• सावन महीने की हो रही शुरुआत, 29 दिन तक महामृत्युंजय और रुद्राभिषेक करने से मिलेगा लाभ

राजीव शर्मा Jul 22, 2021 16:35

सावन के मद्देनजर मंदिरों में भी तैयारियां की जा रही है। शिव मंदिरों के पुजारियों के मुताबिक कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराते हुए शिवालयों में भक्तों को प्रवेश दिया जाएगा।

मेरठ। भगवान शिव की आराधना का पर्व सावन का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होता है। भक्त सावन में पड़ने वाले सभी सोमवार को विशेष रूप से भगवान शिव की उपासना करते हैं। शिव भक्त शिवालयों में पहुंचकर शिवलिंग पर जलार्पण कर अपने आराध्य देव भगवान भोले शंकर को प्रसन्न कर धर्म लाभ उठाते हैं। शिवालयों में भी इसके लिए विशेष तैयारियां की जाती हैं। सावन माह को देखते हुए शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए तैयारियां शुरू हो गई है। इस वर्ष पवित्र सावन मास की शुरुआत 25 जुलाई से हो रही है। सावन का महीना इस बार 29 दिनों का होगा और इसमें चार सोमवार पड़ेंगे। 22 अगस्त को सावन का महीना समाप्त होगा, उसी दिन रक्षाबंधन पर्व भी मनाया जाएगा। 

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सावन के मद्देनजर मंदिरों में भी तैयारियां की जा रही है। शिव मंदिरों के पुजारियों के मुताबिक कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराते हुए शिवालयों में भक्तों को प्रवेश दिया जाएगा। मेरठ कैंट भगवान औघड़नाथ मंदिर में प्रबंध समिति ने तैयारियां शुरू कर दी हैं मंदिर के अंदर व बाहर बैरिकेडिंग की व्यवस्था कर दी गई है ताकि करोना प्रोटोकॉल का पूर्ण रूप से पालन करते हुए मंदिर में जलाभिषेक और दर्शनों की व्यवस्था बनाई जा सके ,वही महादेव झारखंडी मंदिर प्रबंधन के मुताबिक भक्तों को जागरूक करने के लिए बैनर लगाए जाएंगे। बिना मास्क के किसी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

ज्योतिष पं. राजेश शर्मा ने बताया कि इस बार सावन में ग्रहों की स्थिति सामान्य है। गुरुवार और शनि दोनों वक्री हैं। अमूमन इस समय दोनों ग्रह वक्री होते हैं। लेकिन वृहस्पति कुंभ राशि में हैं जो शुभ नहीं माना जाता है। भक्तों को अपना ध्यान रखना होगा। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी पूजा होती है मानसिक पूजा। भगवान शिव को किसी भी तरीके से अभिषेक पसंद है। यदि किसी भी तरह से घर में भी शिवलिंग बनाकर दूध, जल, गन्ना रस आदि से अभिषेक करते हैं तो भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मनोवांछित फल मिलता है। यदि मंदिर में जाने में असुवधिा हो या कोविड प्रोटोकाॉल का उल्लंघन होता हो तो घर में ही पूजा करें।

ज्योतिषाचार्य सारंगधर त्रिपाठी ने बताया कि सावन के महीने में प्रत्येक दिन भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक किया जाता है। सावन में सोमवार का विशेष महत्व है। कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों पक्षों में शिव वास का भी अलग महत्व है। सावन का प्रथम शिव वास 25 जुलाई को प्रात: 6 बजे तक है। उसी दिन भगवान शिव को जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो जाएगा। पहला सोमवार 26 जुलाई को है। 22 अगस्त को रक्षाबंधन का मुहूर्त सुबह से लेकर शाम 5 बजे तक है। सावन में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय, सत्यनारायण व्रत कथा अनुष्ठान कराने से रोगों का निवारण, सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। 

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सदर स्थित विलेश्वरनाथ मंदिर के पुजारी पं. हरीश चंद्र जोशी ने बताया कि मंदिर परिसर में साफ-सफाई की जा रही है। शासन या प्रशासन की तरफ से इस सम्बंध में कोई दिशा-निर्देश अभी नहीं मिला है। स्थानीय पुलिस यह लिखवाकर ले गई है कि भीड़ नहीं लगने देना है। मंदिर में प्रवेश द्वार और निकासी द्वार के अलावा भी पर्याप्त जगह है, इसलिए पुलिस की मदद से भीड़ को रोका जा सकता है।