'2047 को भारत विकसित देश बनेगा', PM मोदी ने 2001 में आए भूकंप का किया जिक्र, बोले- कच्छ का कायाकल्प रिसर्च का विषय बना

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज कच्छ के विकास से जुड़े 4000 करोड़ रुपए से अधिक के अन्य परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। जिसमें पानी, बिजली, सड़क और डेयरी से जुड़ी परियोजना है। यह गुजरात के कच्छ के विकास के लिए डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

अहमदबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भुज में विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल समेत कई भाजपा पदाधिकारी भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज मन बहुत सारी भावनाओं से भरा हुआ है। भुजियो डूंगर में स्मृति वन मेमोरियल और अंजार में वीर बालक स्मारक का लोकार्पण कच्छ की,गुजरात की पूरे देश की साझी वेदना का प्रतीक है। इनके निर्माण में सिर्फ पसीना ही नहीं, बल्कि कितने ही परिवारों के आंसुओं ने भी इसके ईट, पत्थरों को सींचा है।

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उन्होंने कहा कि आज कच्छ के विकास से जुड़े 4000 करोड़ रुपए से अधिक के अन्य परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। जिसमें पानी, बिजली, सड़क और डेयरी से जुड़ी परियोजना है। यह गुजरात के कच्छ के विकास के लिए डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 26 जनवरी का वो दिन जब कच्छ में भूकंप जब आया था, तब मैं दिल्ली में था। कुछ ही घंटों में मैं दिल्ली से अहमदाबाद पहुंचा और दूसरे दिन मैं कच्छ पहुंच गया। तब मैं मुख्यमंत्री नहीं था, मैं भाजपा का एक साधारण कार्यकर्ता था। मुझे नहीं पता था कि मैं कैसे और कितने लोगों की मदद कर पाऊंगा, लेकिन मैंने तय किया कि मैं इस दुख की घड़ी में आप सभी के बीच में रहूंगा। जो भी संभव होगा, मैं आपके दुख में हाथ बंटाने का प्रयास करूंगा।

उन्होंने कहा कि कच्छ की एक विशेषता तो हमेशा से रही है, जिसकी चर्चा मैं अक्सर करता हूं। यहां रास्ते में चलते-चलते भी कोई व्यक्ति एक सपना बो जाए तो पूरा कच्छ उसको वटवृक्ष बनाने में जुट जाता है। कच्छ के इन्हीं संस्कारों ने हर आशंका, हर आकलन को गलत सिद्ध किया। ऐसा कहने वाले बहुत थे कि अब कच्छ कभी अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाएगा। लेकिन आज कच्छ के लोगों ने यहां की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है।

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भारत 'विकसित देश' बनेगा

सी बीच प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुश्किल भरे उन दिनों में मैंने बड़े आत्मविश्वास से कहा था कि 'हम आपदा को अवसर में बदल के रहेंगे।' मैंने ये भी कहा था कि आपको जो 'रण' दिखता है, मुझे उसमें भारत का 'तोरण' दिखता है। आज मैं लाल किले से कहता हूं कि 2047 को भारत 'विकसित देश' बनेगा।

उन्होंने कहा कि कच्छ के लोगों ने, भुज के लोगों की भुजाओं ने इस पूरे क्षेत्र का कायाकल्प करके दिखाया है। कच्छ का कायाकल्प भारत ही नहीं पूरे विश्व के बड़े शिक्षा संस्थानों और रिसर्च संस्थानों के लिए रिसर्च का विषय है। 2001 में पूरी तरह तबाह होने के बाद कच्छ में जो काम हुआ है, वो अकल्पनीय है। कच्छ में 2003 में क्रांतिगुरू श्यामजी कृष्ण वर्मा यूनवर्सिटी बनी तो वहीं 35 से भी ज्यादा नए कॉलेजों की स्थापना की गई।

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उन्होंने कहा कि 1000 से ज्यादा अच्छे नए स्कूल बनाए गए। भूकंप में कच्छ का जिला अस्पताल पूरी तरह जमींदोज हो गया था लेकिन आज कच्छ में भूकंपविरोधी आधुनिक अस्पताल है। 200 से ज्यादा चिकित्सा केंद्र काम कर रहे हैं। जो कच्छ हमेशा सूखे की चपेट में रहता था, जहां पानी जीवन की सबसे बड़ी चुनौती थी, वहां आज हर जिले में नर्मदा का पानी पहुंचने लगा है।

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