26 जनवरी को पीएम नरेंद्र मोदी का काफिला फिर रोका जाएगा, सुरक्षा चूक मामले की जांच कर रही जस्टिस इंदु मल्होत्रा को मिली धमकी

PM Modi Security Breach
रेनू तिवारी । Jan 17, 2022 2:01PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा उल्लंघन (PM Modi Security Breach) मामले में जांच समिति का नेतृत्व कर रही इंदु मल्होत्रा ​​को धमकी भरे फोन आए हैं। कथित तौर पर कहा जा रहा है यह कॉल उन्हें सिख फॉर जस्टिस (SFJ) की तरफ की गयी है और यह फिर कहा गया है कि ऐसी घटना फिर हो सकती हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा उल्लंघन (PM Modi Security Breach) मामले में जांच समिति का नेतृत्व कर रही इंदु मल्होत्रा ​​को धमकी भरे फोन आए हैं। कथित तौर पर कहा जा रहा है यह कॉल उन्हें सिख फॉर जस्टिस (SFJ) की तरफ की गयी है और यह फिर कहा गया है कि ऐसी घटना फिर हो सकती हैं। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने प्रधान मंत्री मोदी की सुरक्षा में चूक मामले की जांच के लिए एक पैनल का गठन किया है, जिसकी प्रमुख जस्टिस इंदु मल्होत्रा है। आपको बता दें कि 5 फरवरी को जब पीएम नरेंद्र मोदी पंजाब के फिरोजपुर रैली करने जा रहे थे तब सड़क पर उनके काफिले का 20 मिनट तक प्रदर्शनकारियों के कारण खड़ा रहना पड़ा था। वह फ्लाईओवर पर फंसे रहे। 

 

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शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा ​​को पैनल का नेतृत्व करने का आदेश दिया गया था। पैनल के गठन के कुछ दिनों बाद, इंदु मल्होत्रा ​​​​को एक अज्ञात व्यक्ति से धमकी भरा कॉल आया। किसी भी समूह से पहचान या कोई संबंध अभी तक नहीं मिला है। लेकिन यह एक बड़ी साजिश का संकेत देती है। कौन हैं ये लोग, जो नहीं चाहते कि मामला सुलझ जाए? यह बात सामने आने के बाद इसकी तह तक जाने की कोशिश की जा रही हैं। साफ तौर पर अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आयी है लेकिन जो रिकार्डेड मैसेज इंदु मल्होत्रा ​​को भेजा गया है उसमे यह कहा गया है कि पीएम की सुरक्षा मामले में शिकायत करने वाले वकीलों ने खुद को खतरनाक स्थिति में डाल लिया है। इंदु मल्होत्रा को इस मामले की जांच करने नहीं दी जाएगी। 26 जनवरी को इसी घटना को फिर से दोहराया जाएगा।

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उच्चतम न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा में हुई चूक की जांच के लिए बुधवार को शीर्ष अदालत की पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की। प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने कहा ‘‘सवालों को एकतरफा जांच पर नहीं छोड़ा जा सकता’’ और न्यायिक क्षेत्र के व्यक्ति द्वारा इसे देखे जाने की आवश्यकता है। इस मामले में केंद्र और पंजाब सरकार के आदेश पर अलग-अलग जांच को रोकते हुए पीठ ने कहा कि सुरक्षा चूक पर ‘‘किसी पार्टी ने गंभीरता से सवाल नहीं उठाया है’’ और स्वतंत्र जांच जरूरी है क्योंकि दोनों सरकारों के बीच कहासुनी से कोई हल नहीं निकलेगा, बल्कि इस महत्वपूर्ण स्तर पर एक मजबूत प्रणाली की जरूरत है।

 

पीठ ने न्यायमूर्ति मल्होत्रा के अलावा राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के महानिदेशक या उनके प्रतिनिधि (जो पुलिस महानिरीक्षक से नीचे की रैंक के नहीं हों), चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक तथा पंजाब के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सुरक्षा) को समिति का सदस्य बनाया है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल भी इसमें सदस्य होंगे और उनसे समिति के समन्वयक के तौर पर काम करने को कहा गया है। समिति जल्द से जल्द शीर्ष अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

 

प्रधान न्यायाधीश ने पीठ के लिए 10 पन्नों का आदेश लिखते हुए मामले की स्वतंत्र जांच के लिए अदालत द्वारा किसी समिति के गठन की दोनों सरकारों और याचिकाकर्ता की इच्छा का संज्ञान लिया। शीर्ष अदालत ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि वह पंजाब सरकार द्वारा प्रधानमंत्री के पांच जनवरी के दौरे के लिए की गई सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित सभी जब्त दस्तावेज न्यायमूर्ति मल्होत्रा को तीन दिन के अंदर उपलब्ध कराएं।

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