चुनावी खेती के लिए राम रहीम तैयार, सरकार की हामी का इंतजार

By अभिनय आकाश | Publish Date: Jun 25 2019 6:31PM
चुनावी खेती के लिए राम रहीम तैयार, सरकार की हामी का इंतजार
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हरियाणा में चुनाव का मौसम आने वाला है और चुनावी मौसम में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर चर्चा में है। हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राम रहीम को बाहर लाने की कोशिशें परवान चढ़ती दिख रही हैं और इन कोशिशों में हरियाणा सरकार की भी मौन सहमति दिख रही है।

बलात्कार और हत्या के आरोप में जेल की सलाखों में अपनी जिंदगी गुजारता राम रहीम जेल से बाहर आने को बेताब नजर आ रहा है। राम रहीम ने खेती बाड़ी करने के लिए पैरोल मांगी है। हरियाणा सरकार इस पैरोल को मंजूरी देने का मन भी बना रही है और इसके पीछे राम रहीम के अच्छे आचरण को आधार बता रही है। हालांकि राम रहीम की रिहाई को इस साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। विपक्ष इस मेहरबानी पर सवाल भी उठा रहा है। बता दें कि राम रहीम को साल 2017 में रेप केस में बीस साल की सजा मिली थी और इस साल उसे पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या में उम्र कैद की सजा हुई है। 

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हरियाणा में चुनाव का मौसम आने वाला है और चुनावी मौसम में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर चर्चा में है। हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राम रहीम को बाहर लाने की कोशिशें परवान चढ़ती दिख रही हैं और इन कोशिशों में हरियाणा सरकार की भी मौन सहमति दिख रही है। हरियाणा की सत्ता पर काबिज खट्टर सरकार के एक नहीं दो-दो मंत्री राम रहीम के पैरोल की पैरवी करने में लग गए हैं। दो साध्वियों से रेप के दोषी राम रहीम ने खेती करने के लिए 42 दिन के परोल की गुजारिश की है। जेल मैनुअल के मुताबिक दो साल की सजा पूरी करने के बाद ही किसी कैदी को पैरोल मिल सकती है। लेकिन गुरमीत राम रहीम ने जेल में दो साल बिताने से पहले ही पैरोल के लिए अर्जी दे दी है। इस अर्जी को रोहतक जेल की सुपरिटेंडेंट ने मंजूर भी कर लिया है। जो बताने के लिए काफी है कि बलात्कारी बाबा भले ही जेल में बंद हो लेकिन उसका दबदबा आज भी कायम है। 
बलात्कारी बाबा जेल से बाहर आने के लिए बेताब है तो हरियाणा सरकार उसे वापस डेरा में पहुंचाने के लिए बेताब है। हरियाणा सरकार के जेल मंत्री कृष्णा पवार खुलेआम एक रेपिस्ट के अच्छे आचरण की दुहाई दे रहे हैं। इसके साथ ही स्‍वास्‍थ्‍य व खेल मंत्री अनिल विज ने भी गुरमीत राम रहीम को पैरोल दिए जाने का समर्थन किया है। हरियाणा के गृह सचिव ने कहा है कि गुरमीत राम रहीम की अर्जी पर अभी विचार किया जा रहा है। वहीं इस मामले के सुर्खियों में आने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राम रहीम के पैरोल मामले पर पर कहा कि अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि राम रहीम के पैरोल आवेदन पर अभी जिला आयुक्त और पुलिस अधीक्षक को फैसला करना है, उसके बाद मामला राज्य सरकार के सामने आएगा और राज्य सरकार प्रदेश के हित्त को ध्यान में रखते हुए इस पर फैसला करेगी। हालांकि दूसरी तरफ सिरसा के तहसीलदार ने रिपोर्ट में बताया है कि डेरे के पास कुल 250 एकड़ भूमि है। इसमें कहीं भी राम रहीम मालिक या काश्तकार नहीं है। सारी भूमि डेरा सच्चा सौदा ट्रस्ट के ही नाम है। इसी वजह से प्रशासन की नजर में पैरोल का आधार नहीं बन रहा है। 
गौरतलब है कि जनवरी में सीबीआई की विशेष अदालत ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम समेत चार लोगों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जज जगदीप सिंह की अदालत ने फैसला सुनाया था कि राम रहीम की यह सजा साध्वी यौन शोषण मामले की 20 वर्ष की सजा पूरी होने के बाद शुरू होगी। सभी दोषियों पर 50 हजार जुर्माना भी लगाया गया था। ऐसे में विधानसभा चुनाव से ठीक कुछ ही महीने पहले राम रहीम के बाहर आने की अटकलों और कोशिशों के पीछे सियासत की भी भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है। याद करें कि साल 2014 में हरियाणा विधानसभा चुनाव में सुषमा स्वराज और कैलाश विजयवर्गीय 40 से अधिक उम्मीदवारों के साथ राम रहीम का आशीर्वाद लेने डेरा पहुंचे थे। इसके अलावा अमित शाह ने भी डेरा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी साल 2014 में चुनावी प्रचार के दौरान डेरा सच्चा सौदा के सामाजिक कार्यों की जमकर तरीफ की थी। राम रहीम का हरियाणा के नौ जिलों की करीब तीन दर्जन विधानसभा सीटों पर अच्छा खासा प्रभाव माना जाता रहा है। प्रदेश में 20 लाख से 25 लाख उसके अनुयायी बताए जाते हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले उसके जेल से बाहर निकलने के प्रयास को राजनीति से जोड़कर देखा जाना लाजिमी है।



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