सार्वजनिक जीवन की पाठशाला थे अटल बिहारी वाजपेयी: राष्ट्रपति कोविंद

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Feb 12 2019 12:37PM
सार्वजनिक जीवन की पाठशाला थे अटल बिहारी वाजपेयी: राष्ट्रपति कोविंद
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उन्होंने कहा कि वाजपेयी सार्वजनिक जीवन की पाठशाला थे और उनसे सार्वजनिक जीवन के बारे में काफी कुछ सीखा जा सकता है। अटलजी एक ओजस्वी वक्ता थे लेकिन उनका मौन भी उतना ही मुखर और प्रभावी था।

नयी दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आदमकद तैलचित्र का अनावरण किया और कहा कि वाजपेयी सार्वजनिक जीवन की पाठशाला थे जिन्होंने दलगत राजनीति के बीच स्वयं को सदा संकीर्णता से ऊपर रखा और राष्ट्रसेवा के भाव से काम किया। संसद के केंद्रीय कक्ष में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘भारतीय राजनीति के महानायकों में अटल जी को हमेशा याद किया जाएगा। राजनीति में विजय और पराजय को स्वीकार करने में जिस सहजता और गरिमा का परिचय उन्होंने दिया है, वह अनुकरणीय है। वे विपरीत परिस्थितियों में धैर्य की मिसाल थे।’’

 


उन्होंने कहा कि वाजपेयी सार्वजनिक जीवन की पाठशाला थे और उनसे सार्वजनिक जीवन के बारे में काफी कुछ सीखा जा सकता है। अटलजी एक ओजस्वी वक्ता थे लेकिन उनका मौन भी उतना ही मुखर और प्रभावी था। कोविंद ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि वाजपेयी के मौन में भी संवाद और आत्मीयता का भाव था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में वाजपेयी ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निर्णायक नेतृत्व प्रदान किया। पोखरण में 1998 का परमाणु परीक्षण और 1999 का कारगिल युद्ध, राष्ट्र-हित में लिए गए उनके दृढ़तापूर्ण निर्णयों के उदाहरण हैं। 
 
 
राष्ट्रपति ने कहा कि देश की नदियों और जल-संसाधनों के उपयोग के लिए पहल करना, स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के माध्यम से पूरे राष्ट्र को जोड़ने में सुगमता प्रदान करना, आवास निर्माण को प्रोत्साहन देकर साधारण आय-वर्ग के लोगों के लिए घर सुलभ कराना, आईटी और टेलीकॉम क्षेत्रों में तेज गति से विकास कराना तथा बहादुर जवानों, मेहनती किसानों और निष्ठावान वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाएँ लागू करने के संदर्भ में उनका बहुत योगदान रहा। कोविंद ने कहा, ‘‘पूरे विश्व में भारत को शांतिप्रिय परंतु शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठित कराने में अटल जी ने बहुमूल्य योगदान दिया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ संसद के सेन्ट्रल हॉल में देश की अन्य विभूतियों के चित्रों के साथ अटल जी के चित्र को स्थान देने के निर्णय के लिए मैं दोनों सदनों के सांसदों की बहुदलीय ‘पोर्ट्रेट कमिटी’ के सभी सदस्यों को साधुवाद व बधाई देता हूँ।’’ 
 


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