तीन हफ्तों में ऑक्सफोर्ड की कोविड-19 वैक्सीन बनाना शुरू करेगा पुणे का सेरम इंस्टीट्यूट

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अप्रैल 26, 2020   19:02
तीन हफ्तों में ऑक्सफोर्ड की कोविड-19 वैक्सीन बनाना शुरू करेगा पुणे का सेरम इंस्टीट्यूट

सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पहले भी ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ मलेरिया टीका परियोजना पर काम कर चुकी है। पूनावाला ने कहा, ‘‘हमें कोविड-19 टीके के सितंबर-अक्टूबर तक बाजार में आ जाने की उम्मीद है, बशर्ते कि टीके का परीक्षण आवश्यक सुरक्षा व पर्याप्त प्रभाव के साथ सफल हो जाये।

नयी दिल्ली। टीके बनाने वाली कंपनी सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने रविवार को कहा कि यदि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कोविड-19 टीके की उसकी दो से तीन सप्ताह में उत्पादन शुरू करने की योजना है औद यदि इसका मानव पर परीक्षण सफल रहा तो अक्टूबर तक यह टीका बाजार में आ जाने की उम्मीद है। पुणे स्थित कंपनी सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया उन सात वैश्विक कंपनियों में शामिल है, जिसके साथ ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने टीके के उत्पादन के लिये साझेदारी की है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला ने कहा, ‘‘हमारी टीम ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के डॉ हिल के साथ मिलकर करीबी से काम कर रही है। हमें अगले दो से तीन सप्ताह में इसका उत्पादन शुरू कर देने की उम्मीद है। पहले छह महीने उत्पादन की क्षमता प्रति माह पचास लाख खुराक की रहेगी। इसके बाद हमें उत्पादन बढ़ाकर प्रति माह एक करोड़ खुराक कर लेने की उम्मीद है।’’

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सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पहले भी ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ मलेरिया टीका परियोजना पर काम कर चुकी है।  पूनावाला ने कहा, ‘‘हमें कोविड-19 टीके के सितंबर-अक्टूबर तक बाजार में आ जाने की उम्मीद है, बशर्ते कि टीके का परीक्षण आवश्यक सुरक्षा व पर्याप्त प्रभाव के साथ सफल हो जाये। हम अगले दो से तीन सप्ताह में इस टीके का परीक्षण भारत में शुरू कर देंगे।’’ कंपनी ने कहा कि भारत में इस टीके का परीक्षण शुरू करने के लिये आवश्यक मंजूरियां लेने की प्रक्रिया चल रही है।

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पूनावाला ने कहा, ‘‘मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए हमने इस प्रयास को खुद से वित्तपोषित किया है। हमें उम्मीद है कि उत्पादन बढ़ाने में हमें अन्य साझेदारों से भी सहयोग मिलेगा।’’ उन्होंने कहा कि टीके का विनिर्माण पुणे स्थित संयंत्र में किया जायेगा। कोविड-19 के टीके बनाने के लिये यदि अलग से संयंत्र बनाया जाये तो इसमें करीब दो से तीन साल लग जायेंगे। उन्होंने कहा कि कंपनी इस टीके का पेटेंट नहीं करायेगी और इसे न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर की कंपनियों के लिये उत्पादन व बिक्री करने के लिये उपलब्ध करायेगी। उन्होंने कहा कि जो कोई भी इसका टीका विकसित करेगा, उसे टीके के विनिर्माण के लिये कई साझेदारों की जरूरत पड़ेगी।





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