दिल्ली में बैठे भाजपा नेता बिहार की भावना को नहीं समझते:तेजस्वी

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तेजस्वी यादव ने बातचीत के दौरान मीडियाकर्मियों के बीच कुछ उक्त मॉल को लेकर कुछ दस्तावेज भी वितरित किए। सीबीआई ने बुधवार को बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले महागठबंधन के विधानसभा में विश्वासमत हासिल करने से कुछ घंटे पहले कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाले के सिलसिले में पटना और अन्य जगहों पर राजद के कई नेताओं के आवासों पर छापेमारी की थी।

पटना, 26 अगस्त। बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कथित तौर पर जमीन के बदले नौकरी घोटाले को लेकर पटना और अन्य जगहों पर राजद के कई नेताओं के आवासों पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की तलाशी को बृहस्पतिवार को ‘‘प्रतिशोध की राजनीति’’ करार किया। यादव ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुझे आश्चर्य हुआ जब कुछ समाचार चैनलों ने गुरुग्राम के एक मॉल को मेरा बताया। मैंने जो जानकारी इकट्ठा की है वह यह है कि यह एक मॉल है जिसका उद्घाटन हरियाणा के कुछ भाजपा नेताओं ने किया था। ये मीडिया चैनल झूठी खबरें गढ़ने में लगे रहते हैं। उन्हें कुछ शोध करना चाहिए। मेरे पास गुरुग्राम स्थित मॉल के मालिकों या भागीदारों के नाम से संबंधित दस्तावेज हैं।’’

उन्होंने बातचीत के दौरान मीडियाकर्मियों के बीच कुछ उक्त मॉल को लेकर कुछ दस्तावेज भी वितरित किए। सीबीआई ने बुधवार को बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले महागठबंधन के विधानसभा में विश्वासमत हासिल करने से कुछ घंटे पहले कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाले के सिलसिले में पटना और अन्य जगहों पर राजद के कई नेताओं के आवासों पर छापेमारी की थी। यह आरोप लगाया गया है कि रेल मंत्री के रूप में राजद प्रमुख लालू प्रसाद के कार्यकाल के दौरान रेलवे में नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों को जमीन के बदले में नौकरी दी गई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे कहना होगा कि दिल्ली में बैठे भाजपा नेता बिहार की भावना को नहीं समझते हैं। वे (केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार) अपने तीन ‘‘जमाई’’ (दामाद) सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग की मदद से विपक्षी सरकारों को परेशान करने की कोशिश करते हैं। इस तरह की धमकी यहां काम नहीं करती है।’’ यादव ने कहा, ‘‘जब भाजपा राज्य में सत्ता में होती है तो पार्टी शासन को ‘‘मंगल’’ राज कहती है। और जब वे सत्ता से बाहर होते हैं तो वे इसे ‘‘जंगल’’ राज कहते हैं। यह सब प्रतिशोध की राजनीति है। मेरे खिलाफ एक मामला 2017 में भी था लेकिन कुछ भी साबित नहीं हुआ। अब भारतीय रेलवे में यह भूमि के बदले नौकरी घोटाला फिर से सामने आया है।

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