ओरकांडी में मतुआ समुदाय के बीच बोले PM मोदी, बॉरो-मां का अपनत्व मेरे जीवन के अनमोल पल है

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मुझे याद है, पश्चिम बंगाल में ठाकुरनगर में जब मैं गया था, तो वहां मेरे मतुआ भाइयों-बहनों ने मुझे परिवार के सदस्य की तरह प्यार दिया था। विशेष तौर पर ‘बॉरो-मां’ का अपनत्व, मां की तरह उनका आशीर्वाद, मेरे जीवन के अनमोल पल रहे हैं।

ढाका। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज श्री श्री हॉरिचान्द ठाकुर जी की कृपा से मुझे ओराकान्डी ठाकुरबाड़ी की इस पुण्यभूमि को प्रणाम करने का सौभाग्य मिला है। मैं श्री श्री हॉरिचान्द ठाकुर जी, श्री श्री गुरुचान्द ठाकुर जी के चरणों में शीश झुकाकर नमन करता हूं। अभी मेरी यहां कुछ महानुभावों से बात हो रही थी उन्होंने कहा किसने सोचा था कि भारत का प्रधानमंत्री कभी ओराकान्दी आएगा। मैं आज वैसा ही महसूस कर रहा हूं, जो भारत में रहने वाले मतुआ समुदाय के मेरे हजारों-लाखों भाई-बहन ओराकान्दी आकर महसूस करते हैं। 

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प्रधानमंत्री ने कहा कि इस पवित्र अवसर की प्रतीक्षा मुझे कई वर्षों से थी। साल 2015 में प्रधानमंत्री के तौर पर जब पहली बार बांग्लादेश आया था तब भी मैं यहां की इच्छा प्रकट किया था लेकिन वह इच्छा आज पूरी हुई है। उन्होंने कहा कि मुझे याद है, पश्चिम बंगाल में ठाकुरनगर में जब मैं गया था, तो वहां मेरे मतुआ भाइयों-बहनों ने मुझे परिवार के सदस्य की तरह प्यार दिया था। विशेष तौर पर ‘बॉरो-मां’ का अपनत्व, मां की तरह उनका आशीर्वाद, मेरे जीवन के अनमोल पल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में ठाकुरनगर से बांग्लादेश ठाकुरबाड़ी तक वैसी ही श्रद्धा है, वैसी ही आस्था है और वैसा ही अनुभव है।

उन्होंने कहा कि मैं बांग्लादेश के राष्ट्रीय पर्व पर भारत के आपके 130 करोड़ भाइयों-बहनों की तरफ से आपके लिए प्रेम और शुभकामनाएं लाया हूं। आप सभी को बांग्लादेश की आज़ादी के 50 साल पूरे होने पर ढेरों बधाई, हार्दिक शुभकामनाएं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कल ढाका में नेशनल डे कार्यक्रम के दौरान मैं बांग्लादेश के शौर्य पराक्रम की उस संस्कृति का अदमुत झांकी देखी, जिसे इस अदभुत देश ने सहेजकर रखा है और जिसका आप प्रमुख हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि यहां आने से पहले मैं बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की समाधि स्थल पर गया, वहां श्रद्धा-सुमन अर्पित किया। शेख मुजीबुर्रहमान का नेतृत्व, उनका विजन और बांग्लादेश के लोगों पर उनका विश्वास एक मिसाल है। 

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उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश दोनों ही देश अपने विकास से, अपनी प्रगति से पूरे विश्व की प्रगति देखना चाहते हैं। दोनों ही देश दुनिया में अस्थिरता, आतंक और अशांति की जगह स्थिरता, प्रेम और शांति चाहते हैं। यही मूल्य, यही शिक्षा श्री श्री हॉरिचान्द देव जी ने हमें दी थी।

यहां सुने पूरा संबोधन:  

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