पोस्टर लगाने को लेकर आपस में भिड़े शिंदे और उद्धव गुट के शिवसैनिक, हाथापाई की आई नौबत

uddhav shinde
ANI
अंकित सिंह । Aug 02, 2022 10:29PM
आज डोंबिवली में पार्टी की एक शाखा में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के चित्र को लगाने को लेकर दोनों गुटों में जमकर वाकयुद्ध हुआ। स्थिति हाथापाई की भी आ गई थी। वहीं, इससे पहले आज उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे की तस्वीरों को बागी विधायकों के दफ्तरों से हटाने को लेकर भी दोनों गुटों के बीच जमकर वार-पलटवार का दौर देखने को मिला।

महाराष्ट्र की राजनीति लगातार दिलचस्प होती दिखाई दे रही है। कुछ दिन पहले शिवसेना से लगभग 40 विधायकों ने बगावत कर लिया था। बागी विधायकों का नेतृत्व एकनाथ शिंदे ने किया था। भाजपा ने अपना समर्थन देकर महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बना दिया है। इन सबके बीच एकनाथ शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट के बीच लगातार वार-पलटवार का दौर चलता रहता है। आज डोंबिवली में पार्टी की एक शाखा में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के चित्र को लगाने को लेकर दोनों गुटों में जमकर वाकयुद्ध हुआ। स्थिति हाथापाई की भी आ गई थी। वहीं, इससे पहले आज उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे की तस्वीरों को बागी विधायकों के दफ्तरों से हटाने को लेकर भी दोनों गुटों के बीच जमकर वार-पलटवार का दौर देखने को मिला।

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शिंदे समर्थक विधायकों का दावा है कि वह उन लोगों की फोटो नहीं लगाएंगे जो उन्हें गद्दार कहते हैं। हालांकि, शिंदे समर्थक गुट के विधायक लगातार शिव सेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे को सम्मानित बताते हैं। आपको बता दें कि आदित्य ठाकरे लगातार बागी विधायकों को गद्दार बताते रहे हैं। खुद उद्धव ठाकरे भी उन विधायकों पर कई बार धोखा देने का आरोप लगा चुके हैं। दूसरी ओर उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी माने जाने वाले शिवसेना सचिव विनायक राउत ने कहा है कि गद्दारों के कार्यालय में आदित्य ठाकरे और उद्धव ठाकरे की तस्वीरों की जरूरत नहीं है और उन्हें तस्वीरें लगाने का कोई अधिकार नहीं है। हालांकि, विद्रोही विधायक प्रताप सरनाइक ने कहा कि ठाकरे परिवार हमेशा उनके दिल में रहेगा।

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इससे पहले शिंदे ने उद्धव ठाकरे को एक बार फिर से निशाने पर लिया। महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने पुणे में कहा कि सरकार सत्ता में आई और हमारी पार्टी के प्रमुख मुख्यमंत्री बने। हम सब काम में मशगूल हो गए। इस बीच लोग मुझसे मिलने आते थे क्योंकि कुछ लोगों (उद्धव ठाकरे) के पास मिलने जाते लेकिन उन्हें उनसे मिलने का समय नहीं था। हमारे लोगों को भुगतना पड़ा, सरकार में जो हो रहा था वह असहनीय था। शिंदे ने कहा कि बालासाहेब के साथ काम कर चुके वरिष्ठ नेताओं को भी वर्षा बंगले से वापस जाना पड़ा। ऐसी शक्ति का क्या उपयोग? शिंदे ने कहा कि किसने किसको धोखा दिया? हम या कोई और? हमने एक बार फिर शिवसेना का प्राकृतिक गठबंधन बनाया और यह सरकार लोगों की सरकार है।

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