प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर दिया जोर

By नीरज कुमार दुबे | Publish Date: Aug 15 2019 12:33PM
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर दिया जोर
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पिछले साल अगस्त में विधि आयोग ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश की थी ताकि जनता के धन को बचाया जा सके। इस संबंध में एक मसौदा, कानून मंत्रालय को सौंपा जा चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने की जरूरत पर एक बार फिर जोर देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा देश को महान बनाने के लिए आवश्यक है। 73वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज भारत एक साथ चुनाव कराने के बारे में बात कर रहा है जो अच्छी बात है।

 
पिछले साल अगस्त में विधि आयोग ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश की थी ताकि जनता के धन को बचाया जा सके। इस संबंध में एक मसौदा, कानून मंत्रालय को सौंपा जा चुका है। हालांकि उसमें यह भी कहा गया है कि संविधान के मौजूदा स्वरूप में एक साथ चुनाव संभव नहीं हैं। केंद्र पिछले कुछ समय से इस विचार पर काम कर रहा है।
 


सरकारी थिंक-टैंक नीति आयोग ने पिछले साल सुझाव दिया था कि 2024 से लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ दो चरणों में कराया जाए, ताकि चुनाव प्रचार संक्षिप्त हो और प्रशासन में व्यवधान कम हो। इस मुद्दे पर गहन विचार विमर्श के लिए सरकार एक समिति का गठन करेगी।
 

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