प्रधानमंत्री मोदी की बगल वाली सीट हासिल करने में कामयाब रहे राजनाथ

By अंकित सिंह | Publish Date: Jun 17 2019 4:28PM
प्रधानमंत्री मोदी की बगल वाली सीट हासिल करने में कामयाब रहे राजनाथ
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मोदी सरकार पार्ट-1 में भी राजनाथ नंबर दो थे पर चलती अरुण जेटली की थी। सूत्र यह भी बताते है कि जेटली की दखल राजनाथ को परेशान तो करती थी पर वह खामोश रहना बेहतर समझते थे।

कुछ दिन पहले तक सत्ता के गलियारे में जो सबसे बड़ा सवाल था वह यही था कि संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बगल वाली सीट पर कौन बैठेगा? मोदी सरकार पार्ट-1 में गृह मंत्री के नाते राजनाथ सिंह इस सीट पर बैठा करते थे। इससे पहले भी यही देखा गया था कि जो गृह मंत्री होता वही प्रधानमंत्री के बगल वाली सीट पर बैठता है। मनमोहन सिंह की सरकार में भी ऐसा ही देखने को मिला था जब गृह मंत्री के नाते पी. चिदंबरम प्रधानमंत्री के बगल में बैठते थे पर सदन के नेता प्रणब मुखर्जी थे और वह वरिष्ठ भी थे। गृह मंत्री होने के नाते अटल बिहारी वाजपेयी के बगल में लाल कृष्ण आडवाणी भी बैठते थे। 



 
हालिया परिदृश्य को देखते हुए भी यही कहा जा रहा था कि अमित शाह ही मोदी की बगल वाली सीट पर बैठेंगे। इस कयास को बल इसलिए भी मिल रहा था क्योंकि अमित शाह मोदी के बेहद करीबी हैं और इन्ही के पार्टी अध्यक्ष रहते भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की है। एक और घटना जो इस संभावना को और प्रबल भी कर रही थी वह यह थी कि पहले सरकार ने मंत्रिमंडल की जिन आठ समितियों का गठन किया था उन सभी में गृह मंत्री अमित शाह शामिल थे। राजनाथ सिंह को सिर्फ दो समितियों में ही शामिल किया गया। हालांकि अगले ही दिन सरकार ने अपना फैसला पलटते हुए राजनाथ सिंह को छह अहम समितियों में शामिल किया और एक का अध्यक्ष भी बनाया। लेकिन यह बताने के लिए साफ था कि राजनाथ का कद घट गया है और शायद वह नंबर दो की भूमिका में ना रहें। हां, राजनाथ के पक्ष में सिर्फ एक ही बात जा रही थी और वह थी मोदी के बाद उन्होंने शपथ लिया था। एक और बात जो राजनाथ के लिए अच्छी थी कि उन्हें लोकसभा का उपनेता बनाया गया यानि कि मोदी के बाद उन्ही का लोकसभा में नंबर है। 


सबसे पहले तो हम आपको यह बता देते है कि सदन में किसकी सीट कहां है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ठीक प्रधानमंत्री मोदी की बगल वाली सीट पर बैठेंगे। सुषमा स्वराज की सीट पर अमित शाह बैठेंगे तो लालकृष्ण आडवाणी की सीट पर नितिन गडकरी दिखाई देंगे। राजनाथ सिंह को जैसे ही रक्षा मंत्री बनाया गया, यह चर्चा आम हो गई की उनका कद घटा दिया गया और समितियों में शामिल नाम जैसे ही बाहर आया इस बात को और ज्यादा कहा जाने लगा। सवाल राजनाथ के कद का था। सूत्रों कि माने तो यह भी कहा जा रहा था कि राजनाथ खुद को हाशिए पर देख संघ की तरफ रूख किया और इसका इनाम भी उन्हें मिला। अब सवाल यह उठ रहा है कि राजनाथ का आगे क्या होगा? जानकार बताते है कि संघ की दखल के बाद राजनाथ सार्वजनिक तौर पर तो नंबर दो बनने में कामयाब रहे पर नीतिगत मामलों में इनकी दखल रहेगी। सरकार में इनकी कितनी चलेगी इस पर लोगों को संशय है।


मोदी सरकार पार्ट-1 में भी राजनाथ नंबर दो थे पर चलती अरुण जेटली की थी। सूत्र यह भी बताते है कि जेटली की दखल राजनाथ को परेशान तो करती थी पर वह खामोश रहना बेहतर समझते थे। पर इस दफा राजनाथ शुरू में ही अपने कद को लेकर सतर्क नजर आ रहे है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी इस बात को जानते है कि राजनाथ जातीय समीकरण के हिसाब से फीट बैठते हैं और किसान नेता के तौर पर भी पहचान रखते है। ऐसे में राजनाथ जरूरी होने के साथ-साथ उनका राजनीतिक अनुभव विपक्ष को साधने में सरकार की मदद कर सकती है। 
 

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