फिल्म व्यवसाय में गुटबाजी और अविश्वास की समस्या- सुश्री अद्वैता काला

फिल्म व्यवसाय में गुटबाजी और अविश्वास की समस्या- सुश्री अद्वैता काला

भारतीय फिल्में महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। फिल्म लेखन में सफलता के लिए भारतीयता, संस्कृति और सोच को भी पटकथा में शामिल किया जाना चाहिए। अनुभव, भारतीय परंपराओं सहित महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर फिल्म लेखन में असीम संभावनाएं हैं।

भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित ऑनलाइन व्याख्यानमाला ‘स्त्री शक्ति संवाद’ में प्रख्यात फिल्म पटकथा लेखिका एवं उपन्यासकार सुश्री अद्वैता काला ने कहा है कि भारतीय फिल्में महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। फिल्म लेखन में सफलता के लिए भारतीयता, संस्कृति और सोच को भी पटकथा में शामिल किया जाना चाहिए। अनुभव, भारतीय परंपराओं सहित महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर फिल्म लेखन में असीम संभावनाएं हैं। इस तरह के विषयों पर लोगों में रुचि अधिक होती है। 

 

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‘नये समय में पटकथा लेखन’ विषय पर अपने व्याख्यान में सुश्री अद्वैता काला ने कहा कि ऐसा माना जाता है कि आप तभी लेखक हो जब तक आपकी किताब न छप जाए लेकिन ऐसा है नहीं, अगर आपका लेखन अच्छा है तो आपको जरूर मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि भारतीय फिल्म व्यवसाय कुछ हद तक पुरुष प्रधान माना जाता है। कुछ हद तक यह बात सही भी है लेकिन ऐसा नहीं कि महिलाओं ने इस व्यवसाय में सफलता हासिल नहीं की है। ऐसे कई नाम और उदाहरण हैं, जिनसे कहा जा सकता है कि यह क्षेत्र महिलाओं के लिए भी उतनी ही है जितनी पुरुषों के लिए। हालांकि फिल्म लाइन में दिखाई दे रहे नकारात्मक माहौल को दूर करने के लिए चिंतन जरूर किया जाना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि आप जो भी लिख रहे हैं उसका कॉपीराइट जरूर कराना चाहिए। लेखन के क्षेत्र में चोरी एक सबसे बड़ी समस्या है। अपने विचार और आईडिया हर किसी से शेयर नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पटकथा लेखन के दौरान कहानी के साथ अपने आप को जोड़ कर देखना होता है तभी आप कहानी के साथ न्याय कर सकते हो। खुद के अनुभवों के आधार पर लेखन को नई दिशा दी जा सकती है। जरूरी नहीं हर कहानी पर फिल्म बनाई जाए लेकिन इस आधार पर आपको लिखना बंद नहीं करना चाहिए। लेखन को मन से जोड़ कर किया जाना जरूरी है। लेखन के लिए जरूरी है कि सबसे पहले आप डर और चिंता छोड़कर लिखना शुरू करें।

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सुश्री अद्वैता काला ने बताया कि ‘कहानी’ फिल्म की पटकथा लिखते समय उन पर मुंबई के आतंकवादी हमले का काफी असर हुआ। उनकी इस फिल्म में यह बात नजर भी आती है। उन्होंने कहा कि घटनाओं के आधार पर आपके लेखन की शैली तक बदल जाती है। उन्होंने कहा कि फिल्म में टीम वर्क के आधार पर काम होता है। इस क्षेत्र में आपसी विश्वास बनाना जरूरी होता है। फिल्म व्यवसाय में गुटबाजी और अविश्वास की समस्या भी देखने को मिलती है। आपसी समन्वयन के अभाव में फिल्म के क्षेत्र में कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं।





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