संस्कृत में शपथ लेने वाले सांसद सम्मानित, संस्कृत को सबसे वैज्ञानिक भाषा बताया

By नीरज कुमार दुबे | Publish Date: Jul 16 2019 11:08AM
संस्कृत में शपथ लेने वाले सांसद सम्मानित, संस्कृत को सबसे वैज्ञानिक भाषा बताया
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सम्मानित होने वाले सांसदों में डॉ. हर्षवर्धन और प्रताप चंद सारंगी के अलावा अजय भट्ट, सी.आर. पाटिल, राजेन्द्र अग्रवाल, मीनाक्षी लेखी, दिलीप घोष, पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, छतर सिंह दरबार, सुधीर गुप्ता, गिरीश बापट, सुनील बाबू राव मेंधे और डॉ. सीपी जोशी आदि प्रमुख थे।

संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार में लगे संगठन संस्कृत भारती की ओर से 17वीं लोकसभा के उन 47 सांसदों को सम्मानित किया गया जिन्होंने सदन की सदस्यता की शपथ संस्कृत में ली थी। नयी दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित समारोह में केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को विशेष रूप से सम्मानित किया गया क्योंकि उन्होंने पिछले कार्यकाल में भी संस्कृत में ही सदस्यता की शपथ ली थी। कार्यक्रम को केंद्रीय राज्य मंत्री प्रताप चंद सारंगी ने भी संबोधित किया और आज के परिदृश्य में संस्कृत की महत्ता पर प्रकाश डाला। सम्मानित होने वाले सांसदों में डॉ. हर्षवर्धन और प्रताप चंद सारंगी के अलावा अजय भट्ट, सी.आर. पाटिल, राजेन्द्र अग्रवाल, मीनाक्षी लेखी, दिलीप घोष, पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, छतर सिंह दरबार, सुधीर गुप्ता, गिरीश बापट, सुनील बाबू राव मेंधे और डॉ. सीपी जोशी आदि प्रमुख थे।



कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्कृत भारती के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री श्री दिनेश कामत ने बताया कि पिछली लोकसभा में 34 ऐसे सांसद थे जिन्होंने सदस्यता की शपथ संस्कृत में ली थी लेकिन इस बार यह संख्या बढ़कर 47 हो गयी। उन्होंने संस्कृत भारती की ओर से संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार के लिए चलाये जाने वाले कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण देते हुए कहा कि संस्कृत जैसी सबसे वैज्ञानिक भाषा को किसी धर्म या वर्ग से जोड़कर देखना गलत है। उन्होंने बताया कि किस तरह ईसाई, मुस्लिम आदि भी संस्कृत भारती संस्था में विभिन्न पदों को सुशोभित कर रहे हैं या कर चुके हैं।
कार्यक्रम के बाद विभिन्न सांसदों ने प्रभासाक्षी से बातचीत में कहा कि ऐसा कहना गलत है कि संस्कृत रोजगार की भाषा नहीं है। कई सांसदों ने कहा कि वह सरकार से यह मांग करेंगे कि इस भाषा को और आगे बढ़ाया जाये और इस दिशा में वह खुद भी प्रयास करेंगे। सांसदों ने भी संस्कृत भाषा को धर्म विशेष से जोड़कर देखे जाने वालों को गलत करार दिया।


 
संस्कृत भारती के इस आयोजन में आरएसएस नेता श्री इंद्रेश कुमार के अलावा संस्कृत भारती के दिल्ली प्रांत के पदाधिकारियों सहित संगठन के कई राष्ट्रीय पदाधिकारी, संस्कृत महाविद्यालय के कुलपति, संस्कृत भाषा के अध्यापक और ज्योतिष से जुड़े लोग भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
 

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