PM ने युवाओं से कहा, राजनीतिक वंशवाद लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन, इसे जड़ से खत्म किया जाना चाहिए

  •  अंकित सिंह
  •  जनवरी 12, 2021   11:54
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PM ने युवाओं से कहा, राजनीतिक वंशवाद लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन, इसे जड़ से खत्म किया जाना चाहिए

स्वामी विवेकानंद जी ने भारत को उसकी वो ताकत याद दिलाई और एहसास कराया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने एक और अनमोल उपहार दिया है। ये उपहार है, व्यक्तियों के निर्माण का, संस्थाओं के निर्माण का। इसकी चर्चा बहुत कम ही हो पाती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे राष्ट्रीय युवा संसद समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद की जन्म जयंती के ये दिन हम सभी को नई प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज का दिन विशेष इसलिए भी हो गया है कि इस बार युवा संसद देश की संसद के सेंट्रल हॉल में हो रही है। ये सेंट्रल हॉल हमारे संविधान के निर्माण का गवाह है। मोदी ने कहा कि स्वामी जी की प्ररेणा ने आज़ादी की लड़ाई को नई ऊर्जा दी थी। गुलामी के लंबे कालखंड ने भारत को हज़ारों वर्षों की अपनी ताकत और ताकत के एहसास से दूर कर दिया था। स्वामी विवेकानंद जी ने भारत को उसकी वो ताकत याद दिलाई और एहसास कराया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने एक और अनमोल उपहार दिया है। ये उपहार है, व्यक्तियों के निर्माण का, संस्थाओं के निर्माण का। इसकी चर्चा बहुत कम ही हो पाती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग स्वामी जी के प्रभाव में आते हैं, संस्थानों का निर्माण करते हैं, फिर उन संस्थानों से ऐसे लोग निकलते हैं जो स्वामी जी के दिखाए मार्ग पर चलते हुए नए लोगों को जोड़ते चलते हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति बेहतर व्यक्तियों के विकास और बेहतर व्यक्तियों से देश बनाने पर केंद्रित है। यह नीति हमारे युवाओं की समझ, उनके निर्णयों और उनके विश्वासों को प्राथमिकता देती है। स्वामी जी कहते थे, पुराने धर्मों के मुताबिक नास्तिक वो है जो ईश्वर में भरोसा नहीं करता। लेकिन नया धर्म कहता है, नास्तिक वो है जो खुद में भरोसा नहीं करता। ये स्वामी जी ही थे, जिन्होंने उस दौर में कहा था कि निडर, बेबाक, साफ दिल वाले, साहसी और आकांक्षी युवा ही वो नींव है जिस पर राष्ट्र के भविष्य का निर्माण होता है। वो युवाओं पर, युवा शक्ति पर इतना विश्वास करते थे। हमारा युवा खुलकर अपनी प्रतिभा और अपने सपनों के अनुसार खुद को विकसित कर सके इसके लिए आज एक environment और इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था हो, सामाजिक व्यवस्था हो या कानूनी बारीकियां, हर चीज में इन बातों को केंद्र में रखा जा रहा है। इस कार्यक्रम में लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू और केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल मौजूद रहें। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले देश में ये धारणा बन गई थी कि अगर कोई युवक राजनीति की तरफ रुख करता था तो घर वाले कहते थे कि बच्चा बिगड़ रहा है। क्योंकि राजनीति का मतलब ही बन गया था- झगड़ा, फसाद, लूट-खसोट, भ्रष्टाचार। लोग कहते थे कि सब कुछ बदल सकता है लेकिन सियासत नहीं बदल सकती। लेकिन आज राजनीति में ईमानदार लोगों को भी मौका मिल रहा है। Honesty और Performance आज की राजनीति की पहली अनिवार्य शर्त होती जा रही है। भ्रष्टाचार जिनकी legacy थी, उनका भ्रष्टाचार ही आज उन पर बोझ बन गया है। वो लाख कोशिशों के बाद भी इससे उभर नहीं पा रहे हैं।

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मोदी ने दावा किया कि भाई-भतीजावाद की राजनीति अपने आखिरी दिनों को देख रही है। हालांकि यह पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। अभी भी ऐसे लोग हैं जो केवल राजनीति में अपने परिवार के रुख को बचाने के लिए राजनीति करना चाहते हैं। इस तरह की राजनीति में नेशन फर्स्ट दूसरे नंबर पर रहता है और माय फैमिली एंड माय बेनिफिट्स को अपनी पहली प्राथमिकता के रूप में रखती है। भारत के युवाओं को परिवार-आधारित राजनीति की इस प्रथा को समाप्त करने के लिए राजनीति में प्रवेश करने की आवश्यकता है। हमारी लोकतांत्रिक प्रथाओं को बचाना महत्वपूर्ण है। युवाओं को सेंट्रल हॉल तक पहुंचने की जरूरत है और भविष्य में राष्ट्र का नेतृत्व करने के लिए हमें अपना अगला गेन तैयार करना होगा।





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विण्डवा आश्रम पर हुई महापंचायत, हरिगिरी महाराज बोले प्रदेश में होना चाहिए शराबबंदी

  •  दिनेश शुक्ल
  •  फरवरी 26, 2021   23:35
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विण्डवा आश्रम पर हुई महापंचायत, हरिगिरी महाराज बोले प्रदेश में होना चाहिए शराबबंदी

महापंचायत में मौजूद लोगों ने भी महाराज की बात का समर्थन करते हुए शराबबंदी लागू होने की बात कही। उधर महापंचायत में दहेजबंदी का भी मुद्दा उठा। महाराज ने लोगों का इस सामाजिक बुराई से दूर रहने का आव्हान किया।

मुरैना। मध्य प्रदेश में शराबबंदी को लेकर लंबे समय से अपनी आवाज बुलंद किए प्रसिद्ध संत हरिगिरी महाराज के आश्रम पर आज महापंचायत हुई। महापंचायत में कई गांवों के हजारों लोग पहुंचे। इस अवसर पर हरिगिरी महाराज ने पूरी तरह से प्रदेश में शराबबंदी करने की मांग सरकार से की है। वहां उपस्थित ग्रामीणों ने भी महाराज की मांग का समर्थन किया है। 

 

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चंबल किनारे विण्डवा घाट पर स्थित आश्रम पर शुक्रवार को महापंचायत हुई। महापंचायत में साधू संतों सहित भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। महापंचायत में हरिगिरी महाराज ने शराब बंदी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई घरों को बर्बाद करने वाली शराब बंद होनी चाहिए उन्होंने उपस्थित लोगों से शराब का सेवन व बिक्री न करने देने का संकल्प दिलवाया। यहां मंच से सभी ने एक स्वर में कहा कि अगर प्रदेश सरकार शराबबंदी लागू नहीं करेगी तो मुरैना से भोपाल तक की पैदल यात्रा निकाली जाएगी।

 

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महापंचायत में मौजूद लोगों ने भी महाराज की बात का समर्थन करते हुए शराबबंदी लागू होने की बात कही। उधर महापंचायत में दहेजबंदी का भी मुद्दा उठा। महाराज ने लोगों का इस सामाजिक बुराई से दूर रहने का आव्हान किया। गौरतलब है कि हरिगिरी महाराज के शिष्यों ने ग्वालियर स्थित शीतला माता मंदिर से चंबल किनारे विण्डवा आश्रम तक पैदल यात्रा भी निकाली थी। पैदल यात्रा के दौरान साधू संतों ने शराब का सेवन एवं बिक्री न करने का संदेश आमजन को दिया था। 





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जीएसटी के खिलाफ कैट के भारत व्यापार बंद का मध्य प्रदेश में भी रहा असर

  •  दिनेश शुक्ल
  •  फरवरी 26, 2021   23:25
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जीएसटी के खिलाफ कैट के भारत व्यापार बंद का मध्य प्रदेश में भी रहा असर

व्यापारी न तो सड़कों पर आए और न ही उन्होंने कारोबार किया। बंद को 35 से ज्यादा संगठनों का हमें सहयोग भी मिला। वहीं, कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश सचिव विवेक साहू ने कहा कि कंफेडरेशन की नागपुर में हुई बैठक के बाद इस बंद को आयोजित किया गया।

भोपाल। राजधानी भोपाल में कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) और भोपाल किराना व्यापारी महासंघ द्वारा जीएसटी के प्रावधानों के विरोध में बंद रखा गया। हालांकि बंद स्वैच्छिक रहा, लेकिन इसका असर प्रदेश के पुराने बाजारों के साथ खास तौर पर थोक किराना व्यापार पर नजर आया। भोपाल में थोक किराना समेत कई प्रमुख मार्केट बंद रहे। इसके चलते करीब 300 करोड़ के कारोबार के  नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

 

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पुराने भोपाल शहर के जुमेराती बाजार में शुक्रवार को सुबह से ही बंद का असर दिखाई दिया। यहां सभी व्यापारियों ने अपनी दुकानें नहीं खोलीं। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महासचिव अनुपम अग्रवाल ने बताया कि हम चाहते हैं कि जीएसटी के कुछ प्रावधानों में बदलाव हो। उन्होंने कहा कि बंद पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा। व्यापारी न तो सड़कों पर आए और न ही उन्होंने कारोबार किया। बंद को 35 से ज्यादा संगठनों का हमें सहयोग भी मिला।

 

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वहीं, कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश सचिव विवेक साहू ने कहा कि कंफेडरेशन की नागपुर में हुई बैठक के बाद इस बंद को आयोजित किया गया। अधिकांश यूनियन इस बंद के समर्थन में हैं। देश के 8 करोड़ व्यापारी एवं 40,000 से अधिक व्यापारी संगठनो ने जीएसटी की विसंगतियों के खिलाफ भारत व्यापार बंद को अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर सफल बनाया। वही मध्य प्रदेश के भोपाल, जबलपुर, उज्जैन, सतना, नीमच रीवा, सागर, ग्वालियर, विदिशा सहित अनेक जिलों में भारत व्यापार बंद सार्थक रहा।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


वन कर्मचारियों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर जेसीबी छुड़ा ले गया माफिया

  •  दिनेश शुक्ल
  •  फरवरी 26, 2021   22:57
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वन कर्मचारियों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर जेसीबी छुड़ा ले गया माफिया

बताया गया है कि वन विभाग के दल ने मगर कुण्डा पहुंचकर ऑपरेटर सहित जेसीबी को अपने कब्जे में ले लिया, लेकिन इसी दौरान झाडिय़ों में छिपे बैठे करीब 15-16 लोगों ने बंदूकों और कट्टों से वन कर्मचारियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। खनन माफिया ने लगभग 15 से 20 राउण्ड गोलियां चलाईं।

ग्वालियर। मध्य प्रदेश में ग्वालियर के आरक्षित और संरक्षित वन क्षेत्रों में सक्रिय खनन माफिया अब मरने-मारने पर उतारू हो गए हैं। वे हर कीतम पर जंगलों से कीमती फर्शी पत्थर निकालकर ले जाना चाहते हैं। मैदानी वन कर्मचारी उन्हें जब भी रोकने का प्रयास करते हैं तो खनन माफिया न केवल पथराव करते हैं बल्कि गोलियां भी चलाते हैं। इसी क्रम में गुरुवार-शुक्रवार की रात में सोनचिरैया अभयारण्य की तिघरा गेमरेंज के अंतर्गत कालाखेत के जंगल में अवैध खनन रोकने पहुंचे वन कर्मचारियों पर खनन माफिया ने ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं और मौसे से ऑपरेटर सहित जेसीबी को छुड़ाकर ले गए। कालाखेत के जंगल में फरवरी माह में ही यह तीसरा मौका है, जब खनन माफिया ने वन कर्मचारियों पर जानलेवा हमला किया है। इससे पहले खनन माफिया वन कर्मचारियों पर दो बार हमला कर चुके हैं। 

 

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जानकारी के अनुसार बीते गुरुवार को देर रात वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना मिली कि तिघरा गेमरेंज के अंतर्गत कालाखेत के जंगल में कुछ लोग अवैध खनन के उद्देश्य से जेसीबी से नया गड्ढा खोद रहे हैं। इस पर वन परिक्षेत्र अधिकारी विकास मिश्रा के नेतृत्व में 10 से 12 वन कर्मचारियों का एक दल मौके पर भेजा गया। रात करीब 12.30 बजे वन कर्मचारियों का दल कालाखेत के जंगल में स्थित कक्ष क्रमांक 360 में पहुंचा तो वहां जेसीबी की आवाज सुनाई दी। वन कर्मचारी आवाज की दिशा में चलते हुए जब तक मौके पर पहुंचे तो खनन माफिया ने जीसीबी को वहां से कुछ ही दूरी पर स्थित मगर कुण्डा नामक स्थान पर छिपा दिया। इसके बाद जेसीबी को तलाशने के लिए वन कर्मचारी जंगल में सर्चिंग करने लगे। साथ ही मुंडे बाबा वन चौकी से अन्य कर्मचारियों को भी मौके पर बुला लिया, जिनमें एसएएफ के चार सशस्त्र जवान भी शामिल थे।

 

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बताया गया है कि वन विभाग के दल ने मगर कुण्डा पहुंचकर ऑपरेटर सहित जेसीबी को अपने कब्जे में ले लिया, लेकिन इसी दौरान झाडिय़ों में छिपे बैठे करीब 15-16 लोगों ने बंदूकों और कट्टों से वन कर्मचारियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। खनन माफिया ने लगभग 15 से 20 राउण्ड गोलियां चलाईं। चूंकि फायरिंग के दौरान कुछ वन कर्मचारी जेसीबी मशीन के पास मौजूद थे, इसलिए वन कर्मचारियों ने जावाबी फायरिंग नहीं की क्योंकि जवाबी फायरिंग करने से साथी कर्मचारियों को नुकसान पहुंचने की संभावरा थी। इस विपरीत परिस्थिति में वन कर्मचारियों ने पेड़ों की ओट में छिपकर अपनी जान बचाई। इसी मौके का फायदा उठाकर खनन माफिया ऑपरेटर और जेसीबी मशीन को छुड़ाकर प्रयागपुरा गांव में जाकर छिप गए। इस घटना के बाद वन कर्मचारी तिघरा थाने पहुंचे और पूरा घटनाक्रम पुलिस को बताया। इस पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विवेचना प्रारंभ कर दी है।

 

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सूत्रों के अनुसार खनन माफिया जब वन कर्मचारियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे थे। उसी दौरान वन कर्मचारियों के साथ मौजूद एसएएफ के चार जवानों में से एक जवान के हाथ से हड़बड़ाहट में बंदूक (कार्वाइन गन) वहीं कहीं गिर गई। बताया गया है कि घटना के बाद की गई सर्चिंग के दौरान बंदूक जंगल में ही पड़ी मिल गई। हालांकि वन विभाग के किसी अधिकारी ने आधिकारिक रूप से बंदूक गिरने और मिलने के घटनाक्रम की पुष्टि नहीं की है। 





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