योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश धवाला ने सरकार की खनन निति पर सवाल उठाया कहा, मशीनी युग में हाथों से काम नहीं हो सकता

Ramesh Dhawala
मैंने कुछ भी गलत बात नहीं कही। जो बात कही वह हिमाचल के हितों पर कही । लोगों के हित के लिये कहा। हालात बदले हैं। अब पहले जैसे हालात नहीं रहे। उन्होंने कहा कि पहले एक करोड रूपये हर विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिये मिलते थे। लेकिन अब दो सौ करोड रूपये तो मेरे चुनाव क्षेत्र में ही आये हैं

शिमला। हिमाचल प्रदेश योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला ने कहा कि अगर सरकार खनन निति में बदलाव करती है तो प्रदेश को एक हजार करोड रूपये का राजस्व हासिल होगा।  रोजगार के अवसर बढेंगे और भवन निर्माण सामग्री भी सस्ती लोगों को मिलेगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में नदी नालों से रेत बजरी हाथों से नहीं निकाला जा सकता। 

 

अपनी बात रखते हुये धवाला ने कहा, मैंने कुछ भी गलत बात नहीं कही। जो बात कही वह हिमाचल के हितों पर कही । लोगों के हित के लिये कहा। हालात बदले हैं। अब पहले जैसे हालात नहीं रहे। उन्होंने कहा कि पहले एक करोड रूपये हर विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिये मिलते थे। लेकिन अब दो सौ करोड रूपये  तो मेरे चुनाव क्षेत्र में ही आये हैं। यहां दो सौ करोड रूपये के विकास कार्य हो रहे हैं।  यह काम रेत बजरी से ही होंगे।  जब मेटिरियल ही नहीं मिलेगा तो विकास के काम कैसे होंगे। 

इसलिये मैंने कोई बात कही है तो सरकार हमने चलानी है।  अपफसरों जो बात पूछी जाती हैं उसका जवाब वह देंगे। लेकिन जो हमारे अधिकार क्ष्ेत्र की बात है उसका हल हम ही निकालेंगे। लेकिन अगर एक इंस्पेक्टर अगर कहता है कि मैं विधायक से बात नहीं करूंगा तो कितनी बडी तौहीन चुने हुये नुमाईंदो की होती है।

रमेश धवाला ने कहा कि  चालान करने की डयूटी पुलिस की है। कानूनन वह कर सकते हें। लेकिन गलत तरीके से चालान करना सही नहीं है। जब लडके के पास जरूरी कागजात भी थे।  उसके वेट की पर्ची भी थी। गाडी का वनज अंडर वेट था। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने ओवलोड का चालान कर दिया। तंग करने के लिये यह चालान हो रहे हैं। परेशान करने के लिये आज चालान खनन विभाग करेगा तो कल पुलिस करती है। उसने यह बात कही भी लेकिन उसकी गाडी के कागजात झीन लिये गये। 

यह लोकतंत्र है लोकतंत्र लोगों की राय से चलता है। यहां धक्केशाही नहीं होगी। नौकरशाह की नहीं चलने देंगे। यहां भ्रष्टाचार नहीं शिष्टाचार होगा हमारे सामने। भ्रष्टाचार के मामलों के खिलाफ मैं पहले भी था। अब भी हूं। आगे भी रहूंगा।  जो आदमी गलत होगा, उसका विरोध होगा। सरकार हमनें चलानी है।  अगर जनता के चुने हुये प्रतिनिधि जनता का साथ नहीं देंगे तो यह अफसर शाम होते ही सब कुछ बर्बाद कर देंगे।

रमेश धवाला ने कहा कि गाडी का वजन सबको पता होता है।  लेकिन जानबूझकर कहना की गाडी ओवरलोड है। पुलिस का काम रेवन्यू इकठा करना है। लेकिन किसी को बेवजह तंग न करे। चोरी से खनन हो रहा है। ठेकेदारों को रेत बजरी उठाने की अनुमति नहीं मिल रही है।  तो चोरी से निकाला जा रहा है।  गेंती बेलचे हाथों से मशीनरी युग में नदी नालों से रेत बजरी नहीं निकाला जा सकता। आज आधुनिक युग में मशीनरी से होता है। हमने अपनी राय दी है कि लोग परेशान न हों और सरकार को रेवन्यू भी मिले।

उन्होंने कहा कि ठेकेदार व क्रशर मालिक कह रहे है। कि आज हम 350 करोड सरकार को देते हैं अगर अनुमति मिलती है तो हम एक हजार करोड रूपये का रेवन्यू सरकार को देंगे।  कोई चोरी नहीं होगी। अधवाणी में कोई अवैध खनन नहीं हो रहा है। हमारा पौंग डैम जो बनाया गया है वह अगर दो सौ साल के लिये बना है लेकिन यहां सिल्ट जमा हुई तो उसकी उम्र ही घटेगी। लिहाजा अगर सरकार ब्यास नदी के आसापास खनन के लिये शार्ट टर्म परमिट दे; जिससे सभी को लाभ होगा। लोगों को रोजगार मिलेगा। सरकार को राजस्व हासिल होगा।  डैम मं भी सिल्ट जमा नहीं होगी।        

हाथों से नदी नालों से रेत बजरी नहीं उठाया जा सकता।  सरकार ने रोक लगाई तो भवन निर्माण सामग्री भी मंहगी मिलने लगी।  लेकिन मैंने उनसे रेट कम करने की बात भी उनसे की है। जब जेसीबी लगेगी तो खर्च भी कम होगा। जिससे रेत बजरी सस्ती होगी।  जिस चीज की ज्यादा जरूरत होगी व सरकार की सख्ती होगी तो मंहगाई भी बढंती है।

लिहाजा अगर सरकार जेसीबी से रेत बजरी निकालने की अनुमति देती है तो  एक मीटर की गहराई तक खुदाई की अनुमति मिलती है तो वह बजरी के रेट कम कर देंगे।  एक टरैक्टर मालिक कईयों को रोजगार दे रहा है। हमें संसाधन बढाने होंगे ताकि राजस्व मिले। आज हिमाचल प्रदेश में राजस्व की कमी है। यहां कोई कारखाना नहीं है।  टरैक्टर वाले अगर स्टोन क्रशर से माल उठाते हैं तो  वह सरकार को पैसा देंगे। एम फार्म से रायल्टी सरकार को दी जायेगी।

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