तबरेज की मौत के मुद्दे का नहीं होना चाहिए राजनीतिकरण: भाजपा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  सितंबर 20, 2019   08:21
तबरेज की मौत के मुद्दे का नहीं होना चाहिए राजनीतिकरण: भाजपा

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि तबरेज अंसारी की मौत के मामले में कुछ बिंदुओं पर पुलिस का अनुसंधान जारी है और इसमें राजनीतिक दबाव डालना गैरकानूनी भी है।

रांची। भाजपा ने गुरूवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस पर तबरेज अंसारी की मौत के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। पार्टी ने दोनों दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि 15,000 से ज्यादा सिखों की मौत के लिए कथित तौर पर जिम्मेवार दल और उनके सहयोगियों को किसी और को नैतिकता का पाठ नहीं पढ़ाना चाहिए। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि तबरेज अंसारी की मौत के मामले में कुछ बिंदुओं पर पुलिस का अनुसंधान जारी है और इसमें राजनीतिक दबाव डालना गैरकानूनी भी है।

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प्रतुल ने कहा कि तबरेज मामले में शुरुआत में पुलिस ने 302 के तहत मुकदमा दर्ज करके एक दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया। उसके बाद फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट आई जिसमें मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया। तब पुलिस ने धारा 302 को 304 (गैर इरादतन हत्या) में तब्दील करते हुए आरोपपत्र दाखिल किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने आरोपपत्र में स्पष्ट लिखा कि जांच के दौरान कोई नयी बात सामने आने पर धाराओं को बदला जाएगा। एमजीएम हॉस्पिटल, जमशेदपुर ने अपनी जांच रिपोर्ट में हार्ट अटैक का एक कारण सर में लगी चोट को भी बताया। उसके बाद पुलिस ने पूरक आरोपपत्र दाखिल करते हुए कल धारा 304 को फिर से 302 में तब्दील कर दिया। 

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प्रतुल ने आरोप लगाया कि विपक्ष को सीआरपीसी की जानकारी नहीं है। जैसे-जैसे पुलिस को सबूत मिलते गए और रिपोर्ट आई, उसके आधार पर पुलिस ने अपनी जांच को आगे बढ़ाया। प्रतुल ने कहा कि लातेहार का मामला हो या रामगढ़ का मामला, मॉब लिंचिंग के मामलों में झारखंड सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर यह बता दिया कि सरकार ऐसे मामलों में कितनी गंभीर है। इन दोनों मामलों के दोषियों को घटना के डेढ़ वर्ष के भीतर ही सजा मिल गई। इसलिए विपक्ष को मौत पर राजनीति बंद करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सिख दंगे के आरोपी आज भी खुले घूम रहे हैं और अब केंद्र सरकार के प्रयास से जांच फिर से शुरू की गयी है। यह भाजपा शासित सरकार और विपक्ष की सरकारों के बीच की कथनी और करनी के अंतर को दिखाता है। 

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