दिया है। कि सरकार के प्रतिनिधियों को भी सुप्रीम कोर्ट के कलीजियम में शामिल किया जाना चाहिए। इस पर केंद्र सरकार को विपक्ष की आलोचना का सामना कर पड़ रहा है। जवाव देते हुए किरण रिजिजू ने कहा है कि सरकार यह मांग अदालत के आदेश के मद्देनजर ही कर रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक ट्वीट में कहा, 'यह वहुत ही खतरनाक है। न्यायिक नियुक्तियों में सरकार का निश्चित तौर पर कोई दखल नहीं होना चाहिए।' 

जातीय जनगणना के खिलाफ सभी याचिकाएं खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में जाति आधारित जनगणना कराने के बिहार सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने और कानून के अनुसार उचित कदम उठाने की अनुमति दी है। सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि याचिकाओं में कोई दम नहीं है, लिहाजा इन्हें खारिज किया जाता है। 

अन्य न्यूज़