वाराणसी के ‘डोम राजा’ जगदीश चौधरी का निधन, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने शोक जताया

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अगस्त 26, 2020   09:17
वाराणसी के ‘डोम राजा’ जगदीश चौधरी का निधन, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने शोक जताया

वाराणसी से प्रधानमंत्री मोदी ने जब साल 2019 के चुनाव में अपना नामांकन पत्र भरा था, तब जगदीश चौधरी उनके प्रस्तावकों में एक थे। मनुष्य के अंतिम संस्कार के दौरान डोम बिरादरी की प्रमुख भूमिका होती है। बिहार और उत्तर प्रदेश में इस बिरादरी के मुखिया को ‘डोम राजा’ कहकर बुलाया जाता है।

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वाराणसी के ‘‘डोम राजा’’ जगदीश चौधरी के निधन पर गहरा शोक प्रकट करते हुए उन्हें सनातन परंपरा का संवाहक बताया। काशी के ‘डोम राजा’ जगदीश चौधरी का मंगलवार सुबह वाराणसी के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 55 वर्ष के थे। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा, ‘‘वाराणसी के डोम राजा जगदीश चौधरी जी के निधन से अत्यंत दुख पहुंचा है। वह काशी की संस्कृति में रचे-बसे थे और वहां की सनातन परंपरा के संवाहक रहे।’’ मोदी ने कहा, ‘‘उन्होंने जीवनपर्यंत सामाजिक समरसता के लिए काम किया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और परिजनों को इस पीड़ा को सहने की शक्ति दे।’’

वाराणसी से प्रधानमंत्री मोदी ने जब साल 2019 के चुनाव में अपना नामांकन पत्र भरा था, तब जगदीश चौधरी उनके प्रस्तावकों में एक थे। मनुष्य के अंतिम संस्कार के दौरान डोम बिरादरी की प्रमुख भूमिका होती है। बिहार और उत्तर प्रदेश में इस बिरादरी के मुखिया को ‘डोम राजा’ कहकर बुलाया जाता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘डोम राजा’ चौधरी के निधन पर संवेदना जताते हुए कहा कि वह भगवान विश्वनाथ के सच्चे उपासक थे। शाह ने कहा कि काशी के डोम राजा का पद भारतीय संस्कृति में व्याप्त विविधता, व्यापकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। 

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उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘डोम राजा सनातन संस्कृति की सबसे अभिन्न कड़ी हैं जो अपनी अग्नि से लोगों को मोक्ष का द्वार दिखाते हैं। बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना है कि डोम राजा जगदीश चौधरी जी को अपने श्री चरणों में स्थान दें और उनके परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति शांति शांति।’’ मंत्री ने कहा, ‘‘बाबा विश्वनाथ के ऐसे सच्चे उपासक का देहांत अत्यंत दुःखद है। उनका निधन सनातन परंपरा और भारतीय समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।





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