Goa Politics। गोवा के चुनावी दंगल में कौन-सी पार्टी का होगा मंगल

Goa Politics। गोवा के चुनावी दंगल में कौन-सी पार्टी का होगा मंगल

1980 में स्थापित हुई भाजपा फिलहाल गोवा की सबसे बड़ी पार्टी है और सत्ता में भी है। गोवा जैसे छोटे राज्य में भाजपा का संघर्ष स्थापना के साथ ही जारी रहा। हालांकि पार्टी को सत्ता का स्वाद सबसे पहले 2000 में चखने को मिला जब मनोहर पर्रिकर मुख्यमंत्री बने।

गोवा में विधानसभा चुनाव होने है। सभी पार्टियां अपनी-अपनी तैयारियों को अंजाम देने में जुटी हुई हैं। गोवा के चुनावी दंगल में सभी पार्टियां उतरने के लिए पूरा दमखम लगा रही हैं। कुल मिलाकर देखें तो भले ही क्षेत्रफल और सीट के हिसाब से गोवा बेहद ही छोटा प्रदेश है लेकिन सभी राजनीतिक दलों के लिए यह हमेशा आकर्षण का केंद्र रहा है। गोवा में राष्ट्रीय पार्टियों का भी दखल है तो क्षेत्रीय पार्टियों का भी अपना दबदबा है। यही कारण है कि ज्यादातर स्थिति में गोवा में हमने गठबंधन की राजनीति को देखा है। 2022 में भी देखें तो यहां का चुनाव दिलचस्प होने वाला है क्योंकि सत्तारूढ़ भाजपा का मुकाबला कांग्रेस के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के साथ है। हालांकि, गोवा फॉरवार्ड पार्टी और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी को भी कम नहीं आंका जा सकता है। चलिए हम आपको इसी बारे में बताते हैं कि गोवा चुनाव में कौन-कौन से पार्टियां अपनी किस्मत आजमाने के लिए उतरने वाली है। 

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भाजपा

1980 में स्थापित हुई भाजपा फिलहाल गोवा की सबसे बड़ी पार्टी है और सत्ता में भी है। गोवा जैसे छोटे राज्य में भाजपा का संघर्ष स्थापना के साथ ही जारी रहा। हालांकि पार्टी को सत्ता का स्वाद सबसे पहले 2000 में चखने को मिला जब मनोहर पर्रिकर मुख्यमंत्री बने। मनोहर पर्रिकर के दम पर भाजपा 2000 से 2005 तक सत्ता में रही। उसके बाद उसे एक बार फिर से 2012 में चुनावी जीत मिली। मनोहर पर्रिकर के रक्षा मंत्री बनने के बाद लक्ष्मीकांत पारसेकर को राज्य का कमान पार्टी की ओर से सौंपा गया। 2017 के चुनाव में पार्टी को उम्मीद के अनुरूप सफलता तो नहीं मिली लेकिन गठबंधन की वजह से मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में गोवा में एक बार फिर से भाजपा ने सरकार बनाने में कामयाबी हासिल की। मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद प्रमोद सावंत को गोवा की कमान पार्टी की ओर से सौंपी गई है। युवा मुख्यमंत्री के तौर पर लोगों में उनकी भी अच्छी पहचान है। वर्तमान में 40 में से भाजपा के पास 25 सीटें है। 

कांग्रेस

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का भी गोवा में अपना दबदबा रहा है। गोवा जब केंद्र शासित प्रदेश था या फिर जब राज्य बना, तब भी कांग्रेस दबदबा देखने को मिला। सबसे पहले प्रताप सिंह राणे के नेतृत्व में कांग्रेस ने यहां पर 1980 में अपनी सरकार बनाई थी। इसके बाद गोवा पूर्ण प्रदेश बना। 5वीं विधानसभा में भी प्रताप सिंह राणे के ही नेतृत्व में कांग्रेस ने सफलता हासिल की। कांग्रेस ने गोवा में काफी लंबे समय तक शासन किया है। विल्फ्रेड डिसूजा और दिगंबर कामत ने भी गोवा में कांग्रेस सरकार का नेतृत्व किया है। 2017 के चुनाव में कांग्रेस गोवा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन सरकार बनाने से चूक गई। हालांकि उसकी कई सारे विधायकों ने पार्टी का दामन छोड़ दिया और भाजपा में शामिल हो गए। वर्तमान में देखें तो कांग्रेस के पास गोवा में सिर्फ दो विधायक हैं। ऐसे में इस बार के चुनाव में पार्टी अपना दबदबा जारी रखने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रही है। 

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तृणमूल कांग्रेस

पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस गोवा विधानसभा चुनाव में इस बार दमखम लगाने की तैयारी में है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अपना विस्तार करने की कोशिश में है और इसी कड़ी में वह गोवा विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी में है। ममता बनर्जी लगातार राज्य का दौरा कर रही हैं। गोवा में कई दिग्गजों को पार्टी में शामिल कराया जा चुका है। कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री रहे लुइजिन्हो मलेरिया भी तृणमूल में शामिल हो चुके हैं। इसके अलावा गोवा में एनसीपी के एकमात्र विधायक चर्चिल अलेमाओ भी तृणमूल में शामिल हो गए हैं। जाहिर सी बात है कि तृणमूल कांग्रेस मनोवैज्ञानिक बढ़त के साथ गोवा में चुनावी दंगल में उतरने की कोशिश में है। 

आम आदमी पार्टी

अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी भी गोवा के चुनावी मैदान में एक बार फिर से अपनी किस्मत आजमाने के लिए उतरने वाले हैं। 2017 के चुनावी मैदान में भी आम आदमी पार्टी ने गोवा में हाथ जरूर आजमाया था लेकिन सफलता नहीं मिल पाई थी। ऐसे में इस बार आम आदमी पार्टी को गोवा से काफी उम्मीदें हैं। गोवा में आम आदमी पार्टी पूरी दमखम के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है और खुद अरविंद केजरीवाल लगातार राज्य का दौरा कर रहे हैं। 

महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी

पुर्तगाली शासन के खात्मे के बाद महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी ने सबसे पहले गोवा में सत्ता में आई। पार्टी का सबसे ज्यादा आधार एक गैर ब्राह्मण हिंदुओं के बीच है। दीपक धवलीकर फिलहाल इसके अध्यक्ष हैं। 1979 के बाद से पार्टी का दबदबा गोवा में कम होने लगा। एनजीपी ने 1994 में भाजपा के साथ गठबंधन किया। हालांकि, भाजपा के उदय के साथ ही पार्टी को नुकसान होने लगा। 2017 में भाजपा को सत्ता में लाने में एमजीपी ने काफी अहम भूमिका निभाई। लेकिन अब यह दोनों पार्टियां अलग हो चुकी हैं। एमजीपी फिलहाल तृणमूल के साथ गठबंधन कर चुनाव में उतरने जा रही हैं। 

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गोवा फॉरवर्ड पार्टी

गोवा फॉरवर्ड पार्टी एक क्षेत्रीय पार्टी है जिसका गोवा की राजनीति में काफी हस्तक्षेप रहता है। उसका नेतृत्व विजय सरदेसाई कर रहे हैं। 2017 के चुनाव में 4 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था जबकि 3 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। 2017 में भाजपा सरकार बनाने में इस पार्टी ने अहम भूमिका निभाई। इस बार गोवा फॉरवर्ड पार्टी और कांग्रेस एक साथ चुनाव मैदान में उतरने जा रही है।





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